बुधवार, 24 फ़रवरी 2010

होली का तरही मुशायरा:- दो दिन से जूते चल रहे हैं तो आज देखें कि कौन उतार रहा है जूतों से आरती ? हैं ये तो निर्मला कपिला दी, शार्दूला दीदी और कंचन चौहनवा रही ।

( विशेष नोट : होली के तरही मुशायरों की ग़ज़लों को पढ़ने के लिये अपने दिमाग को उसी प्रकार खूंटी पर टांग दें जिस प्रकार से आप डेविड धवन की कामेडी फिल्‍मों को देखते समय करते हैं । यदि दिमाग को साथ रखेंगें तो मनोर‍ंजन की हमारी कोई जिम्‍मेदारी नहीं है ।)

तभी न हम सोचें कि ये हंगामा उंगामा हो क्‍यों रहा है । हम तो लाठी लेकर पहूंच गये थे कि कौन हैं जो गली में एतना धमाल कर रही हैं । पर हम जइसयन गयल बा वइसन ही पूंछ दबाय के कूकर की भांति अइल भी गये । काहे, अरे जोन तीन सन्‍नारियां धमाल करत रहीं वो तो हमार बहीन रहीं । अब कंचन के तो चुटिया पकड़ के हम अभीन खींच लाएं । कछू लाज शरम है या सब भांग के गिलास में घोंट के पी गईं हों । हम नहीं डरते । पर का करें हमारी तो किस्‍मत ही फूटी है । चुटिया पकड़बे का इत्‍ता सानदार मौका हाथ से हीट गया । काहे, के उके साथ हमारी दो बड़ी बहिनियां भी धमाल कर रहीं हैं । दद्दा रे दद्दा का हो गया है इन तीनों को । कौन जाने का पी लिया है होरी के दिन कि तीनों ही आरती की थाली में जूते सजाय के गली के नीम के नीचे खूब तो नाच रही हैं और धमाल कर रही हैं । हम तो आपको का बताएं हमारी तो नाक गोड़ से ही कट गई फचाक दनी से । हम तो काहू के अपना सुंदर मुखड़ा दिखाय के लायक भी नहीं रहे । कंचन अकेली होती तो तो कोई बात नहीं थी पर ई पंजाबी जिज्‍जी और सिंगापुरी भैनजी को क्‍या हो गया । हे राम हम तो किसी नाली में मुंह दबा लेते हैं अब होली तक । ( पहले ये बताओ कि तीनों को भंग पिलाई किसने । )

आज का होली विचार : आज के चित्रों ने ये बात सिद्ध कर दी है कि लोग व्‍यर्थ में ही ये कहते हैं कि पुरुष जन्‍मजात छिछोरे होते हैं ।

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देखिये तो भला किस प्रकार से धमाल कर हैं तीनों की तीनों बहनियाएं । अपने इत्‍ते इज्‍जतदार भाई भभ्‍भड़ कवि का भी ध्‍यान नहीं हैं । हम तो अब सटक रहे हैं आप खुद ही पढ़ लो अब ।

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निर्मला कपिला दी ( भैनजी)

बहार ले कर, है आयी  होली, खुशी मनाये गली हमारी
उतारो जूते से आरती अब सजन है आये गली हमारी

सखी ले आना तगारी गोबर गुलाब ले कर उसे सजाना
करो सुवागत, जु शान से वो, ठहर न पाये गली हमारी

अबीर कीचड मिला बनाएं जरा सा उबटन, लगे सजीला
खिलाऊँ घी गुड चुरी उसे जो पकड के लाये गली हमारी

बना सखी हार चप्पलों से, सडे टमाटर, पिरोना उपले
है चाहता तो गधे पे चढ कर चला वो आए गली हमारी
निगाह उसकी मुझे है ढूँढे मैं बचती छुप छुप सखी के पीछे
बने वो छैला, कहे है लैला,  मुझे सताये गली हमारे

करूँ विनय लो न भंग धतूरा अभी है मेरी नज़र शराबी
सजी धजी सजनी ले के डंडा तुझे बुलाये गली हमारी

बहुत सताया, मुझे है पर अब, मैं गिन के बदले करूँगी पूरे
बुरा न मानो शुगल करें जो होली मनाये गली हमारी
मुझे सताये बना बहाने बता भला ये उमर है कोई
चखाऊँ उसको बना के भुर्ता मजे से खाये गली हमारी
है दाँत नकली,चढा है चश्मा,झुकी कमर है बने जवां वो
ले धूल मिर्ची बुरक उसे जो ये छब बनाये गली हमारी

