गुरुवार, 5 फ़रवरी 2009

तरही मुशायरा कल होगा, और अब बहरों के बारे में जानकारी देने के क्रम को भी आगे बढ़ाया जा रहा है

इस बार के तरही मुशायरे केा लेकर अभी तक केवल चार ही शायरों गौतम, दिगम्‍बर नासवा, अंकित सफर, संजय चतुर्वेदी जी की ग़ज़लें मिलीं हैं और साथ ही शार्दूला जी ने एक छंद भेजा है । तो यदि आज तक और कुछ ग़ज़लें नहीं मिलती हैं तो हम कल इन पांचों के साथ ही आयोजित करेंगें अपना तरहीं मुशायरा । चूंकि पिछले मुशायरे का अनुभव कुछ अच्‍छा नहीं रहा काफी देर हो गई थी उसको आयोजित करने में सो इस बार ऐसा न हो इसलिये कल ही हम इसको आयोजित कर लेते हैं । इन्‍वर्टर का कमाल है कि हम समय पर काम करने की स्थिति में हैं । और इस बार तो अगले तरही मुशायरे को लेकर अधिक समय भी देना है क्‍योंकि इस बार तो होली को लेकर मजाहिया मिसरा दिया जायेगा । और प्रयास ये किया जायेगा कि होली के अवसर पर तरही मुशायरे में आनलाहन तरही मुशायरा हो सके । कुछ नई तकनीक को तलाश रहे हैं जिससे कि पिछली बार की तरह परेशानी नहो और हम उसको ठीक प्रकार से कर सकें  ।

गज़ल की कक्षायें  न जाने कहां रुकीं थीं । और उस पर ये भी कि बीच में काफी कुछ इधर उधर का होता रहा है । बीच में काफी लोगों के पत्र मिले हैं ग़ज़ल की कक्षाओ के बारे में सो अब उस दिशा में काम प्रारंभ किया जा सकता है । मेरे हिसाब से से तो बहर तक हमारी कक्षायें आ ही गयीं थीं और अब तो काफी लोग बहरों पर अच्‍छा काम कर रहे हैं । तो आज से हम बहरों के बारे में आगे की जानकारी लेंगें । हम कुछ तकनीकी मुद्दों को उठा कर उन पर ही बात करेंगें । जैसे आज की बात करें तो आज गौतम राजरिशी का एक बहुत अच्‍छा सवाल है और उसका उत्‍तर है । ये प्रश्‍न काफी लोगों ने अलग अलग तरीके से उठाया है सो आज इसका समाधान गौतम के प्रश्‍न को ही आधार बना कर किया जा रहा है ।

गौतम राजरिशी :

एक गज़ल पढ़ी ११२११ वाली कामील बहर पर है .२२१२ यानी रज़ज और इस बहरे कामिल में फिर क्या फर्क हुआ.उस दीर्घ वाली बहर में आपने छूट दी थी कि दो स्वतंत्र लघु मिल कर एक दीर्घ बन जाते हैं.फिर इस कामिल के पहले वाले दो लघु मिल जाये तो ये रज़ज़ नहीं बन जायेगा?  समाधान करें गुरूदेव

उत्‍तर : तुमने सही प्रश्‍न उठाया है गौतम दरअस्‍ल में बहरे रजज मुसमन सालिम के चार रुक्‍न होते हैं

मुस्‍तफएलुन- मुस्‍तफएलुन- मुस्‍तफएलुन- मुस्‍तफएलुन 2212  2212  2212  2212

और ये जो है जो तुमने कहा है ये बहरे कामिल मुसमन सालिम है जिसके चार रुक्‍न हैं

मुतफाएलुन- मुतफाएलुन- मुतफाएलुन- मुतफाएलुन 11212   11212   11212  11212

कल चौदवीं की रात थी, शब भर रहा चर्चा तिरा ( बहरे रजज मुसमन सालिम )

कुइ गुंचा टूट के गिर गया, कुइ शाख गुल की लचक गयी ( बहरे कामिल मुसमन सालिम )

कल  चौ   द   वीं 2    2    1    2

की  रा   त   थी  2   2    1   2

शब  भर र  हा 2    2   1  2

चर  चा ति  रा  2   2   1   2

कु इ गुन्‍  च    टू 1  1 2    1    2

ट क गिर ग   या  1  1  2  1    2

कु ई शा  ख गुल 1  1  2  1  2

कि ल चक ग यी 1   1  2  1  2

अब एक रोचक उदाहरण देखो बहरे कामिल मुसमन मुजमिर का

जिसके रुक्‍नों में दोनों का घालमेल है मुतफाएलुन-मुस्‍तफएलुन-मुतफाएलुन-मुस्‍तफएलुन 11212-2212-11212-2212

