सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

दीप ख़ुशियों के जल उठे हर सू, लो फिर आ गई है दीपावली और दीपावली के साथ ही आ गया है दीपावली विशेष तरही मुशायरा, आइये आज से करते हैं शुभारंभ ।

समय बीतता है और एक के बाद एक माह, वर्ष बीतते जाते हैं । वस्‍तुत: तो समय नहीं बीतता, हम ही बीतते हैं । हमारे हिस्‍से में जो समय आया है वो बीतता जाता है । जीवन की आपाधापी में बस यूं ही हम बीतते जाते हैं, बीतते जाते हैं और एक दिन अचानक रीत जाते हैं । रीत जाते हैं अपने पीछे कुछ निशान छोड़ कर जिन्‍हें धीरे धीरे मिटा दिया जाता है । तो कुल मिलाकर बात ये कि हमारे पास बस यही समय है । यही जिसे हम जी रहे हैं । और यही तो हमारा अपना है । इसी आपाधापी के बीच में आते हैं त्‍यौहार, पर्व, उत्‍सव जिनमें हम भूल जाते हैं सब कुछ । भूल जाते हैं ये कि कल क्‍या हुआ और भूल जाते हैं ये भी कि आने वाले कल में क्‍या होने वाला है । बस और केवल बस उसी त्‍यौहार के आज में जीते हैं । हमें पता है कि त्‍यौहारों के बीतते ही फिर वही जीवन होगा और वही भागदौड़ होगी । तो हमारे हिस्‍से का एक और त्‍यौहार दहलीज़ पर खड़ा है । आइये सब कुछ भूल कर उस त्‍यौहार का स्‍वागत करें उसका अभिनंदन करें ।

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श्री गणेशाय नम:, मंगलमय हो दीपावली पर्व ( हमारे यहां इस तस्‍वीर को पूजा का पाना कहते हैं, ये दीपावली पूजा में आवश्‍यक है । )

deepavali_lampdeepavali_lamp दीप ख़ुशियों के जल उठे हर सू deepavali_lampdeepavali_lamp

इस बार हम बहरे ख़फ़ीफ पर दीपावाली का ये मुशायरा आयोजित कर रहे हैं । बहरे ख़फ़ीफ़ बहुत ही लोकप्रिय बहर है जिस पर काफी लिखा जाता है । इस बार भी काफी उत्‍साह के साथ लोगों ने अपनी ग़ज़लें भेजीं हैं । और उन्‍हीं ग़ज़लों के साथ हम दीपावली का ये मुशायरा दीपावली पर्व तक लेकर जाएंगें । तो आइये भगवान श्री गणेश का नाम लेकर बिस्मिल्‍लाह करते हैं तरही मुशायरे का ।

दीपावली के इस तरही मुशायरे में सबसे पहले हम शुरूआत करते हैं दो ऐसे शायरों के साथ जो कि कि हमारे इस मुशायरे में पहली बार ही आ रहे हैं । दोनों की ग़ज़लें बता रहीं हैं कि भले ही हमारे मुशायरे में पहली बार आ रहे हैं लेकिन दोनों ही स्‍थापित ग़ज़लकार हैं । तो आइये सुनते हैं दो ग़ज़लें ।

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सौरभ शेखर

दीपावली के तरही मुशायरे के लिए आपके मिसरे पर मैंने भी ग़ज़ल कहने की कोशिश की है.त्रुटियाँ अवश्य हो सकती हैं. उसके लिए क्षमा करेंगे.

