रविवार, 11 नवंबर 2012

दीपावली के पांच दिवसीय त्‍यौहार का पहला दिवस आप सबके लिये मंगलमय हो । आइये आज राजीव भरोल, प्रकाश अर्श, अंकित सफर और वीनस केशरी के साथ मनाते हैं धन तेरस ।

धन तेरस का मूल अर्थ क्‍या होता है ये तो हम भूल ही गये हैं । बाज़ार ने केवल 'धन' शब्‍द ही हमें याद रहने दिया है । बाज़ार उन्‍हीं शब्‍दों को बचा रहने देता है जो उसके लिये सुभीते के होते हैं । एक ऐसा दिन जो आरोग्‍य से जुड़ा हुआ था उसको बाज़ार ने धन से जोड़ दिया । वैसे हमारे बुजुर्गों ने कहा है कि पहला सुख निरोगी काया । मगर आज सबसे पहला सुख लोगों ने धन को कर लिया है । हम बाज़ार के हाथों की कठपुतली हो कर रह गये हैं । हम एक चीज़ खरीदते हैं तो पता ये चलात है कि उसका दूसरा संस्‍करण सामने आ गया है । कल मैं भी बच्‍चों के साथ भोपाल के बाज़ार में था । एक उदाहरण है ये बस, मैं सर्दियों में होंठ फटने की समस्‍या के चलते लिप गार्ड हमेशा अपने साथ रखता हूं । ये समस्‍या मुझे बचपन से ही है । लिप गार्ड जो दा या पन्‍द्रह रुपये का आता है । इस बार दुकानदार ने जो लिप गार्ड दिखाया वो 220 रुपये का था । मैंने कहा भाई दस रुपये की चीज़ 220 में । वो उस चीज़ के फायदे गिनाने लगा । मैंने कहा भाई मेरी दस रुपये वाली ही दे दो । तो वो उसके पास थी ही नहीं । ये है बाज़ार । खैर आइये आज हम आरोग्‍य के दिवस को मनाते हैं ।

lakshmi

deepawali

आज हम चार युवा शायरों के साथ धनतेरस का ये त्‍यौहार मना रहे हैं । राजीव भरोल, प्रकाश अर्श, अंकित सफर और वीनस केशरी ।

deepawali

arsh

प्रकाश अर्श

अगर वो अश्क़बार हो तो  हो रहे तो  हो रहे
जो वक़्त शर्मसार हो तो  हो रहे तो  हो रहे

ये मोजिज़ा मुझे भी एक बार तो नसीब हो
की दाग़ दाग़दार हो तो  हो रहे तो  हो रहे

मुझे अजीज़ है मेरा ये ख़ुद से इंक़लाब भी
जो ग़म भी शानदार हो तो हो रहे तो  हो रहे 

मुझे चराग़-ए-इश्क़ ने तो बख्श दी है रौशनी
घना जो अन्धकार हो तो हो रहे तो हो रहे

ये एहतियात क्या कोइ करे है इश्क़ में कहीं 
ये दिल जो बेक़रार हो तो हो रहे तो हो रहे

तवील हो सफ़र भी और तमाम मुश्किलें भी हों
जो धूप सायादार हो तो हो रहे तो हो रहे

रगों में आशिकी मेरी जुनूं-ए-इश्क़ है मेरा
दीवानगी में यार हो तो हो रहे तो हो रहे

लहू में इख्तलाफ  हो अजीयतों के वास्ते
जो अर्श ज़ार ज़ार हो तो हो रहे तो हो रहे

deepawali

अच्‍छी ग़ज़ल कही है । हालांकि उर्दू शब्‍दकोश से शब्‍दों को उठा कर रखने के लोभ को संवरण नहीं कर पाया है शायर । पता नहीं क्‍यों लुगद के शब्‍दों को हमने विद्वता का पैमाना बना लिया है । बहरहाल गज़ल अच्‍छी बन पड़ी है । गिरह का शेर बहुत सुंदर तरीके से बांधा है ।  स्‍वयं से ही बगावत करने का शेर बहुत अच्‍छा और प्रभावी बना पड़ा है । इश्‍क में एहतीयात नहीं बरत सकने वाला शेर भी अच्‍छा बन पड़ा है । अच्‍छी ग़ज़ल ।

ankit safar

अंकित सफ़र

क़रार बेक़रार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।
ये दिल कुसूरवार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

कोई निगाह एक दिन चुरा ही लेगी दिल तेरा,
तू लाख होशियार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

फ़क़त लुभाने के लिए मैं मीठे बोल बोलूँ क्यूँ,
सुभाव ज़िम्मेदार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

हमारे हाथ चुन ही लेंगे जो वो चुनना चाहेंगे,
जो फूल संग ख़ार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

ऐ रौशनी, न दख्ल दे तू रात के मिज़ाज में
'घना जो अन्धकार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।'

सवालों से परे रहेगी उसकी ज़िन्दगी सदा,
किसी को ये ख़ुमार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

ये रूह अपनी नीम-अक्स रूह है तलाशती,
ये जिस्म दरकिनार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

