सोमवार, 14 दिसंबर 2009

नीरज गोस्‍वामी जी और आदरणीय भाभीजी को विवा‍ह की वर्षगांठ की शुभकामनाएं, और कुछ बातें इस बार के तरही मुशायरे के मिसरे की मुश्किलों के बारे में ।

नीरज जी ये बात हो रही थी उस दिन तो उन्‍होंने मुझसे पूछा कि आपने 10 दिसंबर को ही शादी क्‍यों की मैंने कहा कि नीरज जी दरअसल में बात ये है कि दो दिसंबर की रात को भोपाल गैस कांड हुआ, फिर उसके बाद में छ: दिसंबर को बाबरी मस्जिद कांड हुआ तो मुझे लगा कि अपना कांड करने के लिये भी दिसंबर का माह ही ठीक है । तो मैंने दो दिसंबर और छ: दिसंबर की कन्‍टीन्‍यूटी को बरकरार रखने के लिये छ: दिसंबर के ठीक चार दिन बाद अर्थात दस दिसंबर को शादी की । इस पर नीरज जी ने हंसते हुए बताया कि ये बहुत अच्‍छा है क्‍योंकि ठीक चार दिन बाद अर्थात चौदह दिसंबर को मेरी शादी की वर्षगांठ है । ये भी खूब रही कि चार चार दिन के अंतर से सारी घटनाएं हुईं ।

विवाह की वर्षगांठ की शुभकामनाएं

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नीरज जी का जन्‍मदिन भी चौदह को होता है और विवाह की वर्षगांठ भी चौदह को है । और एक बात ये कि नीरज जी का विवाह ठीक पच्‍चीस की उम्र में हो गया था । 1975 के चौदह दिसंबर को जब उनका विवाह हुआ तो वे पच्‍चीस वर्ष पूरा कर चुके थे । उनका जन्‍मदिन चौदह अगस्‍त को आता है । नीरज जी के बारे में यदि लिखने बैठूं तो शायद शब्‍दों का ही टोटा पड़ जायेगा । उनके जैसा व्‍यक्ति दूसरा मैंने नहीं देखा है । मैं बहुत दिनों से उनके लिये कोई ठीक सा विश्‍लेषण ढूंढ़ रहा था लेकिन मिल ही नहीं रहा था । अचानक ही कल रात को टीवी पर देखा तो सांताक्‍लाज नजर आ रहे थे । बस मुझे मेरा नाम मिल गया । तो नीरज जी की तुलना सांता क्‍लाज से की जा सकती है । ( बेशक वे इतने बूढ़े नहीं हैं ) किनतु सबके ब्‍लागों पर वे जिस प्रकार खुशियों के तोहफे बांटते फिरते हैं उससे तो यही कहा जा सकता है कि ये एक ऐसे सांताक्‍लाज हैं जो आने के लिये किसी क्रिसमस का इंतजार नहीं करते ।

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मुझे तो सांताक्‍लाज ने कुछ तोहफे सचमुचे के भी दिये हैं जो मेरे लिये अमूल्‍य हैं । ( हां चिक्‍की का पैकेट अभी तक नहीं मिला और पूरी ठंड बीती जा रही है । ) आदरणीया भाभीजी से अभी तक मुलाकात नहीं हो पाई है किन्‍तु वे भी साहित्‍य की शौकीन हैं ये मुझे पता है । क्‍योंकि मेरी पुस्‍तक ईस्‍ट इंडिया कम्‍पनी की कहानियों पर जिस प्रकार के उनके कमेंट मुझे नीरज जी के माध्‍यम से मिले वो कमेंट कोई स्‍थापित साहित्‍यकार ही दे सकता है । ( कही ऐसा तो नहीं कि ग़ज़लें वास्‍तव में आदरणीय भाभीजी ही लिखती हों और नीरज जी उनको अपने नाम से ब्‍लाग पर पेल देते हैं । ) विशेषकर कुछ जटिल कहानियों पर जिस प्रकार से उनके कमेंट मिले मैं हैरत में रह गया । आदरणीय भाभीजी आलू के परांठे बहुत अच्‍छे बनाती हैं ये मैंने सुना है किन्‍तु ज्ञात नहीं कि उन परांठों को चखने का सौभाग्‍य कब मिलेगा । मिष्‍टी के बारे में क्‍या कहूं मिष्‍टी तो अपने दादा दादी की जान है, वो है ही इतनी सुंदर और प्‍यारी । तो हम सबकी तरफ से नीरज जी को और आदरणीया भाभी जी को विवाह की वर्षगांठ की शुभकामनाएं । और ये दो सर्वकालिक महान गीत हम सबकी तरफ से दोनों को सप्रेम भेंट ।

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गीत क्रमांक 1

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गीत क्रमांक 2

चलिये अब पूरी कक्षा प्रतीक्षा कर रही है कि कब विवाह की वर्षगांठ की पार्टी की बची खुची मिठाई खाने को मिले ।

इस बार के तरही को लेकर कई सारे मेल मिले हैं । कई लोगों ने काफिये को जानने के बारे में लिखा है । वैसे तो मैंने उस पोस्‍ट में ही लिख दिया था कि यदि आपने मतले में कोई बंदिश लगाई तो उसको पूरी ग़ज़ल में निभाना होगा । जैसे यदि मतले में आपने लिया चलाए और खिलाए  तो फिर आपको पूरी ग़ज़ल में यही निभाना होगा मसलन हिलाए, दिलाए, मिलाए,  । और यदि आपने ले लिया डराए गिराए  तो फिर अब आप बंध गये हैं  राए साथ । वैसे तो हम देवनागरी में ग़ज़ल लिखते हैं अत: ईता का दोष कोई मायने नहीं रखता क्‍योंकि वह उर्दू लिपि के साथ ही होता है । किन्‍तु फिर भी यदि कोई ईता का दोष नहीं रखना चाहता तो वो हर्फे रवी ( तुक का अक्षर ) काफिये से हटा के फिर काफिये को देखे यदि अक्षर समान अर्थ उत्‍पन्‍न कर रहा होता है तो इसका अर्थ है कि ये काफिया नहीं चल सकता है । किन्‍तु ये पूरी तरह से उर्दू के लिये है ।

तुम्‍हीं ने दर्द दिया है तुम्‍ही दवा देना :  जिसने भी काफिया दिया है वही सारे सवालों का उत्‍तर भी देगा और हासिले मुशायरे का चयन भी वही करेगा । तो इस बार डॉ आज़म का मिसरा है इसलिये अगली पोस्‍ट में उनके ही द्वारा इस मिसरे पर काफियों की जानकारी दी जाएगी । ये क्रम आगे भी चलेगा कि जो भी व्‍यक्ति मिसरा देगा वही बताएगा कि काफिये क्‍या होंगें और अन्‍य तकनीकी जानकारी क्‍या होगी । ( जिन्‍होंने इस बार का मिसरा नहीं दिया वे सोच रहे होंगें बच गये रे )

इस बार का मुशायरा होगा भी :  इस बार नववर्ष के प्रथम या द्वितीय रविवार को मुशायरे का बाकायदा सीहोर में आयोजन भी किया जाएगा । इसमें भोपाल और सीहोर के शायर काव्‍य पाठ करेंगें । आप सब भी सादर आमंत्रित हैं । प्रत्‍यक्ष न आ सकें तो नेट के माध्‍यम से काव्‍य पाठ करें ।

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