मंगलवार, 23 सितंबर 2008

क्‍यों बना ये शेर सरताज शेर और अभी भी क्‍या कमी है इस शेर में जिसको दूर करके इसको एक मुकम्‍मल शेर बनाया जा सकता है

मैंने प्रारंभ से ही कहा है कि गज़ल का अर्थ है वज्‍न और कहन का एक अद्भुत संतुलन । हालंकि होता ये है कि वज़न संभालते हैं तो कहन चली जाती है और कहन को थामो तो वज़न चला जाता है । पर ये बात केवल प्रारंभ में ही होती है । बाद में तो धीरे धीरे दोनों का संतुलन खुद ब खुद आने लगता है । उसके लिये एक सबसे ज़रूरी चीज़ ये है कि अपने लिखें से कभी भी संतुष्‍ट मत रहो ये सोचो कि कितना घटिया लिखा है हमने और इसमें तो अभी काफी सुधार की गुंजाइश है । ग़ज़ल को लिख कर दो दिन के लिये रख दो और दो दिन बात फिर पढ़ो, आपको खुद ही उसमें दोष नज़र आने लगते हैं । ताज़ा ग़ज़ल के दोष नहीं दिखते क्‍योंकि आपने हाल में ही तो उसको बनाया है । दो दिन बाद तीन दिन बाद उसको देखो और जहां आपको लगता है कि कमजोर है वहां दुरुस्‍त करों । होता क्‍या है कि हम सिंगल स्‍ट्रोक में ग़ज़ल लिखने का प्रयास करते हैं तो मात खा जाते हैं । ग़ज़ल तो रबड़ी होती है जिसको मद्धम आंच पर धीरे धीरे पकाना होता है ।

आज हम बात करते हैं कि गौतम के शेर में क्‍या है और क्‍या नहीं है और इसके अलावा ये भी कि कौन कौन से शेर दौड़ में थे सरताज बनने के लिये ।

गौतम का जो शेर है वो कुछ इस प्रकार है

भीड़ में यूं भीड़ बनकर गर चलेगा उम्र भर

बढ़ न पायेगा कभी तू गुमशुदा हो जायेगा

शेर वजन में में भी है और काफी हद तक कहन में भी है । सामन्‍य तौर पर इसे एक अच्‍छा शेर कहा जायेगा किन्‍तु अगर गहन अध्‍ययन करें तो कुछ सुधारों की गुंजाइश दिखाई दे रही है ।  पहला तो ये कि उम्र भर  का उपयोग ठीक नहीं है । आपने उम्र का उपयोग कर लिया तो आपने समय सीमा तय करदी । उम्र भर कहने से ये अर्थ निकला कि अगले मिसरे में जो कहा जा रहा है वो उम्र भर के बाद की बात है । अब यदि मिसरे में कुछ और कहा जाता तो उम्र भर चल भी जाता मगर यहां बात हो रही है गुमशुदा होने की । जब उम्र ही ख़त्‍म हो गई तो क्‍या गुमशुदा होना । अगर आपको गुमशुदा होने की बात करनी है तो मिसरा उला में कुछ और कहना होगा । अब बात करें मिसरा सानी की अभी बिल्‍कुल भूल जायें कि यहां पर बढ़ने  से आशय कुछ और है , हम इसे आगे बढ़ने वाला ही बढ़ना मानते हैं तो हम दो विरोधाभासी बातें तो कर ही रहे हैं । और फिर ये भी कि बढ़ न पायेगा कभी तू गुमशुदा हो जायेगा केवल इस ही मिसरे को लें तो क्‍या जो लोग आगे नहीं बढ़ते वे गुमशुदा हो जाते हैं ।   तो हमें दो ही दोष दूर करने हैं । मैंने कई प्रकार से उदाहरण निकालने का प्रयास किया है

भीड़ में यूं भीड़ बनकर के अगर चलता रहा
देख लेना एक दिन तू गुमशुदा हो जायेगा

भीड़ में जो भीड़ बन कर के यूंही चलता रहा
एक दिन इस भीड़ में ही गुमशुदा हो जायेगा

भीड़ में चलता रहा गर भीड़ बन कर के यूंही
भीड़ में ही एक दिन तू गुमशुदा हो जायेगा

भीड़ बनकर के अगर चलता रहा तू भीड़ में 
एक दिन होगा यही तू गुमशुदा हो जायेगा ( ये मुझे व्‍यक्तिगत तौर पर सबसे ठीक लग रहा है )

हालंकि गौतम का शेर सामान्‍य तौर पर बिल्‍कुल ठीक है पर हम यहां कक्षाओं में असामान्‍य शायर बनने आ रहे हैं सामान्‍य शायर तो कई हैं ।

जो शेर सरताज के लिये कड़ी टक्‍कर दे रहे थे वे

दोस्‍त से हमको मिला वो भर गया मत सोचिये

जख्‍म को थोड़ा कुरेदो फिर हरा हो जायेगा

इसमें मिसरा उला कमजोर हो गया अन्‍यथा मिसरा सानी तो गजब का है । जख्‍म  शब्‍द मिसरा उला में आना चाहिये तब ही बात बनेगी ।

हर नफस रोशन किये है जिन्‍दगी को आज जो

कल वो जायेगा तो स्‍यापा इक घना हो जायेगा

आज और  कल  शब्‍दों के प्रयोग ने शेर को कमजोर कर दिया अन्‍यथा शेर यकीनन बेहतरीन था ।

