शुक्रवार, 22 मार्च 2013

आज के शो स्‍टॉपर प्रस्‍तुतिकरण में दो रचनाकारों श्री मधुभूषण शर्मा 'मधुर' और श्री नवीन सी चतुर्वेदी से सुनते हैं उनकी ग़ज़लें ।

पहले इस शो स्‍टॉपर में केवल एक ही रचनाकार श्री नवीन चतुर्वेदी जी होने थे, लेकिन कल ही श्री द्विजेन्‍द्र द्विज जी द्वारा उनके गुरू श्री मधुभूषण शर्मा 'मधुर' जी की एक ग़ज़ल तरही के लिये भेजी गई । चूंकि द्विज जी के गुरू हैं सो हम सबके भी वे गुरू हुए, सो बस ये तय किया गया कि नवीन जी के साथ मधुर जी मिल कर शो स्‍टॉपर बनेंगे तथा तरही का समापन करेंगे । हालांकि शो स्‍टॉपर को फैशन शो के संदर्भ में कुछ और अर्थ में लिया जाता है । वहां उसका मतलब होता है कि ऐसी प्रस्‍तुति जो शो को रोक दे । तो ये दोनों ग़ज़लें भी ऐसी ही हैं । समापन के बाद हम दो दिन का विश्राम लेंगे तथा 24 मार्च से होली की तरही शुरू हो जाएगी । तो दो दिन तक आप इन दो ग़ज़लों का आनंद लीजिये और होली का मूड बनाइये । मूड बना कर लिख भेजिये एक ग़ज़ल ।

केसरिया, लाल, पीला, नीला, हरा, गुलाबी

holi-cartoons

ये क़ैदे बामशक्‍कत जो तूने की अता है

आइये आज सुनते हैं श्री मधुभूषण शर्मा 'मधुर' जी,  एवं श्री नवीन सी चतुर्वेदी से उनकी ग़ज़लें ।

 naveen chaturvedi

श्री नवीन सी. चतुर्वेदी जी 

ज़ुल्मत की रह में हर इक तारा बिछा पड़ा है
और चाँद बदलियों के पीछे पड़ा हुआ है

फिर से नई सहर की कुहरे ने माँग भर दी
और सूर्य अपने रथ पर ख़्वाबों को बुन रहा है

नींदें उड़ाईं जिसने, उस को ज़मीं पे लाओ
तारों से बात कर के किस का भला हुआ है

मिटती नहीं है साहब खूँ से लिखी इबारत
जो कुछ किया है तुमने कागज़ पे आ चुका है
 

जोशोख़रोश,जज़्बा; ख़्वाबोख़याल, कोशिश
हालात का ये अजगर क्या-क्या निगल चुका है

जब जामवंत गरजा हनुमत में जोश जागा
हमको जगाने वाला लोरी सुना रहा है

फिर से नई सहर की कुहरे ने मांग भर दी में सूर्य द्वारा अपने रथ पर ख्‍वाबों को बुनना बहुत प्रभावशाली बिम्‍ब बना है । अंधेरे और उजाले के बीच के द्वंद को बहुत अच्‍छी तरह से दिखाया गया है । मिटती नहीं है साहब खूं से लिखी इबारत में आसमान पर उड़ने वालों को ज़मीन पर लाने की बात का शायर ने खूब चित्रित किया है । जोशो खरोश जज्‍बा में एक बार फिर शायर ने हालात के अजगर पर करारी चोट की है । और अंत में हनुमान में जोश भरने वाला जामवंत का स्‍वर हम सब पर अर्थात हम सभी पर ही चोट कर रहा है । हम जो जगाना भूल गये हैं । हम जिनको जगाना है उन्‍हें सुला रहे हैं । बहुत सुंदर ग़ज़ल वाह वाह वाह ।

madhubhooshan madhur
श्री मधुभूषण शर्मा जी 'मधुर'

अप्रैल 1951 में पंजाब में जन्मे डा० मधुभूषण शर्मा ‘मधुर’ अँग्रेज़ी साहित्य में डाक्टरेट हैं. बहुत ख़ूबसूरत आवाज़ के धनी ‘मधुर’ अपने ख़ूबसूरत कलाम के साथ श्रोताओं तक अपनी बात पहुँचाने का हुनर बाख़ूबी जानते हैं.इनका पहला ग़ज़ल संकलन जल्द ही पाठकों तक पहुँचने वाला है.आप आजकल डी०ए०वी० महविद्यालय कांगड़ा में अँग्रेज़ी विभाग के अध्यक्ष हैं.