करो पिटाई, करो ठुकाई,बुढ़उ को देखो बना मजाजी
मज़ा चखाऊँ,उसे बताऊ कभी जु आये गली हमारी

निरा ही लम्पट न शक्ल सूरत मलो तो चूना औ चाक मुंह पर
बना के जोकर नमूना नमूना उसको उठा दिखाये गली हमारी
ये ब्लाग दुनिया हुयी चकाचक बिखर रही है खुशी जहाँ मे
सुबीर लाये रंगीन होली हंसे हसाये गली हमारी
सजे ये होली सजे नशिश्‍तें सभी तरफ हो खुशी मुहब्बत
मुबारके हैं सलाम भी हैं, यूं खिलखिलाए  गली हमारी

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शार्दूला नोगजी दीदी ( सिंगापुर बुआ)

उतारो जूतों से आरती सब सनम हैं आए गली हमारी

कि जिसकी लाठी, है भैंस उसकी, नियम निभाए गली हमारी

उठा पटक दे, गिरा झटक के, दे मार बैलून आँख तक के

बहुत मिलाए रहे इ अंखियाँ, नज़र छुड़ाए गली हमारी

उसी तरह से बजाव सीटी, कि जिस तरह ये रहे बजाते

सुनो सुनयना, सही सिलेमा, इने दिखाए गली हमारी

बेपेंद लोटा, कपार खोटा, छुटंक हाइट, त ऊ प मोटा

सजन हमारा बनय क सपना,  सकल भुलाए गली हमारी

कहाँ से आया सुफेद-काला, पुरान मॉडल कबाड़ वाला

कलर्ड डिजिटल दिलाव हमका, वही चलाए गली हमारी

बुरा न मानो गुलाल के दिन, लगे है गारी परम पियारी

बनो सजनवा तुमहु गुलाबी, तुम्हें मनाए गली हमारी

अबीर तन पे, अबीर मन पे, अबीर चहु दिसि धरा-गगन पे

पिया परस बिन गहन अगन रे, जलद बुलाए गली हमारी

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कंचना चौहान ( बतौली बहना )

अबीर रंगो के रंगी बादल, हैं आज छाये मेरी गली में

कि काश साजन, भी बन कोई घन, मुझे भिगाये मेरी गली में।

गुलाल का रंग है फीका फीका, औ ढोल गुमसुम अलग पड़ी है,

मनेगा फागुन, जो आ के हमदम, भी फाग गाये मेरी गली में।

ये श्यामरंगी सजन के ऊपर, जो हलका हलका सा रंग पड़ा है,

कि मुझ सी जोगन मचल पड़ी वो, मुझे रिझाये मेरी गली में।

जो खुशबू मीठी सी आ रही है, वो खुरमे भाभी बना रही है,

हाँ ये ही खुरमे, हाँ ये ही गुझिया, मुझे ले आये मेरी गली में।

नयन तुम्हारे बने गुबारे, निशाना दिल का ही साध मारे,

मेरी ही गलती से दिल ये मेरा, है चोट खाये मेरी गली में।

हरी चुनरिया औ लाल टिकुली, नयन में काजल है काला काला,

हुई है पूरी हमारी होली, जो आप आये मेरी गली में।

है होलिका अब गली गली में, वो चाहे संसद हो या कि कालेज,

कहाँ पे ढूँढ़े उसे कोई अब, जिसे जलाये मेरी गली में।

अजी हो सुनते पवन के पापा, खड़े ज़रा सा हो जाओ छत पर,

भगे तुरत फिर ये सारे बंदर, जो मिल के आये मेरी गली में।

बड़े दिनो से पड़े हैं पीछे, कि आज इनका भी मान रख लो,

उतारो जूतो से आरती सब, सनम हैं आये मेरी गली में।

वो बोले भाभी गले है मिलना, वो बोली पहले नहा के आओ,

बनाया गोबर का एक दरिया, वो तब नहाये मेरी गली में

पहले एक गंभीर बात आज की तीनों ग़ज़लों को कई कई बार पढि़ये और प्रिंट आउट निकाल कर पढि़ये । आपको कारण समझ में आ जायेगा कि हजल क्‍या होती है । आपको समझ में आ जायेगा कि निर्मल और निश्‍छल हास्‍य क्‍या होता है । तीनों बहनों को मेरा सलाम आप तीनों ने आज मुशायरा सार्थक कर दिया । मैं कोई एक शेर कोट नहीं कर सकता । उफ ये क्‍या लिख डाला आप तीनों ने मिलकर । मित्रों आज की ग़ज़लों पर इतनी दाद आनी चाहिये कि जगह ही कम पड़ जाये । और वो भी बड़ी बड़ी दाद । तीनों की मेहनत और इतनी सुंदरतम ग़ज़लों के लिये यदि आपने लम्‍बी लम्‍बी दाद नहीं दी तो होली के दिन आपको काला कुत्‍ता काटेगा ।

