सोमवार, 3 दिसंबर 2007

माड़साब अपनी ग़ज़ल की कक्षाओं के साथ वापस आने वाले हैं बच्‍चे तैयार रहें

गज़ल की कक्षाओं को कुछ दिनों के लिये बंद करने का जो निर्णय था वो दो कारणों से लिया गया था पहला तो यही कि ऐसा लग रहा था कि छात्रों और छात्राओं में कुछ ऊब सी लग रही थी ऐसा लग रहा था कि दिलचस्‍पी कम हो रही है और दूसरी बात ये कि विद्युत मंडल ने जो सुबह की कटौती प्रारंभ की है वो उसी समय की है जो समय ग़ज़ल की कक्षाओं के लिये होता था । खैर अबऐसा लग रहा है कि बच्‍चों में फिर से उत्‍सुकता जागी है तो अब क्‍लासें शुरू करने की इच्‍छा हो रही है । मीनाक्षी जी कंचन जी अनूप जी और नए छात्र अजय के साथ शुरू करेंगें हम कक्षाओं को अभिनव ने केवल एक नवम्‍बर तक की छुट्टी ली थी पर एक दिसम्‍बर भी हो गया पता ही नहीं कहां हैं उधर उड़न तश्‍तरी तो भारत के दौरे पर है और अब वहां से ब्‍लागिंग बंद कर रखी है । अच्‍छा भी है अपने मुल्‍क लौट कर आने के बाद उस माटी को छूना और वहां पर अपने बचपन को तलाश करना ये ज्‍यादा बड़े काम हैं तो हमने समीर जी को कनाडा वापस आने तक छ़ुट्टी दे रखी है । चलिये तो जल्‍द ही शुरू हो रहीं हैं ग़ज़ल की क्‍लासें इस बार बहरों और उनके नामों और मात्राओं जैसे दुश्‍कर काम के साथ चालू होगा नया सत्र आप ये भी मान सकते हैं कि हमारे बचपन में जैसे गर्मी के साथ दीपावली पर भी एक माह की छुट्टी मिलती थी ये वही थी । पत्र लिखें ताकि पता लगे छात्रों में उत्‍साह है । नए छात्र अजय जी के लिये ये कि अभी आपको बहुत मेहनत करनी है मगर प्रयास जारी रखें सब हो जाएगा ।
और अब आज का होमवर्क जो कि माड़साब को यकीन दिलाण्‍गा कि बच्‍च्‍े सचमुच में ग़ज़ल की क्‍लास शुरू होने को लेकर काफी उत्‍साहित हैं एक मिसरा है उसको लेकर कुछ कार्य करना हे माने कि गज़ल के कुछ शेर निकालने हैं । मिसरा है
साथ शबनम के रो गए हम भी
पत्तियां कुछ भिगो गए हम भी
शायर अहमद मुश्‍ताक ( पाकिस्‍तान)

4 टिप्‍पणियां:

  1. यस सर, मैं पहले बहर निकलने का प्रयास कर रहा हूँ, होम वर्क का शेष भाग भी शीघ्र पूरा कर के जमा कर दूँगा.

    साथ शबनम के रो गए हम भी
    पत्तियां कुछ भिगो गए हम भी
    बहर - २२११ - १२१२ - ११२

    साथ - 2
    शब - 2
    नम - 11
    के - 1
    रो - 2
    गए - 12
    हम - 11
    भी - 2

    पत्ति - 2
    यां - 2
    कुछ - ११
    भि - १
    गो - 2
    गए - 12
    हम - 11
    भी - 2

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  2. गुरू जी confusion....? पहली पंक्ति की शुरुआत दीर्घ-लघु से है और दूसरी पंक्ति की लघु-दीर्घ से अब हम किस तरह से शुरू करेंगे? त् और ति मिल कर दीर्घ नही होगा क्या? बहुत ज्यादा कन्फ्युजिया गये है हम?

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  3. मुहब्‍बतों के शहर से कोई3 दिसंबर 2007 को 6:45 pm

    सा थ शब नम के रो ग ए हम भी
    2 1 2 2 1 2 1 2 2 2
    पत्‍ ति यां कुछ भि गो ग ए हम भी
    2 1 2 2 1 2 1 2 2 2
    फा ए ला तुन मु फा ए लुन फा लुन
    दू र था डू ब ता हु आ सू रज
    हम ने सो चा के लो ग ए हम भी

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  4. सर जी

    मुझे देर से दाखिला देने के लिए बहुत धन्यवाद आपको
    आप के क्लास के विश्राम के कारण मुझे आपके पिछले क्लास्सेस पढने का समय मिल गया

    लेकिन आखिर की कुछ क्लास्सेस ठिक से पल्ले नहीं पड़ी, मुझे वह दोबारा पढ़नी पड़ेगी
    (बहर निकलना जरा सा मुश्किल लगता है, पर जैसा की आपने कहाँ प्रयास करने से आ जाएगा)

    सवाल बहुत से है लेकिन मुझे , शायद उसके लिए आपको अलग से email करने पड़ेंगे

    इस टिपण्णी के लिए कुछ प्रयास है होम वर्क के जवाब के रूप में

    बहर निकलने की कोशिश कर रहा हूँ (इस पर छड़ी शायद मिले, लेकिन नया छात्र समझ कर, थोडी सी ढील दे दीजिएगा )


    सा थ शब नम के रो ग ए ह म भी
    २ १ २ २ १ २ १ १ १ १ २

    पत् ति यां कुछ भि गो ग ए ह म भी
    २ १ २ २ १ २ १ १ १ १ २

    बहर - २१२२ - १२११ - ११२


    सवाल : सर जी, यहाँ पर सवाल यह है, की, जब हम grouping करतें है मात्राओं की , तो उसे 4 मात्राओ में ही ग्रुप करने होंगे क्या? क्या हो जब हमें केवल 3 मात्रा ही आ रही हो, जैसा की ऊपर हो रहा है?

    दूसरा सवाल : मतले के बाद जो शेर आतें है, क्या उसमे भी मिश्रा उला बहर में होने चैह्ये, या केवल मिश्रा सानी में ही
    (इस सवाल के जवाब के ऊपर निर्भर करता है मेरे शेर के सही और ग़लत होने का)

    साथ शबनम के रो गए हम भी
    पत्तियां कुछ भिगो गए हम भी

    शाम से था इंतज़ार तेरा
    रात के साथ सो गए हम भी

    ढूंढते हैं हर जगह तुमको
    पर यहाँ ख़ुद ही खो गए हम भी

    दिल की दीवारों पे था जो नाम तेरा
    आँसुओ से वो धो गए हम भी

    लोग कहते थे प्यार के किस्से
    प्यार के बीज बो गए हम भी

    सादर
    अजय

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