मंगलवार, 4 दिसंबर 2007

रात पिछले पहर वो हवाएं चलीं, फूल रोने लगे, ज़ख्‍़म गाने लगे , तेरे जाने के दिन तेरे आने के दिन याद की शाख़ पर चहचहाने लगे

तो माड़साब की वापसी पर छात्र और छात्राओं ने फुल बेवकूफियां करके और ग़लतियां करके माड़साब का स्‍वागत किया है और ये ही हाल रहा तो आगे क्‍या होगा खुदा ही जानता है ।

होमवर्क था कि

साथ शबनम के रो गए हम भी

पत्तियां कुछ भिगो गए हम भी

कंचन सिंह चौहान फरमा रहीं हैं कि

गुरू जी confusion....? पहली पंक्ति की शुरुआत दीर्घ-लघु से है और दूसरी पंक्ति की लघु-दीर्घ से अब हम किस तरह से शुरू करेंगे? त् और ति मिल कर दीर्घ नही होगा क्या? बहुत ज्यादा कन्फ्युजिया गये है हम?

छ: महीने में माड़साब ने ये ही सिखाया कि नाक कटा दो उनकी। आपको कहा गया है कि उच्‍चारण के साथ शुरूआत करें । सही है कि पहली पंक्ति में शुरूआत दीर्घ सा के साथ हो रही है जिसके तुरंत बाद में आ रहा है   जो कि लघु है पर आप ये फरमा रहीं हैं कि मिसरा सानी में शुरूआत हो रही है लघु से, भोत बढि़या भई भोत बढि़या, माड़साब की नाक कटाने का इससे अच्‍छा कोई भी तरीका नहीं हो सकता है । मिसरा सानी में शुरूआत है पत्तियां  से मतलब  पत्‍ ति यां  मैंने बताया था कि उच्‍चारण से ही समझना है कि आधा अक्षर किसके साथ घर बसाने जा रहा है आगे वाले के साथ या पीछे वाले के साथ । यहां पर जो आधा   है वो मिला है अपने से पहले के   के साथ आप उच्‍चारण देखें तो हम कहते हैं पत्‍ ति यां  मतलब हो गई समस्‍या हल आप तो भेनजी फिजूल में ही कन्‍फ्यूजिया रहीं थीं अब एक काम करें कि कोने में जाकर मुर्गी बन जाएं और किताबें सर पे रख कर ।

अभिनव ने कहा है

यस सर, मैं पहले बहर निकलने का प्रयास कर रहा हूँ, होम वर्क का शेष भाग भी शीघ्र पूरा कर के जमा कर दूँगा.
साथ शबनम के रो गए हम भी
पत्तियां कुछ भिगो गए हम भी
बहर - २२११ - १२१२ - ११२
साथ - 2
शब - 2
नम - 11
के - 1
रो - 2
गए - 12
हम - 11
भी - 2
पत्ति - 2
यां - 2
कुछ - ११
भि - १
गो - 2
गए - 12
हम - 11
भी - 2

चलो ग़नीमत है कि आखिर के दो रुक्‍न तो ठीक निकाले हैं पर पहले रुक्‍न में इत्‍ती बड़ी बेवकूफी करी है कि हाया में सदके जाऊं । अब कोई इनसे पूछे कि साथ  को एक दीर्घ मानने का काम ये किस प्राकर से कर रहे हैं । जबकि वहां पर एक सा  है और एक   है जो कि अलग अलग हैं और इनका वज्‍़न है 21  भाईसाहब ने एक पूरी की पूरी लघु की भ्रूण हत्‍या कर दी है । और शबनम  में शब  का वज्‍़न जब सही निकाल लिया था तो फिर नम  ने आपका क्‍या बिगाड़ा था जो आपने उसका हाजमा बिगाड़ दिया । भई जो शब  का किया वही तो नम  का करना था । वज्‍़न होता शबनम 22 , मतलब कि साथ शबनम  का वज्‍़न होगा 2122 अर्थात फाएलातुन । अब आपने दूसरा रुक्‍न तो ठीक निकाला है जिसमें के रो गए  आता है  अर्थात के गिर के हो गया लघु फिर रो  एक दीर्घ फिर एक लघु और फिर एक और दीर्घ । मतलब कि वज्‍़न हुआ मुफाएलुन 1212 ये आपने सही निकाला है । उसके बाद आपने जो वज्‍़न निकाला है वो है हम भी ये वज्‍़न 112  हो सकता है और इसे ज़रूरत होने पर 22  भी कर सकते हैं । अर्थात फएलुन भी और फालुन भी। तो आपने दो रुक्‍न ठीक निकाले हैं पर पहले में ही इतनी बड़ी ग़ल्‍ती कर दी है कि आपको छोड़ा नहीं जाएगा तो अब आप भी कंचन के साथ मुर्गा बनो जाकर ।