सूचना: कलावती बाई अपने घर को छोड़कर पड़ोस के घर में ताला लगा आई हैं सो वे मुशायरा छौड़ कर पहिले घर पहुंचे ।

सूचना : कल हमारी पाठशाला के एक कुंआरे बच्‍चे का जनमदिन भी है सो कल सब मिलकर शुभकामनाएं दें, कंचन से अनुरोध है कि वो गोबर और बकरी की मेमनियों से डेकोरेट किया हुआ केक तुरंत भेजे अपने भाई के जन्‍मदिन के लिये ।

सुचना : सभी से अनुरोध है कि ठीक होली के दिन अपने अपने ब्‍लाग पर होली की यही हज़ल लगा कर होली का त्‍यौहार मनाएं । 

सूचना : काहे हम का आकाशवाणी हैं कि विविध भारती हैं कि सूचना देते ही रहेंगें । अरे हटाओ बाल्‍टी नल कब के जा चुके हैं ।  

33 टिप्‍पणियां:

  1. ाज तो मुंम्ह छुपाके कहीं बैठ जाती हूँ क्यों कि आज मुझे मेरे पति से बहुत से जूते पडने वाले हैं वो कहेंगे मुझ से जवान बनी फिरती है खुद के नकली दाँत को मेरे बता रही है अरे सुबीर बचाओ---- अब तुम ही आ कर । ये सब तुम्हारा किया धरा है। शर्दुला जी और कंचन ने तो कमाल कर दिया है। उनके लिये दोबारा आती हूँ अभी *उन * से बच लूँ ---- बचाओ -- बचाओ---

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  2. भाई लोगों, जरा संभल कर चबा-चबा कर पढ़ना, ये महिलाओं की शायरी है। अब मुझे ही भ्रम हो गया था कि निर्मला जी घी गुड़ चूरी खिला रही हैं, मैनें सोचा कि उन्‍हीं की गली चलते हैं होली मनाने। वहॉं देखा तो वो पंकज भाई को घी गुड़ चूरी खिला रही हैं, आपत्ति की तो ह़ज़ल सामने रख दी कि एक बार फिर पढ़ लो, ये माल खाने का सौभाग्‍य तो पकड़कर लाने वाले को मिलेगा।
    थोड़ी देर से लौटता हूँ, जरा सा होश में आउँ तो कोई बात करूँ।

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  3. अब होली का रंग सही जमा....सभी भी भंग का सुरुर छाने लगा होले होले...वाह वाह!!


    तीनों की हज़लें सुभान अल्लाह...एक भी गली नजर नहीं आती जहाँ होली मनाई जाये...अच्छा हुआ कनाडा चले आये.. :)

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  4. शार्दूला जी की गली का नियम बदलाव मॉंगता है। अब भाई जिस-जिस की शादी को 20 साल से उपर हो गयें उसके पास भैंस तो पहले से ही होगी, लाठी वाले को कोई हिरनी मिलती हो तो सोचा जाये। शार्दूला जी से बात की तो बोलती हैं भाई सुधर जाओ, अब इस उम्र में कोई हिरनी मिल गयी तो इधर-उधर फुदकती फिरेगी और तुम भी इस सॉंडनुमा शरीर को लेकर कहॉं-कहॉं पीछा करते फिरोगे। शरीफ़ आदमी की तरह जियो जिसकी पहली शादी लड़की से होती है और दूसरी लकड़ी से (अंतिम विदाई के समय)। समझदार हैं, हमको तो समझा दिया, हमने भी सर अन्‍दर कर लिया। लड़कों अब तुम... तुम अपनी जानो भाई मैं तो अब कोई सलाह भी नहीं दे सकता।