दीप खुशियों के जल उठे हर सू

जैसे तारे उतर पड़े हर सू

बदगुमाँ हो चुके अमावास के

होश यूँ फाख्ता हुए हर सू

रौशनी ने मुए अँधेरे को

नाको चबवा दिए चने हर सू

कुछ बियाबाँ अभी भी वीरां हैं

यूँ तो रौनक बहुत लगे हर सू

पर्व है रौशनी का तो चौपड़

किस लिए इस कदर बिछे हर सू

तीरगी मन की जो मिटा पाए

काश ऐसा दिया जले हर सू

वाह वाह वाह क्‍या आग़ाज़ हुआ है मुशायरे का । जानदार ग़ज़ल, जानदार शे'र । और विशेष कर मतले का तो जवाब ही नहीं जानदार है । इस बार जो रदीफ है वो मतले में निभाना बहुत कठिन है । मगर सौरभ जी ने कुशलता के साथ निभा लिया है । बधाई बधाई ।

आइये अब सुनते हैं आज के दूसरे शायर को । अश्विनी जी भी हमारे इस मुशायरे में पहली बार आ रहे हैं तो जोरदार तालियों के साथ स्‍वागत किया जाये इनका ।

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   अश्विनी रमेश

मैं इस ब्लॉग का नया सदस्य बना हूँ ।  दिवाली के उपलक्ष्य में मुशायरे हेतु मेरी रचना (गजल) प्रस्‍तुत है  । आशा है आपको पसंद आएगी ।

दीप खुशियों के जल उठे हर सू

फूलझड़ियों के गुल खिले हर सू

राम आये हैं आज किस्मत से

लोग हैं झूमते दिखे हर सू

रात जगमग हुई उजाले से

सबके चेहरे चमक रहे हर सू

आज मदहोश हर बशर है यहाँ

लोग यूं रस में हैं रमे हर सू

आज उठती खुशी की लहरें हैं

आज सब नाचते मिले हर सू  !!

वाह वाह वाह अच्‍छी ग़ज़ल कही है अश्विनी जी आपने । राम के आने को दीपावली के त्‍यौहार के साथ बहुत ही सुंदर तरीके से बांधा है आपने । निश्चित रूप से बहर तो नहीं लेकिन रदीफ का निर्वाह कुछ कठिन है इस बार जिसे आपने निभा लिया है । अच्‍छी ग़ज़ल के लिये बधाई बधाई ।

तो आनंद लीजिये इन दोनों ग़ज़लों का । दाद दीजिये । और आज ही दीजिये क्‍योंकि कल हम तीन अन्‍य शायरों को सुनेंगे दीवाली मुशायरे में । और हां साथ में ब्‍लाग की साज सज्‍जा पर भी अपनी राय दीजिये । इस बार पृष्‍ठभूमि में भी साज सज्‍जा की गई है । सो सब पर राय दीजिये । आनंद लेते रहिये और दाद देते रहिये । बनने दीजिये पर्व का, त्‍यौहार का माहौल ।

सौरभ जी, अश्विनी जी हो सके तो टिप्‍पणी के रूप में अपना हल्‍का फुल्‍का परिचय दे दें ताकि बाकी लोग आपको जान भी सकें । क्‍योंकि आप पहली बार आये हैं ।  

                             deepavali_lamp

43 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर! दोनों रचनाओं व रचनाकारों का स्वागत है।

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  2. वाह. जगमग ब्लॉग को देख कर दिल खुश हो गया. एकदम दीपावली का माहौल है.
    सौरभ जी ने मतला खूब बाँधा है. बहुत बढ़िया शेर कहे हैं. "कुछ बियाबां अभी भी वीरां हैं.." और "तीरगी मन की जो मिटा पाए." तो बहुत ही बढ़िया लगे.
    अश्विनी जी की गज़ल भी बहुत खूबसूरत है. ये शेर : "राम आये हैं आज किस्मत से.." और "रात जगमग हुई उजाले से.." खास तौर पर पसंद आये.

    सौरभ जी को और अश्विनी जी को खूबसूरत ग़ज़लों के लिए तहे दिल से बधाई. आशा है आने वाले मुशायरों में भी आपकी ग़ज़लें पढ़ने को मिलेंगीं.

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  3. उल्लास ही उल्लास छा गया !
    कितना सुन्दर दमक रहा है मंच, घर का आँगन जैसा.
    सौरभ शेखर जी ने क्या ख़ूबसूरत समां बाँधा है... हर एक शेर में शेरियत है.
    अश्विनी रमेश जी ने भी शानदार आगाज़ किया है. सौरभ जी/अश्विनी जी,
    आप को बहुत बहुत बधाई.

