Tuesday, 27 November, 2007

कुछ दिन और अनुपस्थित रहूंगा अभी मैं

मित्रों हैं और भी ग़म मोहब्‍बत के सिवा वाली बात अभी मुझ पर लागू है और मैं कुछ दिनों के लिये अपनी परेशानियों में उलझा हूं आशा हूं आप मुझे कुछ दिनों की छुट्टी प्रदान करेंगें । एक बात का दुख जरूर है मैं 15 दिनों से अनुपसिथत हूं पर किसी भी छात्र ने मेल कर के पूछा नहीं कि क्‍या बात है माडसाब क्‍लास क्‍यों बंद हैं ।

3 टिप्पणियाँ:

मीनाक्षी said...

दुखी न होइए क्योंकि अपेक्षा करना दुखों का कारण है...
जैसे आप परेशानियों में उलझे हैं शायद आपके छात्र भी किसी न किसी चक्रव्यूह में फँसे होंगे.
आपकी परेशानियाँ सुलझ जाएँ यही शुभकामना करते हैं.

अनूप भार्गव said...

आप का इंतज़ार रहेगा ।

Devi Nangrani said...

आपकी साईट पर एक शबनमी ताजगी का एहसास रहता है. नित नया, कुछ और फिर कुछ और. आपके आने पर जो मिलेगा वो भी कुछ नया होगा.
देवी