न दिया करो तुम गालियां, न किया करो मुझपे जफा

न दि या क रो 1  1  2 1  2

तुम गा लि यां 2   2  1  2

न कि या क रो  1  1  2  1  2

मुझ पे ज फा 2   2  1  2 

मास्‍साब का प्रश्‍न : पहला रुक्‍न का वज्‍न और दूसरे का यदि मात्रओं के हिसाब से देखा जाये तो समान ही है तो फिर पहले को मुतफाएलुन और दूसरे को मुस्‍तफएलुन नाम क्‍यों दिया जा रहा है ।

अगली कक्षा में हम देखेंगें एक और रोचक सवाल गौतम का । जिसमें गौतम ने चचा ग़ालिब के कुछ शेरों पर कुछ रोचक सवाल उठाये हैं ।

होली का धमाल - आज देखिये माससाब का एक और टेपा सम्‍मेलन का चित्र । ( सूचना होली मास्‍साब का सबसे फेवरेट त्‍यौहार है इसलिये अब पूरे माह होली का धमाल चलेगा । )

DSC_0012

9 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसी जानकारी मिलती रहे तो बस क्या कहने। आपका ये ब्लाग और हिन्द युग्म बुकमार्क कर के रखा है...शुक्रिया।

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  2. विद्युत-सा घातक है, उर्दू काव्य, रोचक लेख!

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  3. Baap re baap. Anhoni ho jati,
    Dhanvyaad gautam ji, agar ap mere blog mein na aate aur fir mein apke, to ye blog to mujhse choot hi jaata.

    bhai, guru ke guru se na mil pate to blog jagat mein aana nirarthak ho jata.....
    Waitign for weekend.So that i can go through with the entire blog. ghazal ki barikiyan sikhnee mein to samay lagega par kya pata thodi bahut prerna hi mil jaye.

    P.S.: Individual comment , per post on weekend.



    ---------------thanks once again gautam ji---------

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  4. पढ़ तो लिया पूरा पर कई बार पढने के बाद भी समझ नही आया.....कोई बात नही "करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान "

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  5. इतना आसन नहीं है बहार के बारे में समझना जितना हम मान बैठे थे....कौन सी ग़ज़ल किस बहार में है ये तय करना कम से कम अभी भी आसान नहीं हुआ जानना...आप का शुक्रिया अंधेरे रास्तों में हम जैसों के लिए दीपक जलाने का...और आप का ये फोटो...उफ़ युम्म माँ...
    नीरज

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  6. गुरु जी प्रणाम,
    बहोत ही रोचक और सहेजने वाली जानकारी ,मगर समझ समझ के ही समझ पाउँगा ,थोडी थोडी दिमाग में तो आई मात्र को तोड़ने में कम से कम ......

    आभार
    अर्श

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  7. kuchh gadabad hai meree hindi lipi me to roman ka sahaaraa le raha hu guroodev...maaf kijiyegaa
    ye mutfaaelun aur mustfaelun kaa chakkar to uljhan bharaa hai,sir-aap hi samaadhaan kare

    aur is tasweer pe neerraj jee kee waani milaate huye main bhi---ufff uummmaaa
    sir ek tasweer aapkee dekhanee hai kongo bajaate huye-please

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  8. oopar darpan sah jee kee jo tippanee dekhee hai aapane,unhono apne blog par ek badaa achchhaa concept shuru kiyaa hai....wo ek gazal rakhate hain ek haafte ke liye jise sab ko puraa karnaa hotaa hai..
    aap ek nazar daale guru ji to meharabaani hogi unke blog par

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  9. mujhe gazal seekhne vaali posts dhoondne me dikkat pesh aa rahi hai...
    Like, i mean, main gazal seekhne me dilchaspi rakhta hu, aur is liye yahan par relevant material dekhne ke liye aaya.......par lagta hai, sab ke subject padh kar hi dekhna padega...

    I think, pankaj ji, you should have created a lable for such posts, so that reader can filter it out....

    Anyways........thanks for creating this blog..........I'll definitely read it over the weekend.

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