ज़ुल्मो-सितम से आजिज़ जो खून खौलता है
वो आँख से टपक कर हाथों पे रेंगता है

दिल ही नहीं है दिल वो, जो दिल नहीं है रखता
अब चीज़ क्या है दिल ये, ये दिल ही जानता है

चांदी के चंद सिक्के खनकेंगे चाँद पे जब
देखेंगे हुस्न शायर किस शै से तोलता है

बाज़ार है ये दुनिया, हर चीज़ की है कीमत
ईमां ज़मीर सब कुछ पैसा खरीदता है

कहता हूँ ज़िंदगी मैं ज़िंदादिली से उसको
ये कैदे-बामुशक्कत जो तूने की अता है

आकाश में 'मधुर' भी कुछ देर तो उड़ेगा
उतरेगा फिर जमीं पे, दाना भी देखता है

तो बात मतले की । आंखों से टपक कर हाथों पर रेंगने वाले खून की बात ही क्‍या इसी खून के लिये तो चचा गालिब ने कहा था कि जो आंख से ही न टपका तो फिर लहू क्‍या है । बहुत सुंदर मतला । और उसके बाद का शेर तो उफ क्‍या शेर है दिल की आवृत्तियों ने आनंद ला दिया है । बहुत सुंदर बहुत सुंदर । चांदी के चंद सिक्‍कों के चांद पर खनकने की बात बहुत दूर की सोच का परिचायक है, दूर की सोच मतलब बहुत आगे की सोच । जब चांद पर इन्‍सां पहुंच जाएगा । और अंत में बहुत शानदार से मकते के शेर ने ग़ज़ल का मुकम्‍मल कर दिया है । सुंदर शेर । सुंदर ग़ज़ल वाह वाह वाह ।

तो आनंद लीजिये दोनों शानदार ग़ज़लों का और देते रहिये दाद । और अब मिलते हैं होली के मुशायरे में । याद रहे आपने अभी तक अपनी ग़ज़ल 'केसरिया, लाल, पीला, नीला, हरा, गुलाबी' पर नहीं भेजी है । जल्‍दी भेजिये क्‍योंकि 24 से 26 तक होने वाला है होली का धमाल ।

37 टिप्‍पणियां:

  1. भाई पंकज सुबीर सहित समस्त मित्रों को होली की अग्रिम शुभ कामनाएँ। ब्लॉग में मेरी अदना सी कोशिश की इतनी मुहब्बतों से नवाज़ने के लिए आप का बहुत-बहुत आभार। आदरणीय शर्मा जी ने बेहद ख़ूबसूरत ग़ज़ल पेश की है, नमन सहित बधाइयाँ।

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    1. नवीन जी,
      ग़ज़ल की तारीफ़ के लिए बहुत-बहुत
      धन्यवाद ! आपकी रचना भी बहुत प्यारी
      और सुंदर है--दाद कुबूल करें ! होली की
      शुभ कामनाएं !
      -- मधु भूषण शर्मा ’मधुर’

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    2. मालिक चाँद पर चाँदी के सिक्के खनकने के बाद शायर के सामने आने वाली चुनौती के जिस तरह से आप ने बाँधा है - भई वाह, कमाल है कमाल ...... आप को भी होली की अग्रिम शुभकामनाएँ आदरणीय...

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  2. नवीन भाई की शायरी को करीब से देखने का मौका मिला है उनकी शायरी अब परवान चढ़ रही है और नए नए बिम्ब तलाश कर रही है। इस युवा शायर का भविष्य बहुत उज्जवल है क्यूँ के इसमें चीजों को अलग ढंग से देखने और कहने की क्षमता है, "फिर से नयी सहर की--" जोशो खरोश ज़ज्बा---" शेर इस बात का सबूत हैं। कमाल की ग़ज़ल कही है नवीन भाई वाह जियो---

    उस्ताद क्यूँ उस्ताद कहलाता है इसका प्रमाण आदरणीय मधुर जी ग़ज़ल दे रही है। मतले से मक्ते तक का सफ़र निहायत खूबसूरत है। "दिल ही नहीं है दिल---" क्या शेर है? जिंदाबाद-जिंदाबाद, और फिर गिरह का शेर --उफ़---कमाल है कमाल। मधुर जी को पढ़ कर कितना कुछ सीखने को मिला और ये भी जाना के द्विज जी इतनी खूबसूरत ग़ज़लों के पीछे किसका आशीर्वाद है। मधुर जी की किताब का बेताबी से इंतज़ार रहेगा।

