मंगलवार, ५ जनवरी २०१०

बहुत घना कोहरा, कड़ी ठंड और उसके बीच चलता हुआ एक मुशायरा । तरही मुशायरे में आज सुनिये दो शायरों की ग़ज़लें, गिरीश पंकज और प्रकाश पाखी की ग़ज़लें ।

देखते ही देखते नया साल आ भी गया है । 2010, देखने में ही सुंदर अंक लग रहा है । अब देखते है कि ये बीस दस क्‍या गुल खिलाता है । आज कोहरे का जो आलम देखा वो अनोखा था । इतना कि वास्‍तव में हाथ को हाथ ही नहीं सूझ रहा था । हर तरफ धुंध और धुंआ । ठंड इतनी कि मोटर साइकल चला कर आफिस पहुंचने पर ज्ञात हुआ कि शायद हाथ हैं ही नहीं । टटोल कर देखा कि कहीं गिर तो नहीं गये । कुछ देर बाद हाथ वापस आये । मौसम की सबसे कड़ाके की ठंड ने सीहोर को आज अपने आग़ोश में ले लिया है । सब कुछ रुक गया है लेकिन हमारा तरही मुशायरा तो चालू है । डॉ आज़म साहब ने बहुत ही जोरदार शुरूआत दी है मुशायरे को । कायदे में सोमवार को तरही का अगला अंक लगना था क्‍योंकि सोमवार और गुरूवार ये दो दिन ही सोचे थे तरही के लिये । लेकिन शिवना प्रकाशन की नये वर्ष की पहली पुस्‍तक अनुभूतियां लेखक दीपक चौरसिया मशाल, प्रकाशित होकर आ गई है और आज उरई उप्र में उसका विमोचन होना है । बस पुस्‍तकों को लेकर कल कुछ व्‍यस्‍तता थी । ये शिवना की पहली पुस्‍तक है जो ISBN  के साथ आई है । पुस्‍तक के बारे में जानकारी अगले अंक में क्‍योंकि तब तक इसका विमोचन हो चुका होगा । आज तो आप स्‍वयं करे उसका विमोचन

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ग़ज़ल का सफ़र  blog300 ब्‍लाग को जिस प्रकार आप सबने हाथों हाथ लिया है वह सुखद लगा । वहां पर जो योजन है उसके अनुसार माह की तीन निश्चित तारीखों को लेख लगा करेंगें । दस दस दिन के अंतर से वहां लेख प्रकाशित हुआ करेंगें और उसकी सूचना ब्‍लाग के सदस्‍यों को मेल द्वारा मिल जाया करेगी ।  वहां पर सब कुछ पुस्‍तक के स्‍वरूप में होगा । अर्थात अध्‍याय होंगे एक के बाद एक और बाकायदा तारतम्‍य में होंगें ।

न जाने नया साल क्‍या गुल खिलाए

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इस बार की तरही को लेकर कई सारे लोगों की रचनाएं मिल चुकी हैं । और कुछ लोग अभी तक भेज रहे हैं । नये साल की तरही है इसलिये सब ने बहुत अच्‍छी रचनाएं भेजी हैं । जाहिर सी बात है कि इसके बाद जो तरही आनी है वो होली  विशेषांक होगा । पिछली बार का होली विशेषांक बहुत सराहा गया था  । इस बार भी कुछ अलग करने की योजना है । खैर वो तो अगले की बात मगर फिलहाल तो अभी की बात की जाये । आज हम दो और शायरों को ले रहे हैं । इनमें से एक पहली बार तरही में आ रहे हैं और दूसरे हमारे जाने पहचाने हैं ।