Ajay Kanodia एक नए छात्र हैं अभी दाखिला लिया है तालियों से स्‍वागत करे पूरी क्‍लास इनका ।

(बहर निकलना जरा सा मुश्किल लगता है, पर जैसा की आपने कहाँ प्रयास करने से आ जाएगा)
बहर निकलने की कोशिश कर रहा हूँ (इस पर छड़ी शायद मिले, लेकिन नया छात्र समझ कर, थोडी सी ढील दे दीजिएगा )
सा थ शब नम के रो ग ए ह म भी
२ १ २ २ १ २ १ १ १ १ २
पत् ति यां कुछ भि गो ग ए ह म भी
२ १ २ २ १ २ १ १ १ १ २
बहर - २१२२ - १२११ - ११२
सवाल : सर जी, यहाँ पर सवाल यह है, की, जब हम grouping करतें है मात्राओं की , तो उसे 4 मात्राओ में ही ग्रुप करने होंगे क्या? क्या हो जब हमें केवल 3 मात्रा ही आ रही हो, जैसा की ऊपर हो रहा है?
दूसरा सवाल : मतले के बाद जो शेर आतें है, क्या उसमे भी मिश्रा उला बहर में होने चैह्ये, या केवल मिश्रा सानी में ही
(इस सवाल के जवाब के ऊपर निर्भर करता है मेरे शेर के सही और ग़लत होने का)
साथ शबनम के रो गए हम भी
पत्तियां कुछ भिगो गए हम भी
शाम से था इंतज़ार तेरा
रात के साथ सो गए हम भी
ढूंढते हैं हर जगह तुमको
पर यहाँ ख़ुद ही खो गए हम भी
दिल की दीवारों पे था जो नाम तेरा
आँसुओ से वो धो गए हम भी
लोग कहते थे प्यार के किस्से
प्यार के बीज बो गए हम भी

अब छड़ी तो पड़ेगी भैया आपने तालियां तो ले लीं हैं आते ही पर अब छड़ी की बारी है । जहां तक तक्‍तीई का सवाल है वो तो आपने लगभग सही ही की है कुछ ग़लतियां हैं पहला रुक्‍न आपने सही निकाला है 2122 और आखिर का भी सही है 112  मगर बीच वाले में जो आपने 1211 किया है वो ग़लत है बीच वाला रुक्‍न है भिगो ग ए मतलब भि एक लघु फिर गो एक दीर्घ फिर एक लघु और आखिर में एक दीर्घ अर्थात 1212 , आपने जो शे'र भेजे हैं उनमें अधिकांश में मिसरा सानी तो सही आ रहा है पर मिसरा ऊला सबमे बहर से बाहर हो रहा है । विशेषकर दिल की दीवारों पे था जो नाम तेरा ये मिसरा तो चीन की दीवार की तरह कुछ ज्‍यादा ही लंबा हो गया है ।

फिर भी आपका एक शे'र पूरा का पूरा बहर में है लोग कहते थे प्‍यार के किस्‍से, प्‍यार के बीज बो गए हम भी ।  मगर ये केवल बहर में ही है इसमें बात नहीं है मतलब जिस पर वाह वाह की जा सके वो बात नहीं है ।
आपके दोनों सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगें कि मतले के बाद भी वज्‍़न लेकर ही चलना है मतला कोई राजनैतिक दलों का एजेंडा नहीं है कि जब चाहे जब छोड़ दो और दूसरा ये कि तीन मात्राओं का भी रुक्‍न होता है जो ऊपर है ही । हाथ आगे करिये बीस छड़ी लगानी है ।