इतनी गाली इतने जूते इतनी सारी बद्दुआ

इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जायेगा

मिसरा उला में जो कहना चाह रहे थे उसका मिसरा सानी के साथ जो विरोधाभास है बस वही आनंददायक है । कन्‍ट्रास्‍ट का अद्भुत नमूना है ये शेर । बस  गाली  और जूते  के स्‍थान पर कुछ और शब्‍द होने थे ( हांलकि जो हैं वो भी सटीक हैं पर बस बात ये है कि ये शेर को मजाहिया शेर बना रहे हैं और हम चाह कर भी प्रेम में इस्‍तेमाल नहीं कर सकते ) बद्दुआ शब्‍द बिल्‍कुल ठीक है । उड़नतश्‍तरी ने नई बहर पर ग़ज़ल भेज दी है बाकि लोग भी  आराम से करके भेजें अभी काफी समय है । चलिये तैयारी कीजिये और मिलते हैं बहर की कक्षा में जो आज होनी थी पर विद्यार्थियों के अनुरोध पर आज ये विश्‍लेषण कर लिया गया । 

10 टिप्‍पणियां:

  1. गुरुदेव
    बहुत अच्छी तरह से बात समझाई है आपने...ये सही है की एक मुकम्मल शेर कहने के लिए वक्त लगता है...मुझे याद है एक बार राहत इन्दोरी साहेब ने एक मुशायरे में फ़रमाया था की "मियां तुम क्या समझते हो शेर कहना चुटकियों में हो जाता है...एक नए शेर को कहने में कम से कम नौ महीने लगते हैं..." और ये भी सही कहा की हमेशा अपनी ग़ज़ल को लिख कर छोड़ दो फ़िर एक आध दिन बाद देखो तो बहुत सी कमियां नजर आने लगती हैं....आप की सीख याद रखने की कोशिश की जायेगी...इतनी खूबसूरती से पढाने का शुक्रिया...
    नीरज

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  2. मैं नीरज जी से सहमत हूं...
    सुबीर जी एक बात मानता हूं..
    कि कोई भी किसी फ़न में ताउम्र मास्टर नहीं होता.
    कईं उम्रें चाहिये साहब...
    और शायरी खुदा की देन है..
    हो जाये तो एक पल में..
    वरना ज़िन्दगी भर शेर नहीं होता..
    कभी-कभार दो-चार पंक्तिंया मैं भी जोड़ लेता हूं..
    आइयेगा...
    खुशामदीद...

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  3. सही सलाह दी है, माडसाब..ध्यान रखा जायेगा. यहाँ भी फास्टफूड नुकसानदाई..!!

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  4. ...धन्य हैं गुरू जी. इतनी अच्छी तरह से कोई नहीं सम्झा पाता.हमें तो सामान्य शायर बनना ही नहीं.अपने शिष्यों पे इस भरोसे के लिये शुक्रिया गुरूदेव.

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  5. गुरु जी प्रणाम
    इतनी गहराई से तो एक गुरु ही अपने शिष्यों को समझा सकते है
    आपकी इस पोस्ट से बहुत कुछ सीखने को मिला है

    मजाहिया शेर कैसे शेर होते हैं विस्तार से बताने का कष्ट करें
    २२२२, २२२२ रुक्न होम वर्क में बड़ी दिक्कत हो रही है शेर तो बन रहे है मगर गहराई नही आ पा रही है
    जो शेर लिखे भी है वो आपको क्या भेजू मुझे ख़ुद ही पसंद नही आ रहे है

    आपका वीनस केसरी

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  6. Vishleshan kar ke bahut achchha kiya guru ji apni apni kamiya bhi nazar me aa gai...aur ab mai khud ki baat batau.n to ye jo sher aap sab se achchha maan ra he hai.n vo mujhe khud bahut kamzor lag raha tha..lekin copy khali rakhne se behatar samjha ki kuchh likh diya jaye....!

    homework par kaam frankly speakin abhi nahi kiya hai..lekin samay par copy aap ke ghar tak pahuncha du.ngi

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  7. गुरू जी,
    इतनी बारीकी से आपने समझाया है कि मेरे जैसे मोटी बुद्धिवाले को भी बात समझ आ गई। गजल लिखने का जो फ़ार्मुला आपने सुझाया उसपर अमल करते हुये दूसरी बार संशोधन कर रहा हूँ। जल्दी ही कम्पलीट करके भेजता हूँ होमवर्क।

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  8. गुरूजी वो आपका आखिरी वाला प्रस्तावित शेर "भीड बनकर अगर चलता रहा तू भीड में,एक दिन होगा यही तू गुमशुदा हो जायेगा.."~~ जो आप इजाजत दें,तो मैं ले लूं अपनी गज़ल के लिये.

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  9. Amazing classroom
    Amazing students and amazing Learning, even I learned somethings

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  10. गुरु जी आपने देखा ?
    हमने आप से कहा की इस बार का होम वर्क बड़ा कठिन है
    और समीर जी से रहा नही गया और तरही मुशायरे से पहले ही हमारी सहायता के लिए उन्होंने ३० शेर की एक गजल बनाई और और सप्रेम ब्लॉग पर पोस्ट कर दी की लो बेटा सीखो कुछ और म्हणत कर के जल्दी से होम वर्क पूरा करो :) :)

    वीनस केसरी

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