मेरी दमक ही तय करेगी मेरे दाम को यहाँ,
वो नामचीं सुनार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

deepawali

बच्‍चे क्‍या कहूं तेरे इस शेर पर 'कोई निगाह एक दिन चुरा ही लेगी दिल तेरा'  । पहले दिन जिस मासूमियत की बात की थी उस मासूमियत से लबरेज और छलकता हुआ शेर है ये । बहुत बहुत सुंदर । दिल खुश कर दिया बच्‍चे । प्रेम के हो जाने का सारा रहस्‍य इस एक ही शेर में छुपा दिया । पीठ करो ज़रा ठोंक दूं । अब बात गिरह की, क्‍या कमाल की गिरह है । ऐसा भी सोचा जा सकता है । प्रकृति के हर अंग का अपना मिज़ाज है उस में दख्‍ल नहीं देना चाहिये । कमाल की गिरह । और फिर एक अनोखा शेर ये रूह अपनी नीम अक्‍स रूह है तलाशती,  क्‍या कहूं जी करता है सीने से लगा लूं भींच कर । जीते रहो खुश रहो और यूं ही लिखते रहो ।

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राजीव भरोल

हमारे दिल पे भार हो, तो हो रहे तो हो रहे.
तुम्‍हें  किसी से प्यार हो, तो हो रहे तो हो रहे.

जुनूने इश्क में उलझ पड़ा हूँ खुद से आज मैं,
गिरेबाँ तार तार हो तो हो रहे तो हो रहे.

वो झूठ बोलता है जानते हैं सब मगर तुम्हें.
उसी पे ऐतबार हो तो हो रहे तो हो रहे.

नदी खुद आ गई है घर तलक, उस आदमी को ही,
जो तिश्नगी से प्यार हो तो हो रहे तो हो रहे.

सफर में जुगनुओं को साथ ले, निकल पड़े हैं हम,
"घना जो अन्धकार हो, तो हो रहे तो हो रहे".

बात पहले आखिरी शेर की जो गिरह का भी शेर है । बहुत सुंदर तरीके से गिरह बांधी है । जुगनुओं को लेकर सफर करने की बात प्रतीक के माध्‍यम से पक्ष भी है और विपक्ष भी । वो झूठ बोलता है जानते हैं सब मगर तुम्‍हें, ये शेर भी एक बार फिर से सादगी का शेर है । ग़ज़ल में बातें की जाती हैं, इसीलिये जब कोई मिसरा एकदम बातचीत के लहजे पर होता है तो वह बहुत सुंदर होता है । जैसा कि ये शेर है । और जुनूने इश्‍क में खुद से उलझने वाला शेर भी अच्‍छा बना है । सादे तरीके से कहे गये अच्‍छे शेर ।

deepawali

venus

वीनस केशरी

सुखन जो रोज़गार हो, तो हो रहे, तो हो रहे
अदब जो दरकिनार हो, तो हो रहे, तो हो रहे

अभी न फैसला हुआ, गलत सहीह का तो फिर
तुम्हें जो अख्तियार हो, तो हो रहे, तो हो रहे

यकीन करके उसपे ले, रहा हूँ सारे फैसले
सनक में यह शुमार हो तो हो रहे, तो हो रहे

बिखर गया वो शख्स जो, न चल सका समय के साथ
हज़ार शहसवार हो तो हो रहे, तो हो रहे

उन्हें कहाँ समय कि, मेरे दिल का हाल जानते
मुझे जो उनसे प्यार हो, तो हो रहे, तो हो रहे

ग़ज़ल की राह चुन ही ली, तो राह तो कठिन न कर
ये क्या कि, गुल हो, ख़ार हो, तो हो रहे, तो हो रहे

अवाम को सहर की चाह, हुक्मरां ये कह रहा
घना जो अन्धकार हो, तो हो रहे, तो हो रहे

ए दोस्त मेरा शहर हादिसों का शहर हो गया
न सोचना कि यार! हो,  तो हो रहे, तो हो रहे

ए वीनस अब वही करो, तुम्हारा दिल जो कह रहा
ख़फा जो बार बार हो, तो हो रहे, तो हो रहे

मतला बहुत सामयिक है आज के मंचीय कवियों और शायरों के लिये बहुत सटीक बना है । वीनस इसको किसी कवि सम्‍मेलन में ज़रूर सुनाना शायद कुछ तो शर्म आये मंचीय कवियों को । सनक में शुमार होने वाला शेर बहुत सुंदर बन पड़ा है विशेषकर मिसरा उला के बाद सनक में शुमार होना जो आया है वो गुदगुदा भी जाता है और आनंद भी दे जाता है ।  एक और मासूम शेर है उन्‍हें कहां समय कि मेरे दिल का हाल जानते, इसमें बहुत अच्‍छी तरह से बात कही गयी है । गिरह का शेर भी आज के हालात पर बहुत सटीक ढंग से टिप्‍पणी कर रहा है । बहुत सुंदर ।

deepawali

आज के चारों शायरों ने रंग जमा दिया है । बहुत कमाल की रचनाएं कही हैं । अब आप की जिम्‍मेदारी है उतने ही कमाल के साथ दाद देने की । प्रशंसा कीजिये इस युवा पीढ़ी की जो आने वाले कल में परिदृश्‍य पर छाने वाली है । और मिलते हैं कल कुछ और रचनाकारों के साथ ।

deepawali

76 टिप्‍पणियां:

  1. दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें |
    उत्कृष्ट प्रस्तुति पर बधाई ||

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  2. अर्श जी की "तवील हो सफ़र और तमाम मुश्किलें भी हों वाले मिसरे का कोई जवाब नहीं"।
    अंकित जी द्वारा लिखा मिसरा "ऐ रौशनी न दख्ले दे तू रात की मिज़ाज़ पर का या कहना"।
    भरोल जी का ये मिसरा" नदी खुद आ गई है घर तलन, उस आदमी को ही" लाज़वाब है।
    वीनस केसरी जी का मतला "अदब की वर्तमान स्थिति पर बेहतरीन तंज कस रहा है।

    आप चारों को बहुत बहुत बधाई और धन्यवाद भी।

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    1. डॉ. दानी जी हार्दिक धन्यवाद

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    2. कोई शे'र आपको पसंद आया संजय जी ये मेरे लिए फ़्क़्र की बात है ! बहुत शुक्रिया और दीवाली की बधाई !