मुहब्‍बतों के शहर से कोई  अब ये तो पता नहीं ये कौन है क्‍योंकि अगले ने नाम नहीं लिखा है पर किया सब कुछ ठीक ठाक है । हां ये ग़लतफहमी ना रखें कि उसने दूसरा शे'र सही निकाल के बताया है दरअस्‍ल में दूसरा शे'र भी मुश्‍ताक़ साहब  का ही है जिनकी वो ग़जल है ।

सा थ शब नम के रो ग ए हम भी
2 1 2 2 1 2 1 2 2 2
पत्‍ ति यां कुछ भि गो ग ए हम भी
2 1 2 2 1 2 1 2 2 2
फा ए ला तुन मु फा ए लुन फा लुन
दू र था डू ब ता हु आ सू रज
हम ने सो चा के लो ग ए हम भी

अच्‍छा काम किया है आपने मुहब्‍बतों के शहर वाले पर अपना नाम तो बता देते भले आदमी ।

खैर आज के शीर्षक में अहमद मुश्‍ताक़ साहब की एक और ग़ज़ल का शे'र लगा है

रात पिछले पहर वो हवाएं चलीं, फूल रोने लगे, ज़ख्‍़म गाने लगे

तेरे जाने के दिन, तेरे आने के दिन, याद की शाख़ पर जगमगाने लगे

एक दिलचस्‍प तरीके से लिखी गई ग़ज़ल है तो निकालिये इसका वज्‍़न और करिये इस पर मेहनत कुछ और शे'र निकालने में । अभी हम कक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं ताकि छात्र छात्राएं कक्षाओं के लिये मानसिक रूप से तैयार हो सके उसके बाद ही हम चालू करेंगें अपनी कक्षाएं ।

8 टिप्‍पणियां:

  1. यस सर,
    मुर्गा बन लिए हैं पाँच मिनट तक। ग़लती भी समझ में आ गई।

    बहर: २१२२ -१२२१ - २२१२ -- २१२२ -१२२१ - २२१२
    रात पिछले पहर वो हवाएं चलीं, फूल रोने लगे, ज़ख्‍़म गाने लगे
    तेरे जाने के दिन, तेरे आने के दिन, याद की शाख़ पर जगमगाने लगे

    रात पिछले - २१२२
    पहर वो ह - १२२१
    वाएं चलीं, - २२१२
    फूल रोने - २१२२
    लगे, ज़ख्‍म - १२२१
    गाने लगे - २२१२

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  2. अभिनव ने ठीक ठीक पकड़ लिया है मुर्गा बनाने का फायदा ही ये ही है कि उससे दिमाग के दरवाजे खुल जाते हैं । दरअसल में ये दो जोड़ से बनी हुई ग़ज़ल है पर इसकी धुन बहुत अच्‍छी है इस पर काम करेंगें तो कुछ अच्‍छा बन जाएगा

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  3. सर जी

    तालियों के लिए शुक्रिया, और साथ ही हवा में ज्यादा न उड़ने देने के लिए भी शुक्रिया ( २० छड़ी जो हातों पर पड़ी)
    उड़न तस्तरी वाले समीर भाई साहब होते तो कहते अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे |

    तो दो बातें समझ आई , "गए" में "ऐ" हमेशा दीर्घ ही होगा, दिखने में भले ही लघु दिखे
    और दूसरी की मिश्रा उला और मिश्रा सानी सारी ग़ज़ल में एक ही बाहर पर चलेंगी

    तो इस बार वाले होम वर्क की बहर कुछ इस प्रकार होंगी


    रात पिछले पहर वो हवाएं चलीं, फूल रोने लगे, ज़ख्‍़म गाने लगे
    २ १ २ २ १२ २ १२२ १२ २१ २२ १२ १२ २२ १२