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  4. दोनों ही नये शायरों का बहुत बहुत स्वागत है तरही मुशायरे में!
    सौरभ जी का ये मिसरा कि रौशनी ने मुए अन्धेरे को.. वाह क्या मिसर है! बेहद नाज़ुक ! और शे'र तीरगी मन की जो मिटा पाए... बहुत अच्छे शे'र कहे हैं सौरभ जी ने !

    अश्विन जी का भी बहुत स्वागत है... राम आये हैं आज किस्मत से ... वाह क्या शे'र है.. और शे'र रात जगमग हुई उजाले से.. ये शे'र भी कम नहीं!
    दोनों ही नये शायर का फिर से बहुत जोरदार तरिके से स्वागत किया जाता है! इनके बारे मे कुछ और जानकारियाँ मिलती तो और बेहतर होता !
    ब्लोग की सजावट तो माहौल के मुताबिक है! मन जैसे दीपावली के लिये तैयार हो रहा है! और आपने सही कहा है समय नहीं बीतता हम बीतते हैं! तरही के आग़ाज़ ने दीपावली को जैसे रोज़ मनाने का मौका दिया है, हर रोज़ नई ग़ज़लों को पढकर...

    अर्श

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  5. सुबीर भैया, हर पर्व पे आपके ब्लॉग की छटा इतनी सुन्दर होती है कि लगता ही नहीं कि हम भारत से दूर हैं. इस बार भी एकदम ज्योतिर्मय है आपका ब्लॉग. सो हृदय से बधाई!
    शुरुआत की बातें आज थोड़ी दार्शनिक हैं, सो अच्छा लगा पढ़ के.
    सौरभजी का चौपड़ वाला शेर (जो कि मुझे लगा कि खेल से बाहर जीवन में बिछी बिसातों की बात कर रहा है) और तीरगी वाला मक्ता अच्छा लगा. वैसे उनकी पूरी ग़ज़ल ही भली है.
    अश्विनी जी का रामजी वाला शेर सुन्दर है.
    आप सब को शुभकामनाएं और बधाई!

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  6. दोनों ग़ज़लकारों की गज़लियात बेहतरीन ,उम्दा और बा कमाल सौरभ जी का मतला और रमेश जी का मक्ता ख़ूबसूरत बने हैं।

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  7. दीपावली तरही का आग़ाज़ शानदार है.
    सौरभ शेखर जी ने बहुत खूब मतला कहा है, क्या बेहतरीन गिरह बाँधी है, मिसरा-ए-सानी "जैसे तारे उतर उतर पड़े हर सूँ", लाजवाब बना है.
    "कुछ बियाबां....." अच्छा शेर बना है. पहली बार आये हैं और बहुत खूब रंग जमाया है.

    अश्विनी जी, इस शेर के बारे में क्या कहूं.
    "राम आये हैं आज किस्मत से ..........", वाह वा. बहुत सुन्दर शेर बुना है.

    दोनों ही शायरों ने दीपावली तरही को बेहतरीन आग़ाज़ दिया है और आशा है कि वो आगे भी अपनी ग़ज़लों और शेरों से रूबरू करवाते रहेंगे.

    गुरुदेव, क्या खूब साज-सज्जा की है. पूरा ब्लॉग खुशबुओं से महक रहा है, हर किनारा जगमगा रहा है. शायरों की ग़ज़लें, ब्लॉग की खूबसूरती के साथ अलग ही रंग जमा रही है. इस ब्लॉग की बला की खूबसूरती में आपकी घंटों की मेहनत होगी. हर बार तरही के साथ जुड़ें पर्वों को आप जिस खूबी से ब्लॉग में घुला-मिला देते हैं, वो अपने में एक अलग आनंद देता है.

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  8. ब्लॉग की छटा देखते ही बन रही है.मुशायरे में आपने मेरी ग़ज़ल को स्थान दिया इसके लिए मैं

    किन शब्दों में आपका शुक्रिया अदा करूँ.सभी मित्रों का पसंदगी के लिए आभार.आने वाली फुलझड़ियों,पटाखों,बमों का हम सब इंतज़ार कर रहे हैं.

