गुरुवार, 12 जुलाई 2012

स्वर्ण मंडित प्रथम रश्मि की चेतना मेरे चिर शून्य को भर रही है प्रिये, आज इस बालक वीनस केसरी ने मुझे नि:शब्‍द कर दिया है ।

आज तरही का सिलसिला कुछ और आगे बढ़ाते हैं । आज शाम 7 बजे भोपाल के शहीद भवन में डॉ: आज़म की पुस्‍तक 'आसान अरूज़' का विमोचन है । विमोचन उत्‍तराखंड के राज्‍यपाल महामहिम श्री अज़ीज़ क़ुरैशी साहब के हाथों संपन्‍न होगा । भोपाल में रहने वाले मित्र वैस्‍े तो शहीद भवन से परिचित होंगे फिर भी जो अनभिज्ञ हैं उनके लिये सूचना है कि शहीद भवन एम.एल.ए. क्‍वार्टस के ठीक पास ही है । राजभवन के सामने से ऊपर की ओर जाने पर सामने ही शहीद भवन पड़ता है । तो यदि आप आ सकें तो अवश्‍य आएं डॉ आज़म को शुभकामनाएं देने । आज साहित्‍य जिस दौर से गुज़र रहा है उसमें लेखक को शुभकामनाओं की सबसे अधिक आवश्‍यकता होती है । शायद भारतीय भाषाओं का साहित्‍य अपने अंतिम दौर में है ।

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विमोचन के ठीक बाद एक हिंदी उर्दू की साझी महफिल भी सजनी है । महामहिम ग़ज़ल, कविताओं के शौकीन हैं और बहुत अच्‍छे श्रोता हैं ।

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प्रीत की अल्‍पनाएं सजी हैं प्रिये

आइये आज सुनते हैं वीनस केसरी से एक हिंदी ग़ज़ल । वीनस ने केवल पांच ही शेर कहे हैं किन्‍तु पांचों ही पांच हज़ार पर भारी पड़ रहे हैं । एक बार फिर से सिद्ध हो रहा है कि संख्‍या से अधिक महत्‍व गुणवत्‍ता का होता है । साहित्‍य में संख्‍या का कोई महत्‍व नहीं है । चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने घोषित रूप से साढ़े तीन कहानियां लिखीं । उसमें से लोकप्रियता उनको केवल एक 'उसने कहा था' से मिल गई । अक्षर और शब्‍द तो किफायत से उपयोग किये जाने वाली वस्‍तु हैं । जो काम महाग्रंथ नहीं कर पाते उनको कभी कभी एक वाक्‍य कर देता है ।

venus

वीनस केसरी

radha

नेह छवि आज यूं घुल रही है प्रिये
जैसे इक पल से मिलती सदी है प्रिये

तप्त तरुवर सदृश था ये जीवन मेरा
आपका आगमन श्रावणी है प्रिये

मन में मंगल मिलन की मधुर कल्पना
दृग में छवि चांदनी रीतती है प्रिये

स्वर्ण मंडित प्रथम रश्मि की चेतना
मेरे चिर शून्य को भर रही है प्रिये

माधुरी मन सरोवर सुशोभित कुसुम
प्रीत की अल्पना यूं सजी है प्रिये 

स्‍वर्ण मंडित प्रथम रश्मि की चेतना, मेरे चिर शून्‍य को भर रही है प्रिये, ये शायद वो शेर है जिसको सुनकर उस्‍ताद लोग तरही के समापन की घोषणा कर देते । बशीर बद्र साहब ने जब तरही मुशायरे में वो शेर पढ़ा था 'उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो' तो मुशायरे के सदर ने तुरंत तरही मुशायरे को समाप्‍त करने की घोषणा कर दी थी कि जो शेर होना था वो हो चुका । वीनस ने सारे शेर जबरदस्‍त कहे हैं । गिरह में मिसरा उला अहा अहा है । आंखें भर आईं और बच्‍चन,  नेपाली का स्‍वर्ण युग याद आ गया । छवि शब्‍द का दो शेरों में इस्‍तेमाल करके एक चूक ज़ुरूर कर दी है लेकिन वो क्षम्‍य है । 'माधुरी मन सरोवर सुशोभित कुसुम' बहुत सुंदर । आज इस बालक ने मुझे नि:शब्‍द कर दिया । वीनस स्‍वर्ण मंडित शेर के लिये तुम्‍हारी पिछले दिनों की गई बड़ी ग़लती को भी क्षमा किया जाता है । ये वो काम है जो तुमको करना चाहिये, और इसकी जगह तुम कुछ भी कर रहे हो ।

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर और उम्दा शेर-सभी!! वीनस को बधाई...

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  2. वाह वीनस ने वाकई निशब्द कर दिया है. पाँचों के पाँचों उस्तादाना शेर.. तारीफ़ के लिए शब्द पड़ जाएँ. कमाल कर दिया है. बहुत बहुत बधाई.

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  3. आज तो वीनस का दिन है, और ये वो दिन है जिसे शायद ही कभी वो भूलना चाहेगा. गुरुदेव ने जो बात कही है "ये शायद वो शेर है जिसको सुनकर उस्‍ताद लोग तरही के समापन की घोषणा कर देते । " अब उसके बाद कुछ कहने को नहीं बचता है. और तिस पे क्षमा भी मिल गई है तो अब तो इलाहाबाद में जश्न शुरू........... :-)

    इस तरही ग़ज़ल के शेर वीनस से जब सुने थे तब उसे शायद वीनस के मन में थोड़ी हिचकिचाहट भी थी, क्योंकि शुद्ध रूप से ऐसी ग़ज़ल वीनस ने शायद पहले नहीं कही थी, मगर आखिरकार आज वो ग़ज़ल सबके सामने है और पूरा मुशायेरा लूट के इठला रही है.
    तहे दिल से मुबारकबाद वीनस भाई..............