    कंचन बहन जी, आप ब्‍लॉग की छोटी बहन हैं, माना, लेकिन भाई ये है पानी की तंगी का ज़माना, ऐसे में अगर कोई साजन घन बन कर सजनी पे बरस जाये तो मोहल्‍ले वाले थाने में रिपोर्ट लिखवा देंगे।
    ये जूतों से आरती की आपकी भावना सम्‍मानजनक है, इस भावना को बनाये रखें, कभी-कभी बहुत काम आती है।
    पंकज भाई से पूरी तरह सहमत हूँ। तीनों हज़ल बेहतरीन प्रस्‍तुति हैं हास्‍य भावों की।

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  5. पंकज जी, आदाब
    होली की ठिठोली और इनके बीच बिखरे रंग... पढ़कर बहुत आनन्द आ रहा है..
    मोहतरमा शार्दुला जी, निर्मला जी और कचंन जी को उनकी रचनाओं के लिये बधाई.
    सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं

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  6. बाप रे....

    तीनो दीदियों ने तो अपनी फ़ौज बना रखी है.

    ग़ज़ल में हज़ल की ऐसी बरसात पहले कभी नहीं देखी... हम तो बस भींगते रह गए. शे'र तो पढ़ ही नहीं पाए. फिर से पढ़ते हैं.

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  7. सही कहा आपने गुरुवार हज़ल को बुलंदियों पर पहुंचा दिया है इन आज की नटखट नारियों ने...निर्मला जी हम उम्र हैं इसलिए उनसे कहता हूँ की अपनी ये शोखी हमेशा बनाये रखना...शार्दूला और कंचन छोटी हैं इसलिए उन्हें चुलबुले बने रहने की सलाह दे रहा हूँ.... जीवन में ये सरस हास्य न हो तो फिर वो जीवन ही क्या है? सूखे गोबर के उपले जैसा ही है याने जब तक रहे बदबू फैलाते रहे और फिर जल गए.

    निर्मला जी के "निगाह उसकी मुझे है ढूंढें..., "करूँ विनय लो....,शार्दूला जी के "उठा पटक दे...." अबीर मन पे..." और कंचन के " जो खुशबू मीठी सी..." हरी चुनरिया..." ऐसे अशआर हैं जो रोज रोज नहीं लिखे जा सकते...विलक्षण हैं...इसका अर्थ ये नहीं की बाकि के इनसे कम हैं....ना...कतई नहीं...

    इस बार जैसी होली यहाँ मन रही है वैसी तो राम कसम हमने आज तक ना मनाई...सच्ची...
    नीरज

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  8. होली की शुभकामनाये, इन पंक्तियों से बेहतर क्या होगी, सजे ये होली सजे नशिश्‍तें सभी तरफ हो खुशी मुहब्बत... निर्मला अंटी को प्रणाम.

    शार्दूला दीदी, आपने खूब नियम निभाया... कि जिसकी लाठी, है भैंस उसकी... क्या तस्वीर दिखाई है. उसी तरह से बजाव सीटी, वाह वाह आज तो आपकी गिरफ्त में है सब.

    इतनी शानदार प्रस्तुति के लिए हमारे चाणक्य ओह नहीं हमारे निर्देशक सुबीर सर को दूर से सलाम. ना ना नजदीक नहीं जायेंगे. रंग/कीचड़ से बड़ा डर लगता है. ऊपर से अईसन सिहोरा रंग. किताब में पढ़े थे. आज देख भी लिए.

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  9. mananaa padega in pratibhao ko.. sachamuch hazal likhana aasaan nahi hai. aur itani achchhi hazale....arase baad parhi .teeno ko badhaiyaan..

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  10. अरे कंचन अब समझा आप इतनी बातूली क्यों है, बचपने से जो इतना मीठा मीठा, गुझिया, खुरमा खाय रहे. एगो अइसन भौजी के हमरो दरकार बा. हियाँ परदेस में त मीठा खिलाय वाला कौनो नइखे बा.

    आहा का खुशबु फाईलैलू ह.

    वो बोले भाभी गले है मिलना, वो बोली पहले नहा के आओ, बनाया गोबर का एक दरिया...


    सुन हो सब गोरा, आज के दिन बहुत बढ़िया बा, कालहे (बीती शाम) एगो खुशखबरी आईल हा. हमर भैया खातिर भाभी छेकाइल ह.


    कंचन बहना, आपके कुछ शे'रों ने बहुत प्रभावित किया. शानदार शब्द रंग है ये. बहुत बधाई आपको.