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  9. गुरुदेव मैं तो सच कहूँ दिवाली से पहले ही दिवाली का अनुभव करा देने वाली ब्लॉग की इस अद्भुत साज़ सज्जा को देख कर चकित हूँ...कोना कोना जगमगा रहा है...वाह...उस पर ये दोनो बेहद खूबसूरत ग़ज़लें इसकी सुन्दरता पर मानों चार चाँद लगा रही हैं.

    सौरभ को मैं उनके अशआरों की वजह से जानता हूँ...उनका ब्लॉग पढता रहता हूँ...वो बेहतरीन अशार कहते हैं...उन्होंने अपने हुनर का जलवा यहाँ क्या खूब बिखेरा है..."रौशनी ने मुए अँधेरे को"...में "मुए" लफ्ज़ ने कायल कर दिया ...मेरी बड़ी ख्वाइश थी कहीं अपनी किसी ग़ज़ल में "मुए" लफ्ज़ को लेकर आऊं लेकिन अभी तक कामयाब नहीं हो पाया था, सौरभ ने ने इसे जिस तरह इस्तेमाल किया है उस के लिए उसकी जितनी तारीफ़ की जाये कम है... "कुछ बियाबाँ..." "तीरगी मन की जो.." जैसे शेर बतलाते हैं के सौरभ किस पाए के शायर हैं...मेरी दिली दाद उनकी इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए...काफियों और रदीफ़ का ऐसा निर्वाह दुर्लभ है...

    रमेश जी को पहली बार पढने का मौका मिला है उन्होंने बहुत अच्छे शेर कहें हैं खास तौर पर राम के आने वाला शेर कमाल का है. उन्हें मेरी ढेर सी बधाई.

    जिस तरही मुशायरे की शुरुआत इतनी जगमगाती हुई है वो आगे चल कर किस कदर रौशनी फैलाएगा ये बात सोच कर ही रोमांच हो रहा है...इसकी कामयाबी के लिए...जो तय है...अग्रिम बधाई.

    नीरज

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  10. lekin Guru JI mujhe to adhe me photos aur adhe me post dikh rahi hai, isliye mai to post padh hi nahi paa rahi hun...


    sabne comment kaise kar diya :( :(

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  11. कंचन इस ब्‍लाग को ठीक से देखने के लिये 1360 गुणित 768 का स्‍क्रीन रेजोल्‍यूशन आवश्‍यक है । अपने स्‍क्रीन का साइज ये कर लो । हां यदि तुम पुराने टाइप के सीआरटी मानीटर पर देख रही हो तो वहां इसे देखने में समस्‍या आयेगी । लैपटाप का स्‍क्रीन रेजो बढ़ा कर इसे ठीक से देख सकती हो ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. परिचय की बात रह गई थी.मैं एक सरकारी मुलाजिम हूँ,दिल्ली में नौकरी करता हूँ,उत्तर प्रदेश में रहता हूँ और मूल रूप से बिहार का हूँ.ग़ज़ल कहना सीखने की कोशिश कर रहा हूँ.नीरज जी ने अक्सर उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन किया है.उनका तो ऋणी हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  13. अश्विन सौरभ पर लगी, मित्र आपकी तान

    भाव-रंग हिल-मिल करें, शब्दों का सम्मान !!

    छटा अति सुन्दर.. रंग निराले !!

    --सौरभ पाण्डेय, नैनी, इलाहाबाद (उप्र)

    उत्तर देंहटाएं
  14. उफ़्फ़, ब्लौग की ये छटा तो ...हाय रेssssss , कुछ कमजोर ग्राफिक्स वाले लैपटॉप और कंप्यूटर कराह रहे होंगे | हा ! हा !!

    एक और तरही का शुभारंभ.... दोनों शायरों ने इतनी मुश्किल रदीफ़ को जितनी सहजता से निभाया है, उसके लिए तालियाँ|

    सौरभ जी का "कुछ बियाबाँ अभी भी वीरा हैं" वाला और शेर और आखिरी शेर की ख़्वाहिश वाला अंदाज़ बहुत पसंद आया|

    अश्विनी जी के अशआर भी अच्छे बन पड़े हैं| बधाई....