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  4. बेहतरीन गज़ल विनस जी को बधाई। मतल्ले का कोई ज़वाब नहीं है।

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  5. सर्वप्रथम,डॉ. आज़म जी को उनके पुस्तक विमोचन के लिए हार्दिक बधाई...कार्यक्रम निश्चित रूप से बेहतरीन होगा जहाँ इतने बड़े-बड़े साहित्यकार-ग़ज़लक़ार लोग हैं...हम यहीं से अपनी शुभकामना संदेश भेज रहे हैं..

    दूसरी बात आज की तरही ग़ज़ल वास्तव में वीनस जी की एक बेहतरीन प्रस्तुति है..शब्दचयन छा जाने वाले..कम शेर पर सब के सब शानदार है...वीनस जी को बधाई..

    तरही मुशायरा के सूत्रधार पंकज जी को प्रणाम !!!

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  6. वाह वीनस ने सच मे कमाल कर दिया
    तप्त तरुवर-----
    माधुरी मन सरोवर----
    किस किस शेर की तारीफ करूँ। काश कि मुझे भी इतनी अच्छी हिन्दी आती होती। डा. आज़म जी को मेरी भी शुभकामनायें।

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  7. अद्भुत.. अद्भुत.. अद्भुत ! !
    वस्तुतः अचंभित हूँ. जिह्वा अविचल है. मन शांत है. हृदय पंकजभाई के कहे एक-एक शब्द को स्वीकार रहा है.
    ये होता है अंतर कुछ यों ही कह जाने में और संयत होकर बहुत कुछ कहने में. वीनस, आज आप संयत होकर बहुत कुछ कह गये हैं. बहुत उम्दा कह गये हैं.
    हार्दिक बधाई.

    ********
    भोपाल के आयोजन के लिये हृदय से शुभकामनाएँ.

    --सौरभ पाण्डेय, नैनी, इलाहाबाद (उप्र)

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  8. वीनस ये क्या कर रहे हो तुम ????कोई इतना भी अच्छा लिखता है क्या ??
    ऐसा लिखने के कारण अब मैं और कुछ नहीं कहूंगी सिवाय एक शब्द के ...........
    और वो शब्द है "नि:शब्द"

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  9. इस ग़ज़ल पर तो यही कहा जा सकता है कि:
    शब्‍द माणिक हुए पंक्तियॉं हैं कनक
    ये ग़ज़ल कंगनों सी सजी है प्रिये।

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  10. वीनस... वीनस.....! यही कहूंगा मन सावन सावन कर दिया भाई आपने.
    आपका आगमन श्रावणी है प्रिये... सचमुच. बार बार सुन रहा हूँ, महसूस कर रहा हूँ.
    अति सुन्दर ! नहीं नि:शब्द!! क्यूंकि आपने ख़ास मौके पर कहा...
    माधुरी मन सरोवर सुशोभित कुसुम... ये तो जैसे संगीत आनंद में परिवर्तित हुआ जा रहा है.
    लाजवाब !!
    तरही जिंदाबाद.
    --
    डा. आजम जी को उनके निरंतर प्रयास और इस उम्दा आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं!!

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  11. वीनस तुम ने और भी कमाल किये हैं, जैसे... मन में मंगल मिलन की मधुर... (ये तो कोई विशेष सामासिक पद लगता है वैसे मेरा हिंदी ज्ञान सीमित है)
    यही कहूंगा जी भर के सुनने लायक है ये ग़ज़ल !!

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  12. वीनस ने आज बात ही ख़तम कर दी...छुट्टी हुई...उस्ताद टापते रह गए और उनकी नाक के नीचे से वीनस मुशायरा लूट कर ले गया...अब यहाँ क्या काम...चल खुसरो घर आपने...अद्भुत शेर कह कर अचंभित कर दिया है वीनस ने...जियो प्रिय बहुत खूब...गुरूजी के आशीर्वाद के सही हकदार हो तुम...बधाई बधाई बधाई

    नीरज

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  13. वीनस हमेशा ही चौंकाने वालों से रहा है ... और आज भी उसने कोई कसार नहीं छोड़ी है ....
    मन में मंगल मिलन की मधुर कल्पना ... या फिर ...माधुरी मन सरोवर ... उफ़ ... किसी को सुना दो तो वैसे ही मर मिटे ... गज़ब कमाल किया है वीनस ने इस बार ...

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  14. यों रहीम सुख होत है, बढ़त देखि निज गोत ।
    ज्यों बड़री अंखियां निरखि अंखियन को सुख होत

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    1. सतगुरु के सदकै करूँ दिल अपडी का साछ |
      कलयुग हम स्यूं लड़ि पड्या मुह्मक मेरा बाछ ||

      - कबीर दास

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  15. इस बालक में बहुत प्रतिभा है।

    यूँ तो वीनस कम लिखता है
    जब लिखता है बम लिखता है

    बहुत बहुत बधाई वीनस भाई। मैं भी निःशब्द हूँ।

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  16. शब्द सुन्दर, ग़ज़ल केसरी-केसरी,
    सुन उतर आई venus परी है प्रिये.
    http://aatm-manthan.com

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  17. वीनस भाई सुन्दर लेखन हमेशा की तरह!वाह!

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  18. वीनस भैया आप कमाल हैं। आप को जितना पढ़ा और सुना, सच मे काफी रोचक लगता है।

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  19. वीनस भाई एक अत्यंत प्यारी रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार हो.आनंद आ गया..

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  20. स्वर्णमंडित प्रथम रश्मि की चेतना

    शब्द और भाव दोनों ही अतुलनीय

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