बुधवार, 25 फ़रवरी 2009

सड़ांधों में जो दिन हमने निकाले याद आते हैं, तुम्‍हारे शहर के गंदे वो नाले याद आते हैं,

अब तो गुलजार साहब ने आस्‍कर भी जीत लिया । वैसे मेरा मानना है कि गुलजार साहब लता मंगेशकर जी ये वो शख्‍सियतें हैं जो कि दुनिया के किसी भी पुरुस्‍कार से ऊपर हैं । और फिर जिस गीत जय हो पर गुलजार साहब को आस्‍कर मिला है वो उनकी प्रतिभा का एक अंश मात्र है अगर आस्‍कर वाले 'तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं '' को अंग्रेजी में अनुवाद करके सुन लें तो उनको पता लगेगा कि गुलजार जिस शख्‍सियत का नाम है वो क्‍या है । मैं अगर अपनी कहूं तो मैं लता मंगेशकर जी और गुलजार साहब का पता नहीं कौनसा फैन हूं । गुलजार साहब जो लिख देते हैं वो ही कविता हो जाता है । फिर भी मुझे सबसे ज्‍यादा पसंद हैं माचिस के गीत । उस फिलम के सारे गीत अद्भुत प्रेम गीत हैं । उनको सुनकर ऐसा लगता है कि प्रेम क्‍या होता है ।

चलिये अब बात करते हैं हमारे इस बार के होली के तरही मिसरे की । इस बार होली को लेकर हास्‍य का मिसरा दिया गया है । होली है ही ऐसा त्‍यौहार जिसमें उल्‍लास होता है उमंग होती है मस्‍ती होती है । मुझे होली के फाग गीतों पर नाचने का बहुत शौक है हमारे यहां पर कई सारी फाग मंडलियां हैं जो कि होली पर फाग गायन करती हैं । कई सारे आयोजन भी होते हैं जिनमे शहर के सभी लोग एकत्र होकर खूब नाचते हैं झूमते हैं । गीत '' आज बिरज में होरी रे रसिया'' , ' मैंने रंग ली आज चुनरिया'', कान्‍हा धरो रे मुकुट खेरो होरी'' , 'डार गयो डार गयो डार गयो रे रंग डार गयो मोपे अवध बिहारी'' जैसे कई सारे गीतों को ये मंडलियां प्रस्‍तुत करती हैं । हमारे यहां पर कई सारे नृत्‍य विशेषज्ञ हैं जो कि इन पर न केवल खुद नाचते हैं बल्कि औरों को भी शामिल करते हैं । मुझे जो फाग गीत सबसे ज्‍यादा पसंद है वो है कान्‍हा धरो रे मुकुट खेरो होरी, कान्‍हा धरो रे '' ।

तो बात चल रही थी तरही मुशायरे की जिसमें इस बार मिसरा दिया है तुम्‍हारे शहर के गंदे वो नाले याद आते हैं । एक अनुरोध है कि ग़ज़ल को पूरी मस्‍ती से लिखें । कहीं कोई दुख दर्द को शेर न रखें । होली है इसलिये हास्‍य का प्रधान रखें । किसी को रुला देना आसान है किन्‍तु किसी को हंसा देना बहुत मुश्किल है । इसलिये आनंद की ग़ज़ल लिखें । निर्मल आनंद की गज़ल जिसका हर शेर मन को गुदगुदा जाये । होली को सार्थक कर जाये । मूलत: ये ग़ज़ल मैंने कुछ ऐसे लिखी थी ।

तिरी आंखों के वो सौंधे उजाले याद आते हैं

ज्‍यों गंगा तीर के पावन शिवाले याद आते हैं

इसमें कुछ लोगों ने आपत्‍ती उठाई थी कि सौंधी तो खुश्‍बू होती है उजाले नहीं, इस पर मैंने उत्‍तर दिया था कि मुझे तो गुलजार नाम के शख्‍स ने बिगाड़ा है इसलिये पहले उनसे पूछो कि आंखों की महकती खुश्‍बू का अर्थ क्‍या है ।

