सोमवार, 31 दिसंबर 2007

एक बरस बीत गया, एक बरस बीत गया, झुलसाता जेठ मास, शरद चांदनी उदास, सिसकी भरते सावन का अंर्तघट रीत गया, एक बरस बीत गया, एक बरस बीत गया

और देखते ही देखते एक और बरस बीत गया । हमारे जीवन का एक और साल चला गया । युगों से ये ही होता आ रहा है और न जाने कब तक ये ही चलता रहेगा । साल आते रहेगें और जाते रहेंगें । हम आज जहां पर हैं कल वहां पर हमारे बच्‍चे होंगें और परसों उनके भी बच्‍चे होंगें । हममे से कई ऐसे होंगें जिनको आने वाले समय में भी याद रखा जाएगा और कई ऐसे भी होंगें जो गुमनाम ही चले जाऐंगें । हममे से ही शायद कोई ऐसा कवि आएगा जो कि हो सकता है मीरा सूर कबीर की तरह अमर हो जाएगा । बरसों बाद भी उसकी कविताएं गुनगुनाती रहेंगीं । आज जैसे हम ग़ालिब को और तुलसी को गाते हैं उस तरह शायद हममे से कोई कवि ऐसा हो जिसे हमारे बाद आने वाली पीढियां गाएं । आज मैंने श्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता को मुखड़े में लगाया है मुझे अटल जी की कुछ कविताएं बहुत पसंद हैं । एक उनकी कविता है टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्‍वर पत्‍थर की छाती में उग आया नव अंकुर  ये भी मुझे खास तौर पर पसंद है । कहते हैं कि कविता की मौत नहीं होती है वो तो सदियों तक जिंदा रहती है और अपनी पहचान बनाए रखती है आज हम किसी भी रूप में तुलसी को कबीर को गाते ही हैं । कविता हर समय का सबसे सशक्‍त हथियार है वो आपरेशन करने वाला औजार भी है और फिर घाव पर लगाया जाने वाला मरहम भी वही है । कविता ने मानव को स्‍वर दिया है हम कल्‍पना नहीं कर सकते कि तब क्‍या होगा जब कविता मर जाएगी । मैं ये बात इसलिये कह रहा हूं कि आज भी कविता संकट में है और आने वाला समय तो और भी कष्‍टदायक होना है । कविता विरोध करने का सबसे सशक्‍त तरीका है । कविता तलवार की तरह से घाव नहीं करती कविता तो सूई की तरस से धंस जाती है और टीसती रहती है । शायद इसीलिये राजनीति को कविता पसंद नहीं आती है ।

आज कविता की बात इसलिये कर रहा हूं कि कविता ने पिछले साल मुझे कई अच्‍छे मित्र दिये हैं मेरे फलक को और विस्‍तृत कर दिया है । और इस साल के प्रारंभ में हिंद युग्‍म पर भी मैं ग़ज़ल की और कविता की नियमित कक्षाएं प्रारंभ करने जा रहो हूं । यहां पर ब्‍लाग पर तो काफी आगे हम आ चुके हैं और काफी विद्यार्थी काफी अच्‍छा लिखने लगे हैं । मगर अभी भी ऐसा लगता है कि और भी कुछ किया जाना बाकी है । अपने ब्‍लाग पर ग़ज़ल की कक्षाएं प्रारंभ करते समय मुझे ज्ञात नहीं था कि ये कक्षाएं मुझे कितने नए लोगों तक पहुंचा देंगीं । प्रारंभ मे तो मैं भी गंभीर नहीं था पर जैसे जैसे लोग जुड़ते गए कारवां बनता गया और आज हम एक परिवार की तरह से हैं । अभी कुछ दिनों पहले यहां के दैनिक जागरण ने हमारी ग़जल की क्‍क्षाओं पर विशेष समाचार बनाया था । जिसमें सभी विद्यार्थियों का भी उल्‍लेख था एक दो दिन में मैं उस समाचार को स्‍कैन करके लगाऊंगा ताकि सभी उसे देख लें । रवि रतलामी जी  ने अनुरोध किया है  कि मैं हार्डवेयर पर भी एक ब्‍लाग प्रारंभ करके वहां पर कम्‍प्‍यूटर हार्डवेयर का ज्ञान देना प्रारंभ करूं । मेरी भी इच्‍छा है पर क्‍या करा जाए समय की सीमा है मैं प्रात: का जो थोड़ा सा समय है वही दे सकता हूं । फिर भी प्रयास करूंगा कि कुछ कक्षाएं उस पर चालू कर  सकूं ।