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  3. दीपावली की मंगलकामनाओं के साथ ’धनतेरस’ के मूल की चर्चा कर आदरणीय पंकजभाईजी आपने आज के बाज़ारवादियों के शातिरपने को बखूबी साझा किया है.
    तथ्य यही है, जानते-बूझते हमने स्वयं को बाज़ार के खूनी पंजों की ज़द में कर लिया है. आवश्यकता और प्रदर्शनप्रियता का अंतर समझ में नहीं आता अब. तब भी एक घर चलता था, आज भी एक घर चलता है. तब के सामान और सोच तथा आज के सामान और सोच को हम देख लें.
    आपकी संयत एवं सुदृढ़ सोच के हम हामी हैं.
    सादर.. .


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  4. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें, एक से बढ़कर एक खूबसूरत ग़ज़ल वाह दाद कुबूल करें.

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    1. प्रस्तुति को पसंद करने के लिए बहुत शुक्रिया अरूण शर्मा जी ! बहुत शुक्रिया और दीवाली की बधाई !

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  5. प्रकाश भाई ’अर्श’ का धीर व्यक्तित्व और गंभीर प्रकृति आपकी ग़ज़ल से भी झलकती है.
    मुझे अजीज़ है मेरा.. . मेरे दिल के बहुत करीब का शेर हुआ है. हज़ार-हज़ार बधाइयाँ, प्रकाश भाई.
    ये एहतिया क्या कोई.. . क्या महीन सोच है ! अद्भुत !!
    उस पर से गिरह जिस लिहाज़ से आपने बाँधा है वह बस ’वाह’ का कारण बना है.
    दिल से दाद कुबूल फ़रमाइये, भाई.
    ऋषि धन्वंतरि सदा सहाय्य.. .

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    1. ग़ज़ल के शे'र पसंद आये , ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है सौरभ जी ! धनतेरस के साथ दीवाली की बहुत बधाई आपको तथा आपके पूरे परिवार को !
      अर्श

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  6. भाई राजीव भरोल जी को सुनता रहता हूँ. अपना परस्पर होना भले आभासी प्रतीत हो परन्तु विचारों से अनुमन्य तथ्यों का साझा होते रहना आत्मीय लिहाज़ का सफल कारण रहा है.
    आपकी ग़ज़ल किस सुन्दरता से और किस आसानी से भी अपनी बातें साझा कर रही हैं यह हम जैसों के लिये उदाहरण भी है.
    हमारे दिल पे.. . इस मतले से बयां हाले दिल हमें देर तक थामे रहा.
    किस-किस शेर की चर्चा करूँ, समझ में नहीं आ रहा है. हर शेर ज़िन्दाबाद है.
    बधाई-बधाई-बधाई.
    ऋषि धन्वंतरि सदा सहाय्य.. .

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  7. प्रकाश अर्श जी का तीसरा चौथा शेर , अंकित सफर जी का तीसरा और सातवां शेर , राजीव भरोल जी के सभी पांचो शेर ,वीनस केशरी के लगभग सभी शेर दमदार लगे !

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    1. अश्विनी जी,
      तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ

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    2. बहुत बहुत शुक्रिया रमेश जी ! दीवाली की शुभकामनाये !

      अर्श

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    3. अर्श जी ,वीनस जी शुक्रिया !

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  8. वीनस केसरी.. . यह अब नाम मात्र नहीं है मेरे लिये.
    साहित्य के खेत में इस बिरवे को जनमते तो नहीं किन्तु उभार-आकार लेते अवश्य देख रहा हूँ. एक हद के आगे मैं निपट व्यक्तिगत न हो जाऊँ.. किन्तु, बनना, बिखरना, कहना, सुनना... देर-देर तक तथ्यों को बेलाग साझा करना, मानना, न मानना, फिर मानना, हर कुछ.. विस्मित तो करता ही है, संतुष्टिदायी आश्वस्ति का कारण भी है.
    बिरवा तमाम झंझाओं से बस बचा रहे. अवश्य ही जिनका होना मात्र बाह्य कारकों पर ही निर्भर नहीं करता.

    आज की ग़ज़ल पर फिर कभी.. या फिर कोई आवश्यकता नहीं.

    ऋषि धन्वंतरि सदा सहाय्य.. .

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    1. आपका कहा एक एक शब्द मेरे लिए आशीर्वाद है
      इस स्नेह वर्षा के लिए आपना ह्रदय से आभारी हूँ

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  9. और अब अंकित सफ़र .. .
    आज के चारों शायरों में जिसने मुझे वाकई चौंकाया है, नहीं-नहीं, मुझे ले उड़ा है वह है अंकित भाई. सही कहा आदरणीय पंकजभाई ने पीठ थपथपाना तो बनता ही है, अलबत्ता हर शेर पर कलेजे से लगा लेने को जी करता है. बहुत खूब अंकित भाई, बहुत खूब !

