श्री समीर लाल जी : तो अब तालियों के साथ स्वागत कीजिये समीर लाल जी का जो आ रहे हैं अपनी एन मौके की पांच मिनटि में लिखी ग़ज़ल के साथ । समीर लाल जी के बारे में जितना जानता हूं उससे ये कह सकता हूं कि वे बरसों हास्य में अपना समय व्यर्थ करते रहे जबकि उनके अंदर तो एक गहन संवेदनशील रचनाकार छिपा है । एक ऐसा रचनाकार जो ऐसी चीजों को पकड़ता है जो आम कवि नहीं पकड़ पाता । मेरी मां लुटेरी थी जैसी अद्भुत रचना लिखने वाले समीर जी को अब हास्य केवल गद्य में लिखना चाहिये क्योंकि पद्य में वे बहुत अच्छी संवेदनशील कविताएं लिख रहे हैं और लिख सकते हैं । इनका काव्य संग्रह बिखरे मोती ऐसी ही संवेदनशील कविताओं का संग्रह है । तो आनंद लीजिये श्री समीर जी की ग़ज़ल का ।
उड़नतशतरी : सब लिख रहे हैं तो ५ मिनट में प्रथम भाव,,,,,पक्का बहर में तो हो नहीं सकते, अब आप बोलोगे कि कैसे ठीक हो..पुराना अनुपस्थित रहने का रिकार्ड यूँ ही थोड़े है :
मरता है वो ही जाने, जहर की खामोशी
कितनी जानलेवा है दोपहर की खामोशी
खुद ही देख लेना ओ! साहिल के सितारों
कितनी खतरनाक है ये लहर की खामोशी
तर्रनुम में कहना जो गज़ल लिख चले हो
खुद ही पता लगेगी, वो बहर की खामोशी
अंजाम-ए-हादसा तो आवाज़ ही ले उड़ा है
कुछ तो बता ही देगी, इस शहर की खामोशी
दी है ये खबर किसने, आपस में लड़ रहे हैं
यूँ बदजुबां न होगी उस कहर की खामोशी.
और अंत में ये फोटो वट सावित्री की पूजा के लिये हमारी माताजी और पत्नी जी ने नया तरीका अपनाया । हमारे द्वारा बनाये गये बरगद के बोन्साई की ही पूजा की । सही है 45 डिग्री तापमान में बरगद के पेड़ को ढूंढने कहां जायें । ये पेड़ 25 साल पुराना है ।