    हल्का फुल्का परीचा दोनों शायरों द्वारा यहीं टिप्पणी में दे दिया जाय तो बढ़िया रहेगा हम सब के लिए ....

    उत्तर देंहटाएं
  15. दोनों ही शायरों ने अच्छे अश’आर कहे हैं। मुशायरे का आगाज़ बहुत ही शानदार है। साज सज्जा का क्या कहना मैं तो पूरा आनंद ले रहा हूँ। पहली ही पोस्ट इतनी शानदार है कि यकीन नहीं आ रहा है।

    उत्तर देंहटाएं
  16. Musaayare kee shuruaat hee itanee khoobsoorat hui hai.dono shaayron kee ghazalen bahut achchee lageen.
    Dono shaayaron ko hardik badhaaee.
    Ashvani Ramesh ji ke saath maine Zilaa Shimla ke Thiyog men ek kavee sammelan men 17 varSh pahale bhaag liyaa thaa. Himachal vaasiyon ke liye ye nayaa naam naheen hain.Ve apanee kavitaao ke liye khoob jaane jaate hain.
    Yahaan shaayar ke roop men unhe mil kar sukhad aashcharya huaa.
    badhaaee.
    Dwij

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  17. Musaayare kee shuruaat hee itanee khoobsoorat hui hai.dono shaayron kee ghazalen bahut achchee lageen.
    Dono shaayaron ko hardik badhaaee.
    Ashvani Ramesh ji ke saath maine Zilaa Shimla ke Thiyog men ek kavee sammelan men 17 varSh pahale bhaag liyaa thaa. Himachal vaasiyon ke liye ye nayaa naam naheen hain.Ve apanee kavitaao ke liye khoob jaane jaate hain.
    Yahaan shaayar ke roop men unhe mil kar sukhad aashcharya huaa.
    badhaaee.
    Dwij

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  18. गुरुदेव प्रणाम,
    सुबह मेलबाक्स पर मेल मिलते ही दिल खुश हो गया कि तरही मुशायरे का श्री गणेश हो गया है
    और ब्लॉग खोलते ही लाजवाब हो गया
    वाह वा
    हमेशा कि तरह पर्व विशेष पर ब्लॉग सुसज्जित होगा यह तो पता था मगर अनुमान लगा पाना असंभव होता है
    इस बार तो खास बात यह भी है कि ब्लॉग के हर कोने पर विशेष मेहनत की गई है और पृष्ठ भूमि पर तो पहली बार काम किया गया है

    इस मनमोहक साज सज्जा के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  19. दीयों के बीच आज तो अनार ही अनार फूट रहे हैं ... ब्लॉग की सज्जा देख कर लग रहा है काश ये सब हम दुबई में भी कर पाते ...
    स्वागत है सौरभ जी और अश्वनी जी का ... परिवार बड़ा हो रहा है इस बात की बहुत खुशी हो रही है ..
    बहुत ही लाजवाब शेर बांधे हैं सौरभ जी ने ... रौशनी ने मुए अँधेरे को ... क्या गज़ब का शेर है .. और अश्विनी जी ने तो दिवाली का आगाज राम के स्वागत से किया है जो बहुत ही लाजवाब है ...
    इस मुशायरे का आगाज़ धमाकेदार हुवा है ...

    उत्तर देंहटाएं
  20. सौरभ शेखर जी
    तरही मुशायरा में आपका हार्दिक स्वागत अभिनन्दन है

    दीप खुशियों के जल उठे हर सू
    जैसे तारे उतर पड़े हर सू ......... सर सू रदीफ को जिस खूबसूरती से निभाया गया है वो काबिले तारीफ़ है

    बदगुमाँ हो चुके अमावास के
    होश यूँ फाख्ता हुए हर सू .........क्या कहने

    रौशनी ने मुए अँधेरे को
    नाको चबवा दिए चने हर सू ....... सारा सौंदर्य "मुए" शब्द से निकल रहा है, वाह वा