    क़रार बेक़रार हो.. . इस मतले की सादग़ी भरी उड़ान पर दिल से मुबारकबाद.
    फ़कत लुभाने के लिये.. . वाह-वाह-वाह.. एकदम सही कहा ! भइ, इज़्ज़त देना एक बात है और चाटुकारिता ओह-ओह !
    ऐ रौशनी, न दख़्ल दे.. . इतनी सुन्दर गिरह ! कितने ऊँचे ख़याल ! बधाई-बधाई-बधाई.
    ये रूह अपनी नीम-अक्स.. . उफ़्फ़्फ़ !
    अंकित की उम्र क्या होगी, पंकज भाईजी ? इतनी ठोस समझ !!
    मेरी दमक तय करेगी.. . इस आत्मविश्वास पर सिर झुक न जाये, हो ही नहीं सकता. बहुत-बहुत बने रहें.
    और जिस शेर पर वस्तुतः इस्पेशली बधाई देनी है वह है ..
    कोई निग़ाह एक दिन.. .
    अपने होने पर कितना सही बयां हुआ है इस शेर में !
    तो यह आज की पौध का अंदाज़ !
    अंकितभाई, हृदय-तल से असीम शुभकामनाएँ लें.. .

    ऋशि धन्वंतरि सदा सहाय्य.. .

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    1. आदरणीय सौरभ जी, आपका आशीर्वाद और शुभकामनाएं दोनों ही मुझे आगे और अच्छा कहने में मदद करेंगी.
      वैसे मेरी उम्र का प्रश्न गुरुदेव से पुछा गया है लेकिन मैं ही बताने की गुस्ताखी कर देता हूँ.............२७

      अपनी उम्र लिखते हुए चचा ग़ालिब का ये शेर याद आ रहा है.
      कब से हूँ क्या बताऊँ जहाने-ख़राब में.
      शब हाय हिज्र को भी रखूँ गर हिसाब में.

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  10. यूहूहूहूहूहूहू..... ग़ज़ल की इस चमकती, दमदमाती पीढ़ी को देखकर कितना सकूँ मिलता है हम ग़ज़ल-आशिक़ों कि उफ़्फ़ !

    चारों ने ही एक से बढ़ कर एक अशआर कहे हैं...

    अंकित की गिरह एकदम अनूठी, सबसे ज़ुदा ...मुझे याद है एक और किसी तरही में उसने एकदम सबसे उलट भाव लिए गिरह लगाई थी|

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  11. अंकित,अर्श और वीनस तीनों ने ही कमाल किया है. अंकित ने 'गर्मियों की ये दुपहरी' वाली तरही में भी एकदम चौंकाने वाली एक दम अलग गिरह लगाई थी इस बार भी वही किया..यूं तो पूरी गज़ल शानदार है लेकिन 'कोई निगाह एक दिन' तो बस गजब है..
    अर्श की गज़ल में 'ये एहतियात क्या कोई करे है इश्क में कभी' बेहद पसंद आया. गिरह भी बहुत अच्छी है. सभी शेर बढ़िया हैं. वीनस ने भी बहुत ही सुंदर गज़ल कही है. मलता बहुत पसंद आया. "यकीन में ले रहा हूँ.." खास तौर पर पसंद आया. बहुत खूबसूरत गिरह लगाई है. बहुत बहुत बडाही.

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    1. राजीव भाए बहुत बहुत धन्यवाद

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    2. राजीव जी बहुत शुक्रिया ! मगर आपसे कुछ और शे'र सुनना चाहता था !
      दीवाली की शुभकामनाएं !
      अर्श

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    3. राजीव भाई, शुक्रगुजार हूँ. आप की ग़ज़लें मुझे हौसला देती हैं.

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  12. मेरे कमेन्ट लगता है स्पैम में जा रहे हैं..

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  13. आज की पोस्ट ही नहीं ये पूरा तरही मुशायरा अंकित ने लूट लिया है,,, मुझे नहीं पता आगे क्या आने वाला है लेकिन जो भी जैसी भी रचनाएँ आयें अंकित की ग़ज़ल की चमक को कम नहीं कर पाएंगीं,,,,अद्भुत गिरह,,,अवाक कर देने वाली,,,दांतों तले उँगलियाँ दबाने को मजबूर करते एक से बढ़ कर एक शेर,,, ये बालक लम्बी रेस का घोडा है,,,घोडा भी एरा गैरा नहीं,,,अरबी घोडा,,,,जियो अंकित जियो,,,कमाल कर दिया इस बार तरही में,,,गुरुदेव का यूँ गदगद होना गलत नहीं है,,,कोई भी शायरी का दीवाना गुरु देव ने जो कहा उस से इतर नहीं कहेगा,,,इस बार मिलो अंकित शानदार पार्टी दूंगा,,,

    राजीव और वीनस बेहतरीन ग़ज़लकार हैं राजीव जहाँ अपनी बात सरलता से कह जाते हैं वहीँ वीनस का है अंदाज़े बयां और,,,,अर्श जी की घलें बहुत सरल सहज होती हैं इस बार उन्होंने कुछ भरी शब्दों का प्रयोग किया है लकिन क्या खूब किया है,,,

    इन सभी युवा शायरों को ढेरों ढेर बधाई,,,

    नीरज

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    1. आदरणीय नीरज जी
      हार्दिक आभार

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    2. बहुत शुक्रिया आ. नीरज जी !