आइये सबसे पहले सुनते हैं गिरीश पंकज जी की ग़ज़ल। चूंकि ये तरही में पहली बार आ रहे हैं अत: पहले जानते हैं उनके बारे में । श्री गिरीश पंकज जी संपादक, " सद्भावना दर्पण"/ सदस्य, " साहित्य अकादमी"/ नई दिल्ली/ अभी हाल ही में किताबघर, दिल्ली  द्वारा प्रकाशित तीसरा ग़ज़ल शतक में ग़ज़ले समाहित / ३ उपन्यास, ८ व्यंग्य संग्रह, २ ग़ज़ल संग्रह सहित २९ पुस्तकें प्रकाशित/. गिरीश पंकज व्यक्तित्व-कृतित्व पर कर्णाटक के शिक्षक नागराज द्वारा पीएचडी एवं उपन्यास पालीवुड की अप्सरा पर पंजाब के दीपिका द्वारा शोध कार्य जारी

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गिरीश पंकज

इसी बात पर हम नहीं मुस्कराए
''न जाने नया साल क्या गुल खिलाए''

हुआ जो बुरा तुम उसे भूल जाओ
नया दौर शायद नया रंग लाए

अगर टूटते हैं उन्हें टूटने दो
दुबारा सभी ने ही सपने सजाए

कहाँ पल रहा है सदा एक जैसा
कभी ये रुलाए कभी ये हँसाए

उठो तुम तो पंकज करो खैरमकदम
नया पल ये आया है लो खिलखिलाए

हुआ जो बुरा तुम उसे भूल जाओ नया दौर शायद नया रंग लाए । वाह वाह वाह कितनी सकारात्‍मक सोच से भरा हुआ है ये शेर । पूरी ग़ज़ल सकारात्‍मक शेरों से भरी हुई । यही तो जीवन है, विगत का भुला कर आगत का स्‍वागत करना । बहुत उम्‍दा ग़ज़ल कहने के लिये बधाई ।

आइये अब सुनते हैं प्रकाश पाखी जी की ग़ज़ल इनका परिचय इसलिये नहीं क्‍योंकि ये हमारे जाने पहचाने हैं पूर्व की तरही में भाग ले चुके हैं तथा अब ग़ज़ल की पाठशाला के नियमित छात्र हैं । इन्‍होंने ग़ज़ल के साथ ये कमेंट भेजा है आवाज फटे बांस सी है और शायरी पढना नहीं आता इसलिए प्रकाश अर्श भाई से मेरी गजल पढवाना मेरा सपना है...

pakhiप्रकाश पाखी

नसीबों की सरगम अमर राग गाए
शुभम गान हो जिन्दगी धुन बजाए 

मिले गम नया या ख़ुशी दे के जाए 
''न जाने नया साल क्या गुल खिलाए'' 

मुसीबत बड़ी हो तो भी डर नहीं है 
मिरे हौसलों में कमी बस न आए 

न पीने की खाई क़सम तो है लेकिन 
अदा कोई दिलकश कसम तोड़ जाए 

सदर बेहयाई करे अब बचा क्या 
रिआया ही पत्‍थर कोई अब उठाए 

जमीं की हकीकत तो कडवी थी पाखी 
बड़े ख्वाब जन्नत के क्यूँकर सजाए
 

वाह वाह अच्‍छे शेर निकाले हैं ।  बहुत ही हौसले का शेर लिखा है मुसीबत बड़ी हो तो भी डर नहीं है मिरे हौसलों में कमी बस न आए । बहुत ही सुंदर शेर निकाला है । पूरी ग़ज़ल ही बेहतरीन बन पड़ी है । एक एक शेर बोलता हुआ शेर है । बधाई हो ।

आज के दोनों ही शायरो ने समां बांध दिया है दोनों ही ग़ज़लें बहुत ही सुंदर हैं तो आज आनंद लीजिये इन दोनों ग़ज़लों का । और इंतजार कीजिये अगले अंक का । और हां पिछली पोस्‍ट पर प्रकाश पाखी जी ने कुछ जिज्ञासा प्रकट की हैं । आपमें से कोई भी पिछली पोस्‍ट पर उनकी टिप्‍पणी में जाहिर जिज्ञासा का समाधान इस पोस्‍ट पर टिप्‍पणी के माध्‍यम से करें ।

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