पिछले साल ने मुझे काफी कुछ दिया है । पिछले साल में मेरी दस कहानियां और इतने ही व्‍यंग्‍य पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए और चर्चित भी हुए । कवि सम्‍मेलनों में भी पसंद किया गया और पत्रकार के रूप में कुछ कहानियों को प्रमुख चैनलों पर स्‍थान मिला । उसके अलावा आप सभी से जो परिचय हुआ वो तो साल की सबसे बड़ी उपलब्‍धी है । एक साल ठीक तरीके से ग़ुज़र रहा है । हालंकि व्‍यवसाय में परेशानी का साल रहा । व्‍यवसाय ठीक नहीं चल रहा है क्‍योंकि आजकल कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण केन्‍द्रों की बाढ़ सी आ गई है । उस पर ये भी नहीं देखा जाता कि सिखाने वाले को खुद भी आता है या नहीं । हो सकता है कि 2008 में व्‍यवसाय को नया मोड़ देना पड़े । हालंकि जो कोर्स हम चलाते हैं उसमें हार्डवेयर, नेटवर्किंग और ग्राफिक्‍स एनीमेशन जैसे विषय हैं पर फिर भी वो बात नहीं आ पा रही है जो आनी चाहिये । शायद छोटी जगह पर काम करने का ड्रा बैक है ये ।

कल मुशायरा है कुछ ही लोगों की कविताएं आईं हैं आज तक जिनकी भी आ जाएंगी उनको लेकर ही कल का मुशायरा होगा । और फिर नए साल में हम प्रारंभ करेंगें बहरों का ज्ञान । अभी मैं क्‍लासों को इसलिये बंद रखे हूं क्‍योंकि अभी छुट्टी का समय चल रहा है सभी लोग परिवारों के साथ हालिडे मना रहे हैं और ऐसे में बहरों का महत्‍वपूर्ण सेशन शुरू करने से उनको नुकसान होगा । तो हमने भी हालीडे घोष्ति कर रखा है । आप सब को आने वाले 2008 की शुभकामनाएं । आपका ही पंकज सुबीर ।

5 टिप्‍पणियां:

  1. सुबीर जी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं. बहर पर कक्षा जल्दी लगाएं. मुझे आकर सीखना है आप से. इश्वर आप के व्यापार में इस साल दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करे.
    नीरज

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  2. सर जी, हैप्पी न्यू इअर.

    आने वाला वर्ष लाये आपके लिए हर्ष ही हर्ष,
    अच्छी ग़ज़लें लिखें स्टूडेंट्स रंग लाये आपका संघर्ष,
    नया वर्ष आपके व्यवसाय हेतु शुभ हो,
    उन्नति के नए आयाम आपके द्वार पर करें आराम,


    इस शुभकामना के साथ,
    आपका नालायक शिष्य,
    अभिनव

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  3. नव वर्ष की शुभकामनाएं...! उम्मीद है हमारी गलतियों को क्षमा करते हुए हम पर विद्या की शिक्षा वृष्टि होती रहेगी।

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  4. नव वर्ष की शुभकामनाएं...!

    Devi

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  5. रिपुदमन पचौरी3 जनवरी 2008 को 6:39 am

    नव वर्ष की शुभकामनाएं...!

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