    इस बार की तरही में ऐसे ऐसे कलाम पढने को मिले हैं के दिलबाग बाग़ हो गया। ये तरही भी पिछली तरहियों की तरह बहुत कामयाब हुई है और इस कामयाबी का सेहरा गुरुदेव के सर बाँधने में मुझे कोई हिचक नहीं है। जय हो।

    नीरज

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    1. आदरणीय नीरज भाई साहब प्रणाम। आप के स्नेहाशीष हम सभी को निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। बड़े भाइयों के सरमाये में बच्चे किलक और पुलक रहे हैं...... बस्स ..... कृपा बनाये रखें। होली के मुशायरे में आप के रंगों को देखने की लालसा है :)

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    2. आदरणीय नीरज जी,
      दाद के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया !
      द्विज जी की यह दरियादिली है कि
      उन्होंने मुझे 'गुरू' का दर्ज़ा दे दिया--सच
      मानिए, यह केवल मेरी आयु का सम्मान
      है वर्ना ग़ज़ल के क्षेत्र में उनकी जानकारी
      मुझसे कहीं अधिक और विस्तृत है !
      फिर भी, आपकी प्रशंसा का पात्र बना--धन्यवाद !
      -- मधु भूषण शर्मा ’मधुर’

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  3. आदरणीय पंकज सुबीर जी,
    'सुबीर संवाद' में सम्मिलित करने के लिए
    आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

    इस के लिए आभारी हूं द्विज जी के स्नेह
    और सहयोग के लिए !

    ग़ज़ल आपको पसंद आई, इस के लिए तहे-दिल
    से शुक्रिया !

    आपको और आपके पाठकों को होली मुबारक !
    जीवन में खुशियों के रंगों की बौछार की शुभ-कामना के साथ--

    -- मधु भूषण शर्मा ’मधुर’

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  4. बहुत ही बढ़िया ग़ज़लें कहीं हैं नवीन जी और मधुभूषण जी ने.

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    1. आभारी हूँ भाई राजीव जी

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    2. राजीव जी,
      प्रशंसा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद !
      -- मधु भूषण शर्मा ’मधुर’














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  5. नवीन जी के लाजवाब शेर सच में स्टॉपर का काम कर रहे हैं ...
    फिर से नई सहर की ... आशा की उम्मीद दिलाता है ...
    आखरी शेर भी कमाल का है नवीन जी ... हम को जगाने वला लोरी सुना रहा है ... पता नहीं कब तक इस लोरी में मस्त रहने वाले हैं हम ... बहुत खूब ...
    मधुर जी ने तो मतले के शेर से आकरी शेर तक कमाल किया है ...
    हम तो आनद ले सकते हैं इन शेरों का ओर वाह वाह ही कर सकते हैं ...

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    1. भाई दिगम्बर नासवा जी आप की सीलन वाली कविता आज तक ज़हन में दर्ज़ है। जिस का अपुन फेन है उस से मिलने वाली दाद के क्या कहने..... बहुत बहुत शुक्रिया भाई.......

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    2. दिगम्बर नासवा जी,
      दाद के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया !
      -- मधु भूषण शर्मा ’मधुर’









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  6. अंत की दो ग़ज़लों से अपनी मंजि़ल पर पहुँची ये तरही यादगार रहेगी 'कैदे-ए-बामशककत के विभिन्‍न आयामों के लिये।
    नवीन चतुर्वेदी जी ने बड़ी गंभीरता से ग़ज़ल की आत्‍मा को समझने की कोशिश की हे और उनके प्रयासों का परिणाम एक सुखद परिपक्‍व ग़ज़ल के रूप में सामने है।
    मधुर जी की ग़ज़ल हमेशा की तरह बड़ी खूबसूरती से उनकी उम्र के परिपक्‍व अहसास समक्ष में रखती है। बतौर-ए-खास गिरह के शेर की जिंदादिली। मत्‍ले के शेर और दूसरे शेर की बात तो पंकज भाई ने कह ही दी। मत्‍ले का शेर पढ़ते ही मुझे भी ग़ालिब साहब का यही शेर याद आया था।
    तरही की इस मुकम्‍मल पूर्णता पर सभी को बहुत-बहुत बधाई।
    अगली तरही का इंतज़ार है। और उसमें भभ्‍भड़ कवि भौंचक्‍के के बिना काम नहीं चलेगा।

