Saturday, 11 October, 2008

आवाज़ पे अंधेरी रात का सुरज का पहला विमोचन हो रहा है आप भी उसमें शामिल होकर शुभकानायें दीजिये राकेश खण्‍डेलवाल जी को ज़रूर ज़रूर पहुंचे आवाज़ पर

हिंदी साहित्‍य जगत के इतिहास में ये अनूठा मौका आया है जब किसी पुस्‍तक का विमोचन एक साथ तीन स्‍थानों पर हो रहा है । उनमें से पहले स्‍थान पर अर्थात जाल पर विमोचन हो चुका है सजीव सारथी जी ने जो काम किया है उसके लिये एक ही बात कह सकता हूं कि मैं  स्‍वयं ही अभीभूत रह गया हूं देखकर । http://podcast.hindyugm.com/2008/10/andheri-raat-ka-sooraj-vimochan-online.html यहां पर आज का पहला विमोचन हो गया है बल्कि यूं कहें कि विमोचन आप सब को वहां जाकर करना है । आज तक मैंने कभी भी अनुरोध नहीं किया कि आप कहीं पर टिप्‍पणी दें किन्‍तु आज कह रहा हूं कि राकेश जी को शुभकामनायें देने और सजीव जी के अद्भुत कार्य को सराहने के लिये एक टिप्‍पणी अवश्‍य करें ताकि आगे के लिये हम सब को हौसला मिले । वहां पर संजय पटेल जी की अनूठी आवाज़ है मोनिका हठीला की आवाज़ है रमेश जी हैं और मेरी भी आवाज़ में एक दो गीत हैं । आइये इस विमोचन में शामिल होकर अपनी भावनायें पहुचायें राकेश जी तक और सहभागी बनें इस अनूठे आयोजन में ।

6 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

Suna..Bahut umdaa aayojan kiya hai. Badhaiyan.

अंकित "सफ़र" said...

सभी लोगों को मेरा नमस्कार,
मेरी बधाई उन सभी को है जो इससे जुड़े हुए है, प्रतक्ष्य रूप से हो या अप्रतक्ष्य रूप से. उन सब को भी जिन्होंने यहाँ आके टिपण्णी दी, क्योंकि आख़िर में बधाई साहित्य को है और जीत भी साहित्य की है, जिसके हम सभी एक अंग है.

- अंकित "सफ़र"

venus kesari said...

गुरु जी प्रणाम राकेश जी की पुस्तक का विमोचन हुआ हर्ष का विषय है आवाज पर प्रस्तुत पोस्ट ने बहुत प्रभावित किया राकेश जी की कवितायें वास्तव में अति सुंदर है

venus kesari said...

गुरु जी प्रणाम
आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाये
आज जब कई दिनों के बाद हिन्दी युग्म पर गए तो पता चला की हम तो चूक गए आपको समय से जन्मदिन की शुभ कामना देने से फ़िर सोंचा अब तो जो हो गया सो हो गया मगर अब देर नही करनी चाहिए सो आ गए अपनी शुभकामनाओं का पिटारा ले कर
फ़िर से जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएं

आपका वीनस केसरी

गौतम राजरिशी said...

गुरु जी हम सीहोर वाले विमोचन की रपट सुनने को बेताब हुए जा रहे हैं.

Birds Watching Group Ratlam (M.P.) said...

pankaj ji vimochan ki badhaai
sameerji ne kavitaa padhne ke bahaane suchit kiya unhe dhanywad

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