Tuesday, 6 November, 2007

स्‍व. शैल चतुर्वेदी जी की स्‍मृति में आयोजित एक कवि सम्‍मेलन की रिपोर्ट

हिंदी में हास्‍य के पुरौधा कवि श्री शैल चतुर्वेदी जी का पिछले दिनों निधन हो गया । ग्‍वालियर से उनका पुराना नाता रहा है । उनकी स्‍मृति में उनको ही समर्पित एक कवि सम्‍मेलन का आयोजन ग्‍वालियर के होटल सेंट्रल पार्क में स्‍व बाबूलाल जी जैन स्‍मृति न्‍यास तथा सार्थक संस्‍था द्वारा किया गया । हिंदी के वरिष्‍ठ कवि तथा टेक्‍नो कवि श्री अशोक चक्रधर जी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्‍न कवि सम्‍मेलन में देश के ख्‍यात कवि उपस्थित थे ।कार्यक्रम की अध्‍यक्षता वरिष्‍ठ हिंदी कवि तथा शैल जी के अनुज श्री प्रदीप चौबे जी ने की । कार्यक्रम का संचालन हास्‍य सम्राट ओम व्‍यास ओम ने किया ।

  आगरा की कवियित्री श्रीमति मंजू दीक्षित ने वीणापाणी मां सरस्‍वती की आराधना करते हुए ' वीणा वादिनी अब ऐसा वरदान दे देश की आन बान शान बचाने वीणा के स्‍वरों को मां नई झंकार दे ' । जौरा के कवि तेजनारायण बैचेन ने हनुमान जी द्वारा एक लीटर मिट्टी का तेल ना ला पाने की कविता को करारे व्‍यंग्‍य के माध्‍यम से प्रस्‍तुत किया । उन्‍होने काफी तालियां बटोरीं । सीहोर मध्‍य प्रदेश के कवि पंकज सुबीर ने अपनी कविता स्‍व शैल जी को समर्पित करते हुए कहा ' दरख्‍तों से गिरते हुए ज़र्द पत्‍ते हवाओं में यूं ही बिखरते रहेंगें, ये मौसम हैं मौसम कहां ये रुके हैं गुजरते रहे हैं गुजरते रहेंगें'' । लखनऊ सें आए और आज के सबसे सशक्‍त हिंदी के गीतकार आशीष देवल ने अपने राधा और कृष्‍ण के छंद पढ़कर ग्‍वालियर की गुलाबी सर्दी में आध्‍यात्‍म की गंध बिखरा दी ' लाख मनाया कान्‍हा ने पर ना गई तो फिर ना गई राधा '' जैसी पंक्तियों पर जम कर दाद लूटी । जयपुर के कव‍ि संपत सरल ने शरद जोशी जी की शैली में गद्य पढ़ा और '' बातचीत'' व्‍यंग्‍य लेख के माध्‍यम से श्रोताओं को जमकर गुदगुदाया । दिल्‍ली के गजेंद्र सोलंकी ने अपनी ओजपूर्ण वाणी में गंगा की धार है कविता के माध्‍यम से भारत वंदना की । उनके छंद ''रामसेतू क्‍या तुम्‍हारे बाप ने बनाया है '' को जमकर तालियां मिलीं । भोपाल के मदन मोहन समर ने ओज की कविता 'एक रस्‍सी पर फांसी टांगों अफजल और जलाल को '' पढ़कर चेतना जागृत की । मप्र पुलिस में आइ जी तथा कार्यक्रम के सूत्रधार श्री पवन जैन ने कविता मैंने अपनी पूरी नौकरी के दौरान कोई ऐसा कार्यालय नहीं देखा में पुलिस वाले की अंतिम इच्‍छा को प्रस्‍तुत किया । कार्यक्रम का हास्‍यमय तथा गुदगुदाते हुए संचालन दकर रहे हास्‍य सम्राट ओम व्‍यास ओम ने पूरे समय श्रोताओं को हंसते रहने पर मजबूर किया । हकले साले की कविता पर तो श्रोता हंस हंस कर लोट पोट हो गए । बेतूल के कवि नीरज पुरी ने हास्‍य की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बाबा रामदेव को लेकर अपनी हास्‍य रचना सुनाई । मंजू दीक्षित ने वृद्धाश्रम पर अपनी मार्मिक कविता का पाठ किया । अंत में हिंदी के वरिष्‍ठ कवि श्री अशोक चक्रधर ने मंच संभाला और '' रूठा बेलन देखकर गुमसुम तवा परात, बिखर जाएगी रसोई ठोके ताल करात, ठोके ताल करात न पकने देंगें रोटी , अमरीका के संग चल रही गुपचुप गोटी '' पढ़कर उनहोंने परमाणु करार पर व्‍यंग्‍य कसा । उनकी निठारी पर लिखी कविता को काफी पसंद किया गया । देर रात तक चले कवि सम्‍मेलन में बड़ी संख्‍या में श्रोता उपस्‍िथित थे उसपर कवि ओम व्‍यास ओम के संचालन ने रोताओं को बांधे रखा ।

2 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया रही आपकी रिपोर्ट..अपनी यह कविता तो प्रस्तुत करिये न!!

क्या विडियो यू ट्यूब पर चढ़ा रहे हैं?

Devi Nangrani said...

HAR EK AANSOO EK KAHANI KAHATA HE

bahut sunder prastuti hai.

aapki har khabar mein tazgi hoti hai, ravani aur sachai ki jhalak

Devi nangrani