इसी ग़ज़ल का एक और शेर है

तिरे वो हाथ जो छूकर मुझे मदहोश करते थे

महकते और हिना के रंग वाले याद आते हैं

इसी पर ये मजाहिया मतला लिख कर पूरी ग़ज़ल भी कहीं थी कभी

तिरे भाई वो मुस्‍टंडे जिन्‍होंने हड्डियां तोड़ीं

जो होते होते रह गये मेरे साले याद आद आते हैं

तो जल्‍दी भेज दीजिये एक निर्मल आनंद की ग़ज़ल । अनुपस्थिति के लिये बीच बीच में गैप के लिये क्षमा चाहूंगा क्‍योंकि इन दिनों परीक्षाओं का सीजन है ।

कई लोगों ने जानना चाहा है ईस्‍ट इंडिया कम्‍पनी के बारे में उसे बारे में विस्‍तृत जानकारी नीरज जी देंगें । बस इतना जान लें कि संभवत: 14 मार्च को दिल्‍ली में उसका विमोचन है, तथा संभवत: मैं भी उस कार्यक्रम में शामिल होने दिल्‍ली आऊंगा । पुस्‍तक भारतीय ज्ञानपीठ ने प्रकाशित की है पुस्‍तक की कीमत 130 रुपये है जिसे भारतीय ज्ञानपीठ, 18 इन्‍स्‍टीट्यूशनल एरिया, लोदी रोड, नयी दिल्‍ली 110003, Email : sales@jnanpith.net  से प्राप्‍त किया जा सकता है । पुस्‍तक का ISBN नंबर 978-81-263-1691-5 है ।

चलिये आज का चित्र

gulzar gulzar1

15 टिप्‍पणियां:

  1. bilkul sahi, "jai ho" to ansh matr hai Gulzaar sahab ka :D
    Aur OScar se bada naam to mujhe Sampooran Singh Gulzaar lagta hai :)

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  2. अब क्या कहें..."गुरु गोविन्द दोऊ खड़े...." आप ने मन भावन चित्र लगाया है...गुलज़ार साहेब के साथ आप बहुत जँच रहे हैं...होली के मुशायरे के लिए ग़ज़ल का आदेश किया है आपने...जिसे पूरा करने की कोशिश का वचन देता हूँ कोशिश में कामयाबी मिलने का नहीं...
    शेष कृपा है...

    नीरज

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  3. श्री "पंकज सुबीर जी" को देश की सबसे बड़ी साहित्यिक संस्था "भारतीय ज्ञानपीठ" ने अपनी नवलेखन पुरुस्कार योजना के तहत वर्ष 2008 के तीन श्रेष्ठ युवा कथाकारों में सम्मिलित किया है . ये ख़बर एक ऐसे खुशी लेकर आई है जिसके लिए जितनी तालियाँ बजाई जाए कम है ......दिल से बधाई और शुभकामना ...मेरे हर्ष की सच में कोई सीमा नही है ....पंकज जी की ये उपलब्धि हम भारतियों और ब्लॉग जगत के लिए एक उपहार से कम नही है..नीरज जी बहुत बहुत आभार हम सब से ये खुशी को बाँटने का ...

    Regards

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  4. आपके गज़ली पाठ पढते आपकी लियाकत के कायल तो थे ही, अब ज्ञानपीठ ने तो आपको उस श्रेणी में ला खडा किया कि जो कायल नहीं थे वो घायल होंगे ही। बहुत बहुत बधाई।

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  5. बहुत-बहुत शुभकामनाएँ, आज का चित्र तो कुछ ज़्यादा ही ख़ास है!