    [२१२२ १२२१ २२१२ २१२२ १२१२ २२१२]

    तेरे जाने के दिन, तेरे आने के दिन, याद की शाख़ पर जगमगाने लगे
    २१ २२ १ २ २१ २२ १ २ २१ २ २१ २ १२२२ १२

    [ २१२२ १२२१ २२१२ २१२२ १२१२ २२१२ ]


    २१ २२ १२ २ १ २ २ १ २ २ 1 २२ १२ २१ २२१ २
    जाम बैठे थे ले कर यहीं सोच कर, पी के तुझको सनम भूल जायेंगे हम
    याद तेरी सताई के इतनी हमें , जाम पी पी के ख़ुद को भुलाने लगे
    २१ २२ १२२ १ २२ १२ २१ २ २ १ २१ २ २२ १२


    २१ २ २ १ २२ १२२ १ २ २१२ २ १२ २१ २ २१२
    बाद मुद्दत के होगी मुलाकात जब सोचता था मेरी आँख भर आएगी
    वक्त आया मगर तुमसे मिलने का जब देख के हम तुम्हे मुस्कुराने लगे
    २१ २२ १२ १२ २२ १ २ २१ २ २ १२ १२२२ १२




    सादर
    अजय

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  4. awaah ye to zaikedar class hai

    फाइलुन ४ बार
    रात पिछ २१२
    ले पहर २१२
    वो हवा २१२
    एं चलीं, २१२
    फूल रो २१२
    ने लगे, २१२
    ज़ख्म गा २१२
    ने लगे २१२
    २१ २, २

    II
    तेरे जा २१२
    ने के दिन, २१२
    तेरे आ २१२
    ने के दिन, २१२
    याद की २१२
    शाख़ पर २१२
    जगमगा २१२
    ने लगे २१२
    Devi

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  5. मेरे देश के नौजवानों को मेरी श्रधांजलि

    मिरे देश के नौजवानों को अरपन

    दिखे जिसमें भारत यही है वो दरपन

    निछावर करे जाँ, लहू से जो सींचे

    महकती वो सांसें, महकता वो गुलशन

    देवी नागरानी

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  6. mera homework aur chand sawal. Anoop ji ke gazal mein sher shamil ho yeh khushi ki baat hai,. par kya hum aur jo sher bante hain usse apni nayi gazal taiyaar kar sakte hain. jaise koi tarahi gazal ke taur.

    रचना का यह सार देखो
    हाँ क्षतिज के पार देखो.

    अपना कद इक बार देखो
    फिर क्षितिज के पर देखो।


    आँख से संसार देखो
    फिर क्षितिज के पर देखो।

    जानोगे औकात अपनी
    अपना कद इक बार देखो।
    jaise ye chand sher bane hai. jawab se assaniyan bad jayengi.

    रचना का यह सार देखो
    हाँ क्षतिज के पार देखो.

    अपना कद इक बार देखो
    फिर क्षितिज के पर देखो। ya

    जानोगे औकात अपनी
    अपना कद इक बार देखो।

    खलबली है सोच में क्यों
    अपना खुद व्यहवार देखो।

    पानी हो पहचान अपनी
    अपना कद इक बार देखो।

    लैला मजनू को थी हासील
    इश्क की वो मार देखो

    कितने पापड़ बेले देवी
    वक्त की दरकार देखो

    दिन सुनहरे रात चाँदी
    रचना का यह सार देखो।

    वोट लेकर मुंह को मोडे
    आज की सरकार देखो।

    आदमी के नाम पर अब
    लोगों का व्यहवार देखो।

    झूठ सच को चल रहा है
    नफरतों सा प्यार देखो।

    ईंटों की अनबन से देवी
    गिर रही दीवार देखो।

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  7. रात पिछले पहर वो हवाएं चलीं, फूल रोने लगे, ज़ख्‍़म गाने लगे

    212-212-212-212-
    तेरे जाने के दिन, तेरे आने के दिन, याद की शाख़ पर जगमगाने लगे
    212-212-212-212

    उत्तर देंहटाएं