बुधवार, 27 मई 2009

कुछ तो बता ही देगी, इस शहर की खामोशी : श्री समीर लाल समीर की ग़ज़ल के साथ तरही मुशायरे का समापन ।

श्री समीर लाल जी :  तो अब तालियों के साथ स्‍वागत कीजिये समीर लाल जी का जो आ रहे हैं अपनी एन मौके की पांच मिनटि में लिखी ग़ज़ल के साथ । समीर लाल जी के बारे में जितना जानता हूं उससे ये कह सकता हूं कि वे बरसों हास्‍य में अपना समय व्‍यर्थ करते रहे जबकि उनके अंदर तो एक गहन संवेदनशील रचनाकार छिपा है । एक ऐसा रचनाकार जो ऐसी चीजों को पकड़ता है जो आम कवि नहीं पकड़ पाता । मेरी मां लुटेरी थी जैसी अद्भुत रचना लिखने वाले समीर जी को अब हास्‍य केवल गद्य में लिखना चाहिये क्‍योंकि पद्य में वे बहुत अच्‍छी संवेदनशील कविताएं लिख रहे हैं और लिख सकते हैं । इनका काव्‍य संग्रह बिखरे मोती ऐसी ही संवेदनशील कविताओं का संग्रह है  । तो आनंद लीजिये श्री समीर जी की ग़ज़ल का ।

उड़नतशतरी : सब लिख रहे हैं तो ५ मिनट में प्रथम भाव,,,,,पक्का बहर में तो हो नहीं सकते, अब आप बोलोगे कि कैसे ठीक हो..पुराना अनुपस्थित रहने का रिकार्ड यूँ ही थोड़े है :
मरता है वो ही जाने, जहर की खामोशी
कितनी जानलेवा है दोपहर की खामोशी

खुद ही देख लेना ओ! साहिल के सितारों
कितनी खतरनाक है ये लहर की खामोशी

तर्रनुम में कहना जो गज़ल लिख चले हो
खुद ही पता लगेगी, वो बहर की खामोशी

अंजाम-ए-हादसा तो आवाज़ ही ले उड़ा है
कुछ तो बता ही देगी, इस शहर की खामोशी

दी है ये खबर किसने, आपस में लड़ रहे हैं
यूँ बदजुबां न होगी उस कहर की खामोशी.

और अंत में ये फोटो वट सावित्री की पूजा के लिये हमारी माताजी और पत्‍नी जी ने नया तरीका अपनाया । हमारे द्वारा बनाये गये बरगद के बोन्‍साई की ही पूजा की । सही है 45 डिग्री तापमान में बरगद के पेड़ को ढूंढने कहां जायें । ये पेड़ 25 साल पुराना है ।

                                       DSC_1224

7 टिप्‍पणियां:

  1. मास्साब, बहर मे है भी की नहीं..यह जांचनी भेजा था और आप तो छाप ही दिये..पास हो गये कि फेल वाली छाप डाली. :)

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  2. बहुत आभार टाईम के बाद भेजने पर भी शामिल करने के लिए.

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  3. अच्छी गजल लिखी
    समीर जी पर यह शब्द कुछ जमते से है

    खुदा ने बनाने मे कजूंसी की हर तरह से,
    पर खुद ने लड कर अपनी मंजिल पा ली हर तरह से ,

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  4. समीर भाई.............इतना तो अलग लिखा है फिर भी क्यूँ बहर की बात करते हो.......... आप तो जो भी लिखोगे अच्छा ही होगा.........हां गुरु जी कान मरोरेंगे तो कोई बात नहीं .............

    गुरु जी.......वर्कशॉप वाली बात ठीक है...........मेरा मानना है की आप साथ साथ गलतियां भी बताते जायेंगे तो अगली रचना लिखना आसान होगा ... सब ही सीखने वाले हैं....... एक दूजे की गलतियों से भी सीखा जा सकता है

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  5. भूमिका मेँ काफी समेटा आज -
    और समीर भाई का लिखा पसँद आया -
    वट सावित्री पूजते हुए दोनोँ को देख
    मन प्रसन्न हो गया !
    हमारे भारतीय त्योहारोँ की बात ही निराली है जी ! सच !
    - लावण्या

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  6. रही बात आपकी किताब छपवाने की

    तो वो पढ़ कर तो मुझे एक कविता याद आ गयी, सोचा आपको भी दूं पढ़ने के लिये

    अच्छी है, पढ़ियेगा, और बताइयेगा के कैसी लगी

    http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/05/blog-post_14.html

    My e-mail :yogesh249@gmail.com

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