      दीवाली की शुभकामनाएं !

      अर्श

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    3. सर जी..... आपका तहे दिल से आभारी हूँ. वैसे पुरानी छूटी हुई पार्टियों को मिलाकर इन पार्टियों का नंबर बढ़ते बढ़ते १० पहुँच चूका है. २५ नवम्बर के बाद कभी भी आदेश दें, बंदा आपके दरबार में हाज़िर हो जायेगा.

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    4. पोस्ट ही नही, मुशायरा भी अंकित ने लूट लिया...सहमत, सहमत

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  14. प्रकाश ‘अर्श’:
    प्रकाश पर्व पर अर्श की फ़र्श पर लिखी ये ग़ज़ल ताकीद करती है कि पाठशाला के छात्र अब अंगुली पकड़े बिना भी चल सकते हैं। बावज़ूद इसके कि शुद्ध हिन्दी में बड़ी मात्रा में सफ़ल ग़ज़ल कही जा चुकी हैं, उर्दू के शब्द यदा-कदा शायर को आकर्षित कर ही लेते हैं। पिछले छ: माह में बहुत सी ग़ज़लों में देखा लेकिन मैनें मोजिज़ा शब्द देखा मगर प्रयोग में नहीं लिया है; सोच रहा हूँ एकाध शेर तो कह ही डालूँ।
    अंकित:
    'कोई निगाह चुरा ही लेगी.... ’ तो भाई सार्वभौमिक स्थिति है, शायद ही कोई बचा हो, आप कैसे बचेंगे। कई लोग तो कहते हैं कि ‘अगर ये बार बार हो ..... ‘ । ऐ रौशनी निश्चित ही एक नया नज़रिया है तरही मिसरे को देखने का। ‘ये रूह अपनी... ‘ में बात गहरी उतर गयी। ‘मेरी दमक ... ‘ में अच्छी चुनौती है।
    राजीव भारोल:
    भाई ये कौन ज़ालिम है जो किसी से प्यार करे और आपके दिल पर भार हो। आप डबल भार पैदा कर दो। ‘ज़नूने इश्क .. ‘ की जि़द्दोज़ेहद से कभी न कभी तो पाला पड़ता ही है। किसी के झूठ पर मर मिटना भी एक अदा है बकौल ग़ालिब साहब ‘तेरे वादे पर जिये हम तो ये जान लेना जानम् के खुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता’ नदी (कुआ) खुद प्यासे के पास आ जाये और प्यासा ही दीवाना हो तो ऐसा ही होता है भाई। सफर में जुगनुओं को साथ लेना तो भाई बाकमाल है।
    वीनस:
    सुखन की बात हो या सही ग़ल़त के फ़ैसले की या यकीं की इन्तिहा की बात पूरे रंग में है और उसपर आगे बढ़ते हुए समय के साथ चलना (देश काल व परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालने की बात) और फिर नासमझ महबूबा; बस भाई बहुत है मगर आप ठहर नहीं रहे और गिरह में ये क्या कह दिया। आज तो मक्ते का शेर भी है। बिल्कुल सही कहा ‘ ख़फ़ा जो बार बार हो.......’ ।
    आज नियमित छात्र हैं तो एक मज़ेदार बात, एक मत्ला हुआ था:
    ईलाज ही अनार हो तो हो रहे तो हो रहे,
    अनार एक नार हो तो हो रहे तो हो रहे।
    लगा कि बड़ा दमदार मत्ला हुआ लेकिन फिर ध्यान गया कि ये तो ईता दोष की स्थिति पैदा करेगा। आप सबने नियमों का ध्यान रखते हुए इतनी खूबसूरत ग़ज़ल इस कठिन तरही में कही हैं कि दिल बल्ले बल्ले हो गया।
    सभी को बधाई।

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    1. अशआर आप को पसंद आए हैं यह मेरे लिए हार्दिक संतोष का विषय है

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    2. आ. राज जी , ग़ज़ल पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! आपको मोजिज़ा लफ़्ज़ पर लिखने की ज़ुरूरत क्या है आप तो खुद ही ग़ज़लों में बार बार मोजिज़ा करते रहते हैं !
      दीवाली की बहुत शुभकामनाएं !

      अर्श

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  15. मुशायरे में आज की ग़ज़लें उम्मीद के मुताबिक ही आला दर्ज़े की हैं।

    अर्श भाई की ग़ज़ल में कई रंग हैं,मगर इश्क का रंग सबसे गहरा है।गिरह भी उन्होंने इश्क में डूब कर लगाई है।तमाम अश'आर के लिए दिली दाद क़ुबूल करें।

    अंकित भाई की शायरी शिगुफ्तगी और सलाहीयत के एक ताज़ा झोंके की मानिंद है।मुझे उनके बेशतर अश'आर खूब पसंद आते हैं।और इस तरही की ग़ज़ल में भी उन्होंने बखूबी अपना कमाल दिखाया है।क्या अनूठी गिरह लगाई है भाई।वाह! वाह! इसके इलावा " हमारे हाथ चुन ही लेंगे...." और आखिरी तीनों शेर बेहतरीन हुए हैं।सैंकड़ों दाद!