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    1. मेरे भभ्‍भड़ कवि ( करन अर्जुन) आएंगे,

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    2. आदरणीय तिलक भाई साहब प्रणाम। नीरज भाई के लिए जो शब्द प्रयुक्त किए हैं वह आप के लिए भी हैं। आप का सरमाया सर पर बना रहे और हाँ होली की तरही में आप और नीरज भाई की जुगलबंदी का इंतज़ार रहेगा :)

      भभ्भड़ कवि का बेसब्री से इंतज़ार है हुजूरेआला :) वो भी मिस्टर इंडिया टाइप पिचकारियों के साथ ....

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    3. आदरणीय तिलक जी,
      आपकी प्रेम भरी विस्तृत टिप्पणी
      और दाद के लिए तहे-दिल से शुक्रिया !
      -- मधु भूषण शर्मा ’मधुर’

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  7. यानि, नवीन भाई की उपस्थिति भी बननी थी ! वाह-वाह !
    और, बनी भी तो साहब क्या बनी है ! मुग्ध हो गये हम.
    क्या ग़ज़ल हई है ! सुभानअल्ला ! किस एक शेर की कही जाए..
    फिर से नई सहर की कुहरे ने मांग भर दी.. .
    जोशोख़रोश जज़्बा, ख़्वाबोख़याल, कोशिश.. . वाह, नवीन भाईजी, वाह-वाह !

    मग़र जो एक शेर है जिसे मैं बार-बार पढ़े जा रहा हूँ, वो ये है -
    जब जामवंत गरजा, हनुमत में जोश जागा.. . हाय-हाय-हाय ! हमको जगाने वाला लोरी सुना रहा है !
    आपकी सोच और भाव की उठान को दाद पर दाद दे रहा हूँ

    यों गिरह का शेर भी अपेक्षित था. क्योंकि मेरा अक्सरहा अनुभव रहा है, आपकी गिरहें ज़बर्दस्त हुआ करती हैं.
    बहरहाल, एक कामयाब और ज़िन्दाबाद कोशिश के लिए आपको भरपूर बधाई, नवीन भाईजी.
    शुभ-शुभ

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    1. आदरणीय सौरभ जी उत्साह वर्धन हेतु बहुत-बहुत आभार। स्नेह बनाये रखिएगा। गिरह पर काम नहीं हो पाया, कोशिश तो की पर क़ामयाबी नहीं मिली.......

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  8. श्रद्धेय मधुभूषण शर्माजी ’मधुर’ की गुरु-गंभीर उपस्थिति ने इस मुशायरे को अपेक्षित ऊँचाई दी है.
    आपकी मैं कोई पहली ग़ज़ल ही देख रहा हूँ. अवश्य ही आपकी अनुभवी दृष्टि से मैं विशेष लाभान्वित होऊँगा.

    आपके मतले ने जो कुछ कहा है वह बहुत कुछ अनकहा रह गये को सामने लाता है. हाथों में रेंगने ने जो कुछ इशारा किया है, वह आपकी समृद्ध समझ की बानगी सदृश ही है. सही है, उकताया हुआ मौन जब मुखर होता है तो वह शब्दों की अर्जियाँ न दे कर हाथों में रह-रह गँड़ासे उठा लेता है.
    आपके इस मतले के होने पर मैं आपका सादर अभिनन्दन करता हूँ.

    दिल ही नहीं है दिल वो..
    इस शेर का होना ही बखूब बताता है कि सामान्य कलम इस शेर पर कोशिश कर अपनी क्या दुर्गत बना डालती.

    और, गिरह के शेर के लिए विशेष धन्यवाद संप्रेषित है.

    आदरणीय पंकजभाईजी, इस मुशायरे के सुगढ़ संचालन और इसकी सफल समाप्ति पर आपको हृदय से बधाई.
    सादर

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    1. आदरणीय सौरभ जी,
      आपकी दाद और हौसला-अफ़्ज़ाई के लिए
      तहे-दिल से शुक्रिया !
      -- मधु भूषण शर्मा ’मधुर’

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  9. दोनों ग़ज़ाकारों को बहतरीन प्रस्तुति के लिये बधाई।