    कुछ बियाबाँ अभी भी वीरां हैं
    यूँ तो रौनक बहुत लगे हर सू ..... प्यारा शेर

    पर्व है रौशनी का तो चौपड़
    किस लिए इस कदर बिछे हर सू .... खुशियों के पर्व के साथ जो बुराइयां जुडी हुई हैं उन पर करारा प्रहार किया है

    तीरगी मन की जो मिटा पाए
    काश ऐसा दिया जले हर सू .......सुन्दर सोच के साथ साथ बहुत रवानगी लिए हुए बढ़िया शेर है


    सुन्दर ग़ज़ल से मुशायरे का आगाज़ हुआ है सौरभ शेखर जी आपको बहुत बहुत बधाई हो

    उत्तर देंहटाएं
  21. अश्विनी रमेश जी,

    हार्दिक स्वागत, आपको पहले भी पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ है, तरही मुशयारे में आपको देख कर बहुत अच्छा लगा |
    पूरी ग़ज़ल शानदार बनी है
    यह दो शेर खास पसंद आये


    राम आये हैं आज किस्मत से
    लोग हैं झूमते दिखे हर सू

    आज मदहोश हर बशर है यहाँ
    लोग यूं रस में हैं रमे हर सू

    हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  22. रोशनी ही रोशनी ही है आज इस महफ़िल में यूँ
    जल उठे हैं दीप जैसे .... आ गयी दीपावली

    Bahut sundar aur roshnee se saraabor rachnaayen. Rachnaakron ko badhaai.

    उत्तर देंहटाएं
  23. दोनों ने ही मुशायरा लूट लिया वाह वाह क्या बात है

    उत्तर देंहटाएं
  24. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच की जी रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    उत्तर देंहटाएं
  25. सर्वप्रथम सुबीर जी की सौम्यता,सुलझेपन और सेवाभाव के लिए आभार !
    सभी मित्रों---स्मार्ट इंडियन ,राजीव भरोल,सुलभ ,अर्श ,शार्दुला संजय दानी ,अंकित सफर ,सौरभ ,नीरजगोस्वामी ,सौरभ पांडे ,गौतम राजरिशी, धर्मेन्द्र कुमार ,द्विजेंद्र द्विज ,वीनस केशरी ,दिगंबर नासवा ,अमृता तन्मय शेशधर तिवारी--आप सब ने जो भावनात्मक और उत्साहवर्धक उद्गार अभिव्यक्त किए हैं ,उनके लिए आप सब का बेहद आभार !
    द्विजेंद्र द्विज जी ने मेरा संक्षिप्त परिचय दे दिया है, इसके लिए इनका विशेष आभार !रोजगार की दृष्टि से कहूँ तो मैं हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा केडर का अधिकारी हूँ !---अश्विनी रमेश !

    उत्तर देंहटाएं
  26. सुनील जी की टिप्पणी बिल्कुल ताज़ा आयी है, उनका भी बेहद आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  27. सभी कुटुम्बियों को दीवाली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएँ

    सर जी दिवाली के पहले ही दिवाली का मूड बना दिया आपने तो| ब्लॉग की बेक ग्राउंड वाली इमेज धाँसू है| आप ब्लॉग की सज्जा को ले कर यदा कदा मेहनत करते ही रहते हैं| गरमी वाली तरही के दौरान आप ने जो डिफ़रेंट टाइप के टिपिकल पिक्स लगाए थे, उन से तरही की ग़ज़लें भी कभी कभी पीछे रह जाती दिखती थीं| बिना खुद लगे-खटे ऐसे काम नहीं हो सकते| काम के प्रति आप का यह ज़ुनून देख कर ही हम लोग भी हर बार कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित होते रहते हैं| मुझे लगता है इस बार की तरही में भी दिवाली के बेहतरीन पिक्स शेयर करेंगे आप हम लोगों के साथ|

    हो सकता है मेरी नज़र शायद पहली बार गयी हो, ब्लॉग एम्बेलेम में आप की तस्वीर जँच रही है सुबीर जी| इस आईडिया को मैं चुरा ले जा रहा हूँ|