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  11. @ कर्नल निर्मला साहिबा,
    मेजर शार्दुला रिपोर्टिंग... आपके नेताई में जो धुआंधार गोबरिंग (sorry फायरिंग) हुई है उससे दुश्मनों के छक्के छूट गए हैं...जल्द ही हम उनका पूरा सफाया कर देंगे!
    थोड़ा डिले हो गवा है काहे कि "@ कप्तान कंचन" थोड़ा सेंटी हो गयीं थीं, सादी-सुदा नहीं न हैं, सो थोड़ा underestimate कर के मीठी बातें करने लगीं थीं दुसमनों से.
    अंत आते-आते सब कंट्रोल में हो गवा ... बन्दर यंत्र का प्रयोग हुई गवा है जी!
    अभी फ़िर से हम चौकी पे तैनात हैं ... बाद में रिपोर्टिंग करेंगे कि कौन से शाट्स से अधिकतम क्षति पहुंची दुसमनों को ....
    गोबर ( sorry over ) एंड आउट !

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  12. छिमा चाहते है बचुवा का जनमदिन कल नहीं है परसों है 26 को ।

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  13. हे भगवान...! गुरु जी प्लस बड़े भाई आप क्या क्या ना करवाएं....???

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  14. कर्नल, मेजर और कप्तान ने मिल कर सचमुच के मेजर और सिपाहियों की छुट्टी कर दी .... वाह क्या कमाल है आज तो .. बहुत ही निर्मल हास्य ... भोला हास्य ... इतना मधुर हास्य की हर शेर ऐसा लग रहा है की होली की आवभगत दिल से भी हो रही है .... अगर बस चले तो सभी को इन तीनो की गली में होली का आनंद लेना चाहिए ....
    नत मस्तक हैं हम भी तीनो को पढ़ कर .......

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  15. waah waah.........holi ka asli rang to ab jama hai..........poori poori taiyaari kar rakhi hai koi jaye to is gali mein.........sach kaha kisi ek ki tarif nhi kar sakte teeno ki hi ek se badhkar ek hain........kahin lal rang hai to kahin greece hai aur kahin to sajan ki preet ka rang hai to aise mein har rang samaya huaa hai to koi bachkar jayega kaise.........

    preet ki manuhar hai
    holi ka khumar hai
    bhang ka nasha hai
    prem rang bikhra hai
    phir kaise na aaye
    koi is gali mein

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  16. गुरुदेव प्रणाम

    अब आप ई पूछ काहे रहे हो की इनका भांग कौन खिलाए है अरे भांग के मामले में हमसे लदधड कौन है
    बस इ गलती होय गए की जितना हम खाईत हैं उतने इन्हौ लोगन का खिलाए दिया तो इ तो होनेय रहा

    बाकी बात रात का .

    तोहार वीनस

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  17. आज के हज़लों पर कुछ भी कहना आसान नहीं है , इन सभी इस्त्री जातियों ने तमाम चौकट और खूंटों को बेकार करके उससे काफी आगे निकल गयी हैं... जो वाकई बढ़ाई के काबिल है ... बहुत बहुत बधाई इस खुबसूरत हज़लों पर वाकई मुश्किल है लिखना , जितना आसान पढ़ने में लगता है बमुश्किल काम है लिखना.. खुद को आजमा चुका हूँ....
    निर्मला माँ ने क्या खूब कहे हैं मगर इन सभी की तस्वीरें शुभालाह ..
    मरे हंसी के लोट पोट हो रहा हूँ...इन हज़ल में एक अजीब सी नजाकत हिया जो पढ़ते वख्त महसूस की जा सकती है ... कमाल का है ... सरे है शे'र बढ़िया है ,,,
    और श्रदुला दी बाप रे आपने तो तमाम सिमावों को लाघ दिया है हज़ल में ... लगता है लगता है हज़ल सरस्वती हो ... उठा पटक दे गिरा झटक दे... क्या बात है तौबा तौबा तौबा ...
    बुरा ना मनो गुलाल के दिन... ये वाला भी ... सारे ही बानगी महारानी सारे ही ...
    और बातूनी बहना क्या बात है ये मेघ किधर से आरहे हैं.... बात पता करनी पड़ेगी ..
    कल रात आपकी आवाज़ में ये सारे अश'आर और भी जच रहे थे ...
    ये श्याम रंगी सजन के ऊपर... इसने तो कहर ही बरपा दिया है ... हरी चुनरिया और लाल टिकुली..
    श्रदुला दी और आपने देशज में हज़ल जो पेश किये है मुझे वो बात सबसे ज्यादा पसंद आयी है ... वाकई होली का रंग देशज में ही जमता है वो बात और है के मैं खुद नहीं लिख पता हूँ... हा हा हा
    जबतक चुनरी , सेनुर , टिकुली, की बात ना हो मजा नहीं आता ,,, और आप सभी ने बखूबी इसका ख़याल रखा है ...
    मगर गुरु जी मेरा सवाल ये है के इन सभी को ये भंग किसने पिला दी है .. बहुत गड़बड़ है भाई बहुत ..