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  10. दोनों ही शायरों ने कमाल की ग़ज़लें कही हैं। वाकई ये पोस्ट शो स्टापर है। नवीन जी ने सभी शे’र अपने आप मे अनूठे हैं। बहुत बहुत बधाई उन्हें इस शानदार ग़ज़ल के लिए।
    मधुर साहब की ग़ज़ल भी लाजवाब है। ढेरों दाद उन्हें इस शानदार ग़ज़ल के लिए।

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    1. धरम प्रा जी की जय..... भाई आप ने पास कर दिया तो बड़ी तसल्ली मिली। धर्मेन्द्र भाई आप की वैज्ञानिक विषयों पर कविताओं का फेन हूँ मैं। ग़ज़ल-छंद-कविता-गीत हर विधा में माहिर रचनाकार जब पीठ ठोंकता है तो मन को बड़ी तसल्ली मिलती है........... ठेंक्यू धरम प्रा जी :)

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  11. भाई नवीन चतुर्वेदी जी और आदरणीय मधुभूषण शर्मा जी की ग़ज़लों ने इस मुशायरे को सम्पान भी किया और सम्पूर्ण भी.
    दोनों शायरों के फ़िक्र की बुलन्दी देखते ही बनती है.नवीन चतुर्वेदी जी द्वारा वर्णित हालात का अजगर तथा आदरणीय मधुभूषण शर्मा जी की क़ैदे-बामशाक़्क़त के प्रति ज़िन्दादिली ........ कमाल..... कमाल.... कमाल....कमाल..... कमाल.... कमाल.

    मुशायरे की भव्यता के लिए आपको बधाई भाई पंज सुबीर जी.... दो दिन की रेस्ट फ़र्माइये ..... होली के मुशायरे के लिए अग्रिम बधाई और शुभकामनायें.
    सादर
    द्विज

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    1. आदरणीय द्विजेन्द्र भाई प्रणाम। मुहतरम सागर साहब का नाम रौशन करने वाले शायर से मिली दाद मेरे लिये अशर्फ़ियों से कम नहीं।

      थोड़ी सी नोंक झोंक - आप वाक़ई ग़ज़ब की cheese हैं भाई जी :)

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    2. लो कल लो बात ! ऐं ऐं नवीन भैये!!!! आपको मैं Cheese लगता हूँ ?? ?????
      इधर मेरी बेग़म को भी बहुत पसन्द है `cheese'. उसने यह पढ़ लिया तो???
      तो भाई दिल से दुआ माँगो कि वो ये न जान पाये कि अपुन ’cheese हैं'
      .......खा जाएगी हमें.

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  12. जल्दी में पंकज सुबीर जी का नाम में त्रुटि चली गई, होली की तरंग के मद्दे नज़र नाचीज़ (इस चीज़) को क्षमा करने का प्रयास करें.

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    1. नाचीज इस चीज भाई द्वीज को छिमा प्रदान की जाती है । आपने कमल (पंकज) को पांच ( पंज) बना दिया उस हेतु छिमा ।

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  13. भाई जान
    छिमा मिल गई . ख़ुश हो गयी ये चीज़.

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    1. लेकिन समापन सबद भी तो गलत छप हैंगा. ऊ का लिए भी छिमा .आपको भी छिमा ,कि आपने बताया नहीं

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  14. पंकज भाई होली की तरही भले कल से शुरू होगी पर आप ने जिस तन्मयता से ब्लॉग को सजाया है उस से अभी से हुल्लड़ सीहौरबादी टाइप मूडवा बन गया है। आप बहुत मेहनत करते हैं आयोजन को परवान चढ़ाने में, आप को और आप की पूरी टीम को साधुवाद।

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  15. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-03-2013) के चर्चा मंच 1193 पर भी होगी. सूचनार्थ

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  16. इस तरही की शुरुआत और समापन दोनों ही अनूठे ढंग से हुई | इसके लिए आदरनीय पंकज जी को सर्वप्रथम बधाई |

    साथ ही , शो स्टौपर में शामिल दोनों रचनाकारों को भी आभार उनकी लाज़वाब प्रस्तुति के लिए |

    तरही के सभी सदस्यों को होली की अग्रिम शुभकामनायें |

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  17. आहा क्या नए नए अंदाज से भरपूर अशआ'र हैं।

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  18. 24-मार्च .... और होली सामने है। आहा रंग जैम गया भरपूरे।
    हम तो पहले से ही होलिया जाते हैं। स्वयं स्वयं अपने आपे रंग चढ़ जाता है। और अबकी तो असली वाला चढा है।।।

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