    'दीप खुशियों के जल उठे हर सू' मिसरे के समकक्ष ही जलते दीयों को रखना काफी रुचिकर लगता है| साथ साथ एनिमेटेड ग्रीटिंग कार्ड्स ने खूबसूरती में चार चाँद लगाए हैं|

    धमाकेदार शुरुआत हुई है तरही की| तरही ग़ज़लों में 'गिरह' बांधने को ले कर काफी चर्चाएँ होती रही हैं पुराने ज़माने से| किस ने किस तरह बांधी है गिरह, हर खासोआम की जुबां का विषय रहता था / है| इस मायने में सौरभ जी ने क़माल दिखाया है| सुख-दुःख को साथ साथ बतियाती ग़ज़ल का चौपड़ वाला शेर, नीरज भाई की स्टाइल में बोले तो उफ़ युम्मा टाइप है|

    राम के अयोध्या लौटने और दीपावली पर्व के साम्य को आत्मसात करती अश्विनी भाई की ग़ज़ल भी काफी मनमोहक है| बहर और रद्दीफ़ का ज़िक्र आप ने खुद ही कर दिया है| रद्दीफ़ अच्छी तरह से निभाया गया है|

    दोनों साथियों का सहृदय स्वागत और बहुत बहुत बधाइयाँ, जोरदार तालियों के साथ|

    अब कल की पोस्ट का इंतज़ार है...............

    उत्तर देंहटाएं
  28. जैसा की साईट संचालक द्वारा कहा गया है--मैने अपना सक्षिप्त परिचय दे दिया है !यदि कोई सदस्य अधिक परिचय जानना चाहे तो वह मेरे ब्लॉग--ashwinirameshkundli.blogspot.com पर जान सकता है !

    उत्तर देंहटाएं
  29. यह भी दीवाली की तरह ही जगमगाये, शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  30. 17 से 21 तक मेरी टिप्‍पणी आखिरी ही रहेगा ऐसा लगता है। कोई बात नहीं।
    एक सुखद् संयोग देख रहा हूँ। दो अच्‍छे शायर तो पहली बार इस ब्‍लॉग की तरही में आये ही हैं, द्विज भाई को भी शायद पहली बार देख रहा हूँ यहॉं।
    प्रस्‍तुत ग़ज़लें निस्‍संदेह एक गरिमामय शुरुआत हैं, और उतनी ही गरिमामय साज-सज्‍जा।

    नीरज भाई ने बहुत सही बात कही कि मुए जैसे शब्‍द को ऐसी उत्‍सवी तरही में पिरोना कठिन कार्य है, हॉं उनकी इच्‍छा इस शब्‍द को प्रयोग करने की है तो दुआ है कि नीरज भाई को हमारे जैसा दोस्‍त मिले:
    दोस्‍त 'नीरज' तुझे मिले हम सा
    तू जिसे कह सके 'मुए' हर सू।

    उत्तर देंहटाएं
  31. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  32. नमस्ते जी ,
    आहा आ ही गयी अब तो दीपावली !
    सन २०११ के वर्ष में शुभ लाभ का सन्देश लेकर .
    आपके ब्लॉग पर जल रहे दीये,
    मन को भारत में हम मनाया करते थे
    उन दीपावली के दिन और रातों की ओर
    खींच कर ले गये .
    ....ईश्वर करें कि ,
    हम हिन्दी साहित्य जगत के सभी मित्रों के घर ,
    यह उत्सव सदा इसी पवित्रता के साथ मनाया जाता रहे
    जैसा आपने शुभारम्भ कर के आज , सिध्ध किया है .
    दोनों ग़ज़लकारों की बेहतरीन रचनाओं के लिए ,
    भाई श्री सौरभ जी व अश्विनी रमेश जी को
    बधाईयाँ व आप सब को
    दीपावली की हार्दिक बधाई !
    सादर, स स्नेह,
    - लावण्या