    राजीव भरोल जी ने अपने ख़ास अंदाज़ में शेर कहे हैं और उनका 'पांच का पंच' असरदार है।गिरह भी बहुत अच्छी लगी है।बधाई स्वीकार करें।

    और आखिर में वीनस भाई! इन दिनों वे मेरे प्रिये शायरों में से एक हैं।अपने बेबाक लहजे और कलाम की पुख्तगी से उनकी ग़ज़लें तेजी से अपनी जगह बना रही हैं।यहाँ भी इस ग़ज़ल में युग प्रवृतियों पर उनकी करारी चोट लाजवाब है।क्या मौजूं मतला है और पूरी रवानी के साथ।वाह वाह!बाकी के सभी शेर अच्छे हुए हैं लेकिन मेरे लिए तो हासिले-ग़ज़ल यही शेर है:"यकीन कर के उस पे,ले रहा हूँ सारे फैसले/सनक में यह शुमार हो,तो हो रहे,तो हो रहे".वाह!वाह!वाह!

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    1. आपकी ज़र्रा नवाजी के लिए तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ

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    2. ग़ज़ल पसंद करने के लिए बहुत शुक्रिया सौरभ ! दीवाली की तमाम शुभकामनाएं भाई !

      अर्श

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  16. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    त्यौहारों की शृंखला में धनतेरस, दीपावली, गोवर्धनपूजा और भाईदूज का हार्दिक शुभकामनाएँ!

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    1. प्रस्तुति पसंद करने के लिए बहुत शुक्रिया मयंक साब !
      आपको भी तमाम शुभकामनाएं !

      अर्श

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  17. इस अंकितबा से कमबख़्त मुहब्बत ही इतनी है कि उसकी कोई भी तारीफ़ अपनी-सी लगती है ...जैसे कोई मेरी तारीफ़ कर रहा हो...वर्ना उसकी इस तरही पे गुरूदेव आपाका गले लगाना और तमाम टिप्पणियों में अंकित अंकित अंकित का शोर मुझे जला के राख़ कर देने के क़रीब था....

    जीयो मेरे छोटकु... तुझसे था कोई रिश्ता पहले का भी| तारीफ़ तुम्हारी हो रही है, सीना मेरा चौड़ा हो रहा है.... गुरूरदेव ने शुरूआती मुशायरे की तरह हासिले-मुशायरा शेर वाली प्रथा खत्म कर दी है, वर्ना तुम्हारी ये ग़ज़ल शर्तिया इस मुशायरे को नया आयाम दे रही है| i am feeling so proud that you call me bhaiyya ! cant wait to see you at Dewas station....lets blast on Diwali !

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    1. इस तरही को लिखने में ही गश पड़ रहे थे, शेर तो तब बनने शुरू हुए जब मैं मुंबई से इंदौर की तरफ निकला और उस १० घंटे के सफ़र में ही तकरीबन सब शेर बन गए. कहीं न कहीं दिल में ये था जब आप से मिलूँगा तो क्या नया सुनाऊंगा. वैसे ये ग़ज़ल कंचन दी को समर्पित कर दी है, पहली वेटिंग लिस्ट में आप ही हैं. :)

      अगर इस पे भी जल नहीं रहे हो तो ये सुनो, सुबह ही मुझे गुरुदेव का मेसेज आया "I am proud of you"
      और फिर शार्दूला दी का प्यार और दुलार से भरा स्पेशल ई-मेल भी ................... हा हा हा. और फिर यहाँ यहाँ पे सब लोगों का उमड़ता प्यार और स्नेहाशीष.
      भैय्या, अब तो जलना बनता है.
      Big-B i'll catch you at Dewas. I am privileged to be your younger brother.

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    2. हिंदी फिल्मो की तरह दोनो भाइयों का प्यार देख कर अभिभूत हूँ.....! सच अंकित तुम पर बार बार लाड़ आ रहा है। गुरू जी का वो मेल जो तुम्हे मिला, वही उनकी असली प्रशंसा होती है। वो मेल शायद गौतम भईया को भी मिला है और वो मेल मुझे नही मिला। लेकिन मुझे पता था कि ये मेल मुझे नही मिलेगा और सच शायद अपनत्व इसी को कहते हैं कि तुम्हे गुरू जी ने या गौतम भईया ने जब जब proud of you कहा तब तब शायद मेरे ही मन की अनुगूँज थी।

      PROUD OF YOU AND LOVE YOU

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  18. कोई निगाह एक दिन चुरा ही लेगी दिल तेरा

    ....ये मिसरा मुझे दे दे ठाकुर !

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    1. गब्बर,
      "जो मेरा है वो तेरा है, जो तेरा है वो मेरा है."

      :)

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  19. ग़ज़ल भेजने की आख़िरी तारिख़ को जब अंकित से उसका मतला सुना और एक दो शे'र तो उसे कहा अब रहने दो , वो इसलिए की मैं कहीं उससे प्रभावित ना हो जाऊं लिखने के दौरान !
    बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है अंकित ! बहुत बधाई भाई , गुरु देव ने जिस तरह से पीठ ठोकी है वो दस्तखत है तुम्हारी मेहनत की !
    राजीव जी मेरे प्रिय शायरों में शुमार हैं ! और उनसे कुछ और शे'र सुनना चाहता था इस रदीफ़-ओ-काफिये पर ! बहुत बधाई इन्हें भी !
    वीनस को इधर बहुत दिनों के बाद सुन रहा हूँ ! मगर क्या ख़ूब कहा इसने ! मुझे वीनस ने जो गिरह लगाईं है वो भी बहुत पसंद आई ! बहुत बधाई भाई !
    महज़ घंटे भर में लिखी ग़ज़ल को इस आला दर्ज़े की तरही में शामिल किया गया मैं इसी में बहुत खुश हूँ ! कुछ गलतियों के लिए खुद को क़सुवार मानता हूँ !
    सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं दीवाली पर !