    मगर तरही अपने शबाब पर है यही कहूँगा आज के इन हज़लों से .


    अर्श

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  18. मेरी फौज कहाँ गयी बहिनो आओ अब इतनी अच्छी अच्छी हज़लें कह कर कहाँ छुपी बैठी हो सब को डिनर का नौता देने आयी हूँ मेरा भुरता बन गया है और मैने उनकी बेलन से चपातियाँ बनाई हैं सभी का डिन्नर यहीं हमारी गली मे है। शर्दुला जी आपके शेरों पर क्या कहूँ -- बस सीटियाँ सुन सुन कर ही आपकी हालत समझ रही हूँ । सभी शेर बहुत पसन्द आये। ये जो मेरी कंचन है ये तो दुश्मनों से मिल गयी लगती है देखो कितने प्यार से कह रही है श्याम रंगी सजन के उपर----- इसे सम्भालो जरा नही तो हमारी गली मे हमारी ही पोल खुल जायेगी
    इसके भी सभी शेर बहुत अच्छे लगे। दोनो को होली की बहुत बहुत बधाई । बाकी सब को भी होली की बधाई इस सुबीर को तो मैं आ कर अच्छा सबक सिखाऊँगी इसने मेरा भुर्ता बनवा दिया--- हा हा बहुत अच्छा लग रहा है ये मुशायरा मेरे लिये तो ये नया रंग है जीवन का। सुबीर को बहुत बहुत आशीर्वाद

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  19. मैं भी यही कहना चाहूँगा कि तीनों बहनों को सलाम। इन्होंने मुशायरा सर्थक कर दिया है।

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  20. अरे मेजर और कर्नल साहिबानो आप लोगो का क्या है? आप लोग तो बुक हो चुकी हैं। बेलन चले चकला चले। रहेंगी तो घर में? यहाँ अजब हाल है। सब पूछ रहे हैं, पहले ये बताओ ये श्याम रंगी सजन कौन है? जितने श्याम रंगी जीजा और जिज्जी के देवर थे सब फूल के कुप्पा हो गये हैं और बाकी हमें कोसे पड़ै हैं। उधर सारे भाई लोग अलग पसोपेश में हैं। मोहलल्ले के सारे श्याम रंगी लोगो पर आफत आ गई है। यहाँ गदर मच गया है। हम सबको समझा रहे हैं भईया ये कवि की कल्पना है। हम अभी भी जोगन हैं। कोई मानै नही रहा है।

    माता जी का तो एक एक शेर पढ़ कर एक तरफ रश्क होता है, दूसरी तरफ आश्चर्य...! इस उम्र में ये शेर हम तो सोलह बरस के थे तब भी ना निकाल पाये... शाराबी नज़र अभी भी...? होगी ही ना होती तो कैसे ये जबर्दस्त शेर निकलते?

    शार्दूला दी का क्या है वो तो विदेश पहुँच गई हैं। बोतल गले में लटकाये भँगड़ा कर रही हैं। कोई मना करने वाला है नही। जीजाजी रहते हैँ टूर पर। जब आते भी हैँ तो जिसकी लाठी उसकी भैंस सुनकर कुछ कह भी नही पाते। अभी हम सीटी बजाने की प्रैक्टिस कर रहे हैं।

    और सुनिये अगर हम शुरु में सेंटी हुए तो आप अंत में, हिसाब बराबर....!