    उत्तर देंहटाएं
  33. जोरदार तालियों के साथ स्वागत है दोनों शायरों का। दोनों की गज़लें पसंद आईं। ब्लागसज्जा का तो कायल हो गया मैं, नमन गुरुदेव।

    उत्तर देंहटाएं
  34. बेहद ख़ूबसूरत ब्लॉग इस नए मुशायरे और नए कवियों ने समाँ बाँध दिया है ,,बहुत ख़ूब !!
    दोनों कवियों को बधाई और पंकज जी आप को भी

    उत्तर देंहटाएं
  35. ब्लाग की नई साज- सज्जा और मुशायरे के नए शायरों ने समाँ बाँध दिया | दीपावली का आरम्भ जानदार -शानदार हुआ | अश्विनी रमेश और सौरभ शेखर की ग़ज़लें पसन्द आईं |

    उत्तर देंहटाएं
  36. गुरूवर,

    तरही की त्यौहारी छटा ने मन मोह लिया, जिस तरह लोग अपने घरों को सजाते हैं वही साज-सज्जा ब्लॉग पर दीप, अनार और पाना (खास अपने क्षैत्र को एक पहचान देते हुए)।

    सौरभ शेखर जी और अश्विनी रमेश जी की गज़लों को मिले प्रतिसाद और वो भी धुरंदरों के.......तो मेरे लिए कोई स्कोप ही नही बचा लेकिन मैं अपनी पसंद जरूर जाहिर कर सकता हूँ :-

    शेखर जी की गज़ल से :

    कुछ बियाबाँ अभी भी वीरां हैं
    यूँ तो रौनक बहुत लगे हर सू

    दिल के बहुत करीब सा शे’र कहा है

    अश्विनी रमेश जी की गज़ल से :

    आज मदहोश है हर बशर है यहाँ
    लोग यूँ रस में हैं रमे हर सू

    लोग यूँ रस में रमे रहें, उल्लास से भरा हो ज्योतिपर्व सबके जीवन में मिठास घुले और ऐसी ही अनेक शुभकामनाओं के साथ......

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  37. लो फिर से आ गई दीपावली और सुबीड़ संवाद सेवा हर बार की तरह झिलमिलाने लगी। झिलमिल झिलमिल....!!

    सौरभ जी के विषय में तो सोचना पड़ जा रहे हैं कि किस शेर की तारीफ करे? मतले की ? अमावस के बदगुमाँ होने की ? मुए अँधेरे के नाकों चने चबाने की ?या कुछ बियावाँ के अब तक वीरान बने रहने की ?
    बस वाह वाह वाह वाह कहने से जी नही भर रहा।

    अश्विनी रमेश जी ने भी कमी नही छोड़ी है।

    आग़ाज़ को सलाम.....!!

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  38. सभी मित्रों--तिलकराज कपूर, लावण्यम ,रविकांत पांडे ,सुधा ओम ढींगरा ,मुकेश कुमार तिवारी ,कंचन सिंह चौहान ,कविता रावत---आप सबका तह दिल से शुक्रिया कि आप लोगों ने उत्साहवर्धन किया और आशा करता हूँ अब गज़ल और निखरेगी !

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  39. इस ब्लाग पर आते ही मेरे दिल मे तो सच खुशियों के दीप जल ही उठे हैं़ दोनो गज़लें बहुत अच्छी लगी़ . मेरा छोटा सा कमेन्ट ही अभी कुछ दिन कबूल करें। शुभकामनायें।

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  40. तीरगी मन की जो मिटा पाए
    काश ऐसा दिया जले हर सू --- आमीन..
    वैसे इस ब्लॉग़ पर ज्योति पर्व की खूबसूरती देखते ही बन रही है...प्रकाश ही प्रकाश ... लगता है जैसे प्रेम-दीप दपदपा रहे हों...
    "आज मदहोश हर बशर है यहाँ
    लोग यूं रस में हैं रमे हर सू" यकीनन यहाँ तो यही दिख रहा है...

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  41. निर्मला कपिला जी और मीनाक्षी जी का गज़ल पर टिप्पणी द्वारा उत्साहवर्धन के लिए तह दिल से शुक्रिया !

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