    अर्श

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  20. आज का मुशायरा तो लुट चुका है

    और इस बात की ताकीद सभी ने एक स्वर में कर भी दी है मैं भी सुर में सुर मिलाते हुए शायर अंकित सफ़र को तहे दिल से मुबारक बाद पेश करता हूँ

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  21. ग़ज़ल जिस दवाब में कही है वह आज तक कभी नहीं रहा था

    ग़ज़ल लिखने का मूड ही नहीं बन सका और मैंने ५ दिन में ५ शेर कहे
    और अंतिम ४ शेर आधे घंटे में कह कर अशआर की संख्या ९ तक पहुँची और वो आधा घंटा वह समय था जिसके बाद गुरुदेव की दी गयी डेड लाइन पार हो जानी थी

    खैर शेर आप सभी को पसंद आ रहे हैं यह मेरे लिए हार्दिक संतोष का विषय है
    यह मलाल जरूर है की कुछ समय और दे पाता तो अच्छे शेर कह लेता ...
    वैसे यह मलाल तो हमेशा रहता है :))))

    आप सभी को हार्दिक धन्यवाद

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  22. एक बार झलक देख गई थी इस मेहफिल की, मगर भागदौड़ ऐसी थी कि कुछ कहना मुश्किल था।

    अनुजों ने खूब समा बाँधा है।

    अर्श शब्दों का दीवाना है। कई बार ऐसा हुआ है, जब कोई शब्द इसे बिना अर्थ पता होने के भी हॉंट करते हैं और ये उसका भाव जाने बिना निश्चय लर चुका होता है उसका प्रयोग अपनी बन रही ग़ज़ल के नये शेर में करने का।

    इसका यह गुण मुझे आश्चर्यचकित भी करता है। इस प्रकार अर्श की गज़ल अर्श के अनुरूप ही है।

    मुझे चिराग ए इश्क़ ने तो बख्श दी है रोशनी,
    घना जो अंधकार हो तो हो रहे, तो हो रहे।

    बढ़िया शेर।

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  23. राजीव जी मतला ही बेहतरीन

    हमारे सिर पे भार हो तो हो रहे, तो हो रहे,
    तुम्हे किसी से प्यार हो तो हो रहे तो हो रहे।

    क्या बात है। साधारण सी बात मगर कितनी असरदार..

    वो झूठ बोलता है जानते हैं सब मगर तुम्हें,
    उसी पे आते ऐतबार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

    आज गौतम भईया किसी मुद्दे पर भावुक थे, ये शेर बिलकुल उसी सिचुएशन पर लग रहा है। बहुत खूब।

    बधाई राजीव जी बहुत बधाई।

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  24. अंकित ! बच्चे... तुम्हारी ग़ज़ल पर तो वैसे ही क़ुर्बान हूँ। जब सुना था तभी टनों दाद दे चुकी हूँ।

    कोई निगाह एक दिन चुरा ही लेगी दिल तेरा,
    तू लाख होशियार हो तो हो रहे, तो हो रहे
    हम्म्म्... तुम्हारी ही कथा, व्यथा तो नही है बालक...?? लाख होशियारी के बावज़ूद फँस गये क्या.. ?? :) :)

    सुभाव जिम्मेदार हो....

    क्या मिसरा है, वाह वाह वाह वाह वाह....!!!

    ऐ रोशनी ना दख्ल दे तू रात के मिजाज पे

    उहूँऽऽऽ एटीट्यूड...

    सवालों से परे रहेगी...

    इस शेर पर तो खूब मुस्कुरा ही चुकी हूँ, तुम तो जानते ही हो।

    ये रूह अपनी नीम अक्स रूह है तलाशती।

    ये तुम्हारे की नोट से अलग शेर है, असल में ऐसा शेर होता है जिसे चौंकाने वाला शेर कहा जाता है। जिसे पढ़ कर लगे कि अरे ! ये शेर अंकित ने लिखा है क्या ?? बढ़िया शेर अंकित !

    मेरी दमक ही तय करेगी, मेरे दाम को यहाँ

    किसके ??? कंचन के ??? हा हा हा हा

    गज़ल तो ऐसी कही है कि मन हो रहा है कुछ न्यौछावर कर दूँ पर, मगर क्या, अपने आशीष के सिवाय...!!

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    1. कंचन दी, क्या कहा जाए, क्या न कहा जाए. आपका आशीर्वाद और प्यार यूँ ही बना रहे बस.

      मैंने तो गिरह का शेर पहले कुछ और लिखा था, वो तो जब आपने सुना और कहा कुछ अलग और नया लिखो तब ये शेर निकल कर आया. ये ग़ज़ल आप को समर्पित है.

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    2. जिंदगी को जब गौर से देखती हूँ, तो पाती हूँ कि उसने कुछ खास नही दिया सिवाय इसके कि कुछ खास लोगों का प्यार बिना शर्त और शिकवा के मिलता रहा है। तुम्हारी ये टिप्पणी भी उसी खासियत का बयान है अंकित.....!!