    वैसे एक बात गुरु जी से कह दें कि ये जो तीन शेर हज़ल के निकले हैं, वो बालू में से तेल निकलवाया है आपने हमसे। इतनी मेहनत की होती और कहीं तो पहाड़ से दरिया निकाल लाते।

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  21. @ कंचन की -- बालू में से तेल भी तो आप ही निकाल सकती है

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  22. मॉल दे गुलाल मोहे
    आई होली आयी रे :)

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  23. हाँ अब हम आए है...खूब धमाल मच रहा है..पहले आते तो शान पलीती होती..अब कोई नहीं आएगा सब आके जा चुके ..हाँ भंगेड़ी वीनस का का भरोसा नाहीं...भंग में चूंच होकर कब टपक पड़े.अब गुरुदेव उसे समझाओ...एक तो आज मुसीबत यह थी कि सारे खोतों का रिजर्वेशन फुल था...आर ए सी में भी सीट नहीं थी..बड़ी मुश्किल से एक मरियल सा गधा मिला जिसपर ओवर लोड होकर मैं,अर्श और गौतम भाई आए...एक ट्रेफिक वाला मिला बोला कुछ तो गधानियत रखो गधे होकर गधे पर बैठते हो..वो भी तीन सवारी..चालान कटेगा.मैंने उसे निर्मला दी के चाहता तो गधे पर चढ़ कर चला आए गली हमारी वाला पास दिखाया तो पीछा छोड़ा.आगे देखा तो वीनस तो भंग में टल्ली झूलता आया और दीदी से चप्पल टमाटर उपलों का हार छीन कर पहन लिया...फिर अबीर कीचड और तगारी गोबर गुलाब से लोट पोट होकर जबरदस्ती हमसे रगड रगड कर गले मिला...अब अर्श नाराज हुआ तो आँखे निकालने लगा.आदरणीय निर्मला दी,
    अब आपने भंग के नशे में जीजाजी को क्या क्या कह डाला...बड़े नाराज हुए है..अब उनको मनाने के लिए मैं आता हूँ..पंजाब..जब बड़े गलतियाँ करते है तो छोटों को बीच बचाव करना ही पड़ता है...एक तो उनको गल्त फेहमी आपके उस शेर से हुई जिसमे आपने अपनी नजर के शराबी होने को बताया...गजल गुजल से ज्यादा समझते नहीं है न..मैंने फोन पर बात की तो गुस्से में फट कर बोले ..त्वाडी भैन तो मेनू शाराबी केंदी ..जी..!
    मैंने उन्हें समझाया -अजी कोई गल नि..जीजाजी..भंग दे नशे में पता थोड़ी न चलता है ...और एडी बात फोन विच नहीं न करते ..मेनू त्वाडे घर आण दो जी ...शाम को पेग शेग लगाएंगे...फिर बात करेंगे.
    फिर मैंने जीजाजी के आगे आपकी तारीफ़ भी की--मैंने कहा हजल का मक्ता सुनो जीजाजी ,
    सजे ये होली सजे नशिश्ते,सभी तरफ हो ख़ुशी मोहब्बत
    मुबारकें हैं सलाम भी है,यूँ खिलखिलाए गली हमारी
    कितना सुनदर लिखा है इससे तो विशवास ही नहीं होता कि दीदी ने आपको नकली दांत,चढ़ा के चश्मा,झुकी कमर,और मजा चखाने और पिटाई ठुकाई की बातें भंग के नशे में लिखी है.
    मैंने सही कहा ना!

    उत्तर देंहटाएं
  24. आदरणीय शार्दूला दी,
    आप भी हैं न ..बस!
    भंग के नशे में क्या क्या...!
    बेलून की जगह बेलन जीजाजी को दे मारा जो तो ठीक, पर उठा पटका ,गिराना .झटकना...हद कर दी..आपने!
    फिर आपने उड़न तश्तरी को बे पेंद लोटा,कपार छोटा,छुटंक हाईट त उ प मोटा कह दिया...तो वह रोते रोते आपकी शिकायत करने जीजाजी के पास पहुँच गए...वो तो शुकर करो हम हुआ पे साथ थे तो सब मामला संभाल लिए...हमने उड़न तश्तरी को कहा दीदी ने आपको ये सब थोड़े ही कहा ...ये सब तो है ना...है ना...दीदी ने है ना...जीजाजी को कहा है...
    और उड़न तश्तरी हसने लगे....पर पता नहीं क्यों जीजाजी एक दम गुस्सा होकर तुम्हारे घर की तरफ रवाना हो गए...
    आपने कितना सुन्दर लिखा है..
    अबीर तन पे अबीर मन में अबीर चहु दिसि धरा गगन पे
    पिया पर्स बिन गहन अगन रे जल्द बुलाए गली हमार
    अब इतनी ठुकाई पिटाई की बातों के बाद पर्स की बात करोगी तब तो जीजाजी नाराज ही होंगे...
    वैसे आप टिकट भेजोगी तो मैं सिंगापुर आकर सब बात संभाल लूंगा..
    आपका छोटा भाई,
    प्रकाश