    ---
    चाँद, बादल और शाम

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  6. गुरु देव सादर प्रणाम,
    एक तरफ जहाँ गुलजार साहब को ऑस्कर मिला मेरे गुरु जी को भारत के ज्ञानपीठ ने अपने श्रेष्ठ युवा कथाकारों में सम्मिलित किया इस्ससे बढ़ी ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है ... बस मजा आगया.. संभवतः इसबार के मुशायरे में मैं भी सम्मिलित होऊंगा ... और आपका आशीर्वाद भी लूँगा..
    आप दिल्ली आरहे है मेरे लिए हर्ष की बात है ... ढेरो बधाई और शुभकामनाएं आपको...


    आपका
    अर्श

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  7. गुरु देव की जय हो
    जय हो के साथ गुलज़ार और ज्ञान पीठ संस्था से आप............
    बहुत बहुत बधाई, आपको और सब ब्लॉग जगत को, ये सम्मान आपके साथ साथ आपके सारे शिष्यों का तो अपने आप ही हो जाता है. मेरे लिए तो ये गर्व की बात है की मैं आपको ब्लॉग के माध्यम से ही सही पर जानता हूँ, और सब को गर्व से कह सकता हूँ की इस उपलब्धि को प्राप्त करने वाले मेरे भी जानकार हैं (कुछ फीते मेरे भी लग जायेंगे).

    आप को दिल से बहुत बहुत बधाई और भगवान् आपको लेखन जगत और जीवन में और नयी नयी उंचाइयां दे

    उत्तर देंहटाएं
  8. गुरु देव की जय हो
    जय हो के साथ गुलज़ार और ज्ञान पीठ संस्था से आप............
    बहुत बहुत बधाई, आपको और सब ब्लॉग जगत को, ये सम्मान आपके साथ साथ आपके सारे शिष्यों का तो अपने आप ही हो जाता है. मेरे लिए तो ये गर्व की बात है की मैं आपको ब्लॉग के माध्यम से ही सही पर जानता हूँ, और सब को गर्व से कह सकता हूँ की इस उपलब्धि को प्राप्त करने वाले मेरे भी जानकार हैं (कुछ फीते मेरे भी लग जायेंगे).

    आप को दिल से बहुत बहुत बधाई और भगवान् आपको लेखन जगत और जीवन में और नयी नयी उंचाइयां दे

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  9. नमस्कार गुरु जी,
    शत-शत बधाइयाँ..............

    मन प्रफुल्लित हो गया है, मुझे भी अपने पे गर्व का अनुभव हो रहा है की मैं आप जैसी महान शख्शियत से जुड़ा हूँ और ज्ञान धारा पा रहा हूँ.

    गुलज़ार साहेब के तो क्या कहने वो तो लफ्जों के जादूगर हैं.

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  10. बेहद प्रसन्नाता का विषय है यह समाचार
    आपकी पुस्तक बहुत ख्याति पाये ये मेरी शुभ कामना है !
    स स्नेह,
    - लावण्या

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  11. क्या कहूँ गुरूदेव.....सुबह ही अपनी खुशी जाहिर कर चुका हूँ। आपको तो मालूम ही कि इस किताब की छपने की कब से प्रतिक्षा कर रहा था मैं। आखिरकार.....
    गुलज़ार के संग वाली तस्वीर खूब फ़ब रही है।

    बधाईयाँ गुरूदेव...ढ़ेर-ढ़ेर बधाईयाँ !!!

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  12. गुरु जी प्रणाम
    आपे बात करके बहुत अच्छा लगा
    मेरी कुछ शंकाएँ थी जिनको मैंने आपकी पिछली पोस्ट पर tippadi के रूप में लिखा था kripya unka भी samadhan करे

    आपका venus kesari

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  13. भारतीय ज्ञानपीठ सम्मान पाकर आपने हम ब्लौगर्स का भी सम्मान बढाया है. शुभकामनाएं.

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  14. ... अत्यंत प्रभावशाली अभिव्यक्ति है।

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