      बहुत स्नेह, बहुत आशीष, बहुत शुभकामना।

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  25. वीनस ! मतला वो है, जो मैं लिखना चाह रही थी। कुछ ऐसे ही भाव चल रहे हैं मेरे भी अंदर

    सुखन जो रोजगार हो, तो हो रहे, तो हो रहे,
    अदब जो दरकिनार हो, तो हो रहे, तो हो रहे।

    सनक में ये शुमार हो....

    :) :) :) मुस्कुरा रही हूँ कि ये शेर किसकी याद दिला रहा है ?? शायद उसे सोच कर ही मुस्कुरा रही हूँ।

    बढ़िया ग़ज़ल....!! दीपावली शुभ हो।

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    1. शुक्रिया ...

      मैं समझ नहीं सका की आपको शेर पढ़ कर किसकी याद आई ... बताईये तो मैं भी मुस्कुरा लूं ...

      आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

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  26. गज़लें चारों के एक से बढ़ कर एक. किसी एक को चुनना मेरे लिये संभव नहीं था परन्तु पंकजजी के इशारे में उलझ कर रह गया हूँ. चार उस्तादी गज़लें प्रस्तुत करने के बाद उनका फ़ुटनोट "आज के तीनों शायरों ने रंग जमा दिया है " पढ़ कर असमंजस में हूँ कि वे किस एक शायर को बाकी से अलग रख रहे हैं ? बहरहाल मेरे हिसाब से सभी अद्भुत गज़ल कहने में कामयाब हैं. सभी को बधाई

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    1. राकेश जी पहले हर अंक में तीन तीन ही ग़ज़लें थीं । उस हिसाब से ही सबके फुटनोट आदि तैयार किये हुए थे । किन्‍तु जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में लोगों को ट्रेन छूटने के टाइम पर ही स्‍टेशन आने की आदत है सो कुछ ग़ज़लें बाद में आईं उनको एडजेस्‍ट करने के चक्‍कर में तीन से चार चार हुईं । किन्‍तु फुटनोट बदलने से छूट गया ।

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  27. तीन कमाल के शायरों के साथ ग़ज़ल का शाया होना एक अलग ही मज़ा देता है और अच्छे शेर कहने को हौसला भी देता है. जहाँ पे इस तरह के बेहतरीन शेर कहे जाएँ
    मुझे अजीज़ है मेरा ये ख़ुद से इंक़लाब भी
    जो ग़म भी शानदार हो तो हो रहे तो हो रहे
    वाह वाह

    मुझे चराग़-ए-इश्क़ ने तो बख्श दी है रौशनी
    घना जो अन्धकार हो तो हो रहे तो हो रहे
    उम्दा गिरह

    वो झूठ बोलता है जानते हैं सब मगर तुम्हें.
    उसी पे ऐतबार हो तो हो रहे तो हो रहे.
    जिंदाबाद शेर.

    सफर में जुगनुओं को साथ ले, निकल पड़े हैं हम,
    "घना जो अन्धकार हो, तो हो रहे तो हो रहे".
    कमाल की गिरह. वाह वाह

    सुखन जो रोज़गार हो, तो हो रहे, तो हो रहे
    अदब जो दरकिनार हो, तो हो रहे, तो हो रहे
    मतला क्या खूब गढ़ा है. वाह वा

    यकीन करके उसपे ले, रहा हूँ सारे फैसले
    सनक में यह शुमार हो तो हो रहे, तो हो रहे
    वाह वाह वाह

    ---------------------------------------------------

    मेरी ग़ज़ल को आप सब ने सराहा और पसंद किया और शुक्रगुजार हूँ, और आप सभी से मिले इस बेइन्तहां प्यार के बारे में क्या कहूं. आपका आशीर्वाद और प्यार हमेशा कुछ नया लिखने की प्रेरणा देता है. आगे भी यही कोशिश रहेगी कि आप सब की उम्मीदों पर खरा उतरूँ.

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    1. अशआर की पसंदगी के लिए आभारी हूँ

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  28. प्रकाश पर्व पर प्रकाश अर्श हैं चमक रहे
    घना जो अंधकार हो तो हो रहे तो हो रहे

    प्रकाश जी इस शानदार ग़ज़ल के लिए दाद कुबूल कीजिए

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  29. अंकित जी ने हाल ही में सुनी एक बात को सच साबित कर दिया है कि तरही में बड़े शायर इस डर से भाग नहीं लेते कि पता नहीं कब कोई नौजवान शायर मुशायरा लूट ले जाय। अंकित जी ने वाकई मुशायरा लूट लिया है। क्या गजब के शे’र कहे हैं।

    दिली दाद कुबूल कीजिए अंकित जी

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  30. राजीव जी की गिरह लाजवाब है। बहुत बहुत बधाई राजीव को इस जानदार ग़ज़ल के लिए

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  31. वीनस जी ने एक अच्छी ग़ज़ल कही है। मतले के लिए बारंबार बधाई दूँगा क्योंकि मुझे तो मतला कहना पहाड़ पर चढ़ने जैसा लग रहा था। वीनस जी ने इतनी आसानी से इतना शानदार मतला कह दिया इसके लिए दिली दाद देता हूँ।

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    1. ग़ज़ल और मतला पसंद करने के लिए विशेष आभार ...

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  32. वाह!
    गज़ब के अल्फ़ाज़ हैं, और अंदाज़ निराले,
    बह्ती रहें गज़लें होते रहें उजाले!

    सब सायरों और उनके कलाम को सलाम!
    दीपोत्सव की बधाई!

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  33. माफ़ करें! टंकण त्रुटि की क्षमा प्रार्थना!

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