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  25. पाखी बाहू रात हमार हॉट ही अऊर रात का हम सब जगहा रहित हैं
    यतर ततर सरवतर

    का समझे

    अब ई बताऊ भांग खीलावा हम अऊर ई गलती भी मान लिया की गलती से गलती होय गए अऊर जितना हम खाईत हैं उतने सब का खिलाए दिया मगर ई तो गलत बात हाँ ना अब आपौ हर जगहा हमार ढिंढोरा पीटे लगेव

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  26. पाखी भाई जीमेल पर आइये चायटिंग की जाये :)

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  27. अब कंचन बहन के लिए,
    अब यह छोटी बहना ही है जो इतने गोबर घमासान में भी भाइयों के साथ है...
    हम्मारी एकता जिंदाबाद...एक तो वैसे ही आरती पक्ष कमजोर था...अब उनका एक सदस्य हमारे साथ है...तो आधी लड़ाई तो जीत ली गई है..
    वैसे होलिका वाला और बन्दर वाला शेर जबरदस्त है..
    हम जा रहे है गोबर के दरिया में डुबकी लगाने
    किसी की हिम्मत हो तो आये हमरे पीछे!
    गुरुदेव,
    सरकारी कार्य से बहर था तो अब देर रात आकर हाजिरी लगा रहा हूँ--आदरनीय बहने न पढ़ पाए तो उन्हें सूचित कर दिया जाए की उनका छोटा भाई उनसे नाराज जीजाजी को मनाने के लिए जमीन आसमान एक कर देगा!

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  28. पाखी बाबू आप आगे आगे चलो पीछे पीची हमहू है आपके साथ साथ

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  30. हमने तो सोचा था कि सजन के आने पर "दुलहिनी गाओ मंगलाचारा" की स्थिति होगी लेकिन यहां तो जूतों की आरती से स्वागत हो रहा है!! हे भगवान! यहां जब निर्मला माता जी तक का ये हाल है तो बाकियों का फ़िर यही हाल होना था-यदयदाचरति श्रेष्ठः...
    @निर्मला जी, बहुत सुंदर शेर निकाले हैं। सजन का तो कोई करम बाकी न रहा!!

    @शार्दुला दीदी,
    आपके कहन का तो पहले ही कायल था आपके शब्द चयन ने मन मोह लिया। कुल मिलाकर इतना प्रभावशाली है कि कोई भी सेंटी हो सकता है।

    @कंचन जी,
    वैसे तो सारी दुनिया कहती है और मेरा प्रत्यक्ष अनुभव भी यही है कानपुर की लड़कियां वाचाल होती हैं। लेकिन भावों की सुंदरता में ये पता नहीं चल पाता। वो तो दाद देनी होगी गुरू जी की कि उन्होनें कैसे इस दैवी गुण को पहचान लिया। श्यामरंगी सजन....रंगभेद की नीति का विरोध किया जाता है!!!!! यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है(अब तक कई शिकायतें आ चुकी हैं)।

    आज का तत्व चिंतन: हमने जे. पी. एस. (जूता पीड़ित समाज)के बैनर तले तमाम सदस्यों की पीड़ा के निवारण हेतु स्वामी चौपटानंद सरस्वती से संपर्क किया। उन्होनें बताया कि "अवध तहां जंह राम निवासू" के तर्ज पर "जहां भी जूते पड़े उसे सनम की गली समझो और खुश हो जाओ" फ़िर देखना दर्द भी दवा बन जायेगा।

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  31. nice कहीं नाइस दिखायी नहीं दिया तो सोचा कि इससे सटीक और क्‍या होग?

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  32. वाह दीदी जी लोग मजा आ गया...आखिर हमारा पलड़ा भारी तो होना ही चाहिए

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  33. हा हा हा....

    शार्दुला दी और कंचन की तस्वीरें देखकर....उफ़्फ़्फ़!

    और निर्मला मौम का अंदाज तो हाय रेsssss!

    गुरुदेव ये आपके ही वश की बात है...

    बाकी तीनों हज़लों ने सब हज़ल की सही तस्वीर उकेर कर रख दी है।

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