मंगलवार, 13 मई 2008

कोई कोना भी हो सुनसान बुरा लगता है, अब बिना पेड़ के दालान बुरा लगता है , ये मिरी सोच मुझे आज कहां ले आई, घर में आया हुआ मेहमान बुरा लगता है

माड़साब वापस आ गए हैं काफी दुचे पिटें से आ रहे हैं काफी दिनों से काफी कुछ झेलने के बाद अब माड़साब की वापसी हो रही है । इस बीच कई सारे दिन बीत गए हैं और काफी कुछ गुजर चुका है । उड़नतश्‍तरी की वापसी हो चुकी है अभिनव भी कुछ दिनों के लिये भारत आकर वापस हो चुके हैं और राकेश जी भी एक दुखद प्रसंग में आकर जा चुके हैं । मतलब ये कि इस बीच हमारे शहर के सूखी नदी में काफी कुछ बह चुका है पानी को छोड़कर । पानी इसलिये नहीं क्‍योंकि पानी तो अब बातल में मिलता है । हमारे दादा कहा करते थे कि बेटा कभी भारत में दूध की नदियां कहा करती थीं । हम अपने पोतों से कहा करेंगें कि बेटा हमारे जमाने में तो पानी की नदियां कहा करतीं थीं । और वे उत्‍सुकता के साथ कहेंगें सच दादाजी पानी की नदियां और वो भी साफ पानी की नदियां । खैर तो अब तो काफी कुछ हो चुका है । माड़साब की छुट्टी के पीदे एक कारण ये भी था कि माड़साब की कक्षाओं के समय पर बिजली गुल हो जाती है और उसके कारण ये होता था कि कक्षाएं नहीं लग पाती थीं । अब तो कुछ कटौती का समय बदला है । और हमारे प्‍यारे मध्‍य प्रदेश में अब कटौती का शेड्यूल कुछ उस प्रकार है । सुब्‍ह 7 बजे से 10 बजे तक घोषित कटौती और उसके बाद फिर 10:30 से लेकर दोपहर 2 बजे तक अघौषित कटौती फिर 2:30 से लेकर शाम 6 बजे तक पुन: घोषित कटौती और उसके बाद 7 बजे से लेकर रात 12 तक अघोषित कटौती । और उसके बाच जो आधे आधे घंटे की बिजली मिल रही है उसके बारे में भी वही बात कि अगर  उस बीच कहीं लोड शेडिंग हो गई तो वो भी गई । खैर हमने पांच साल पहले एक सरकार को हटा कर दूसरी को बिठाया था क्‍योंकि वो सरकार बिजली नहीं दे पारही थी और अब शायद पांच महीने बाद इसको भी हटा देंगें कारण वही बिजली नहीं  दे पा रही है । आज माड़साब काफी बतौलेबाजी करके केवल कक्षाओं का माहौल बना रहे हैं और वो भी इसलिये क्‍योंकि हमको काफी समय हो गया है कक्षाओं में आए तो कम से कम आज से विद्यार्थियों को ये तो पता चल ही जाए कि माड़साब वापस आ गए हैं और अब कक्षाएं शुरू होने वाली हैं । हमने कक्षाओं को बहर के प्रारंभ पर छोड़ा था और हम वहीं से पुन: उठा कर शुरू करेंगें  और एकदम प्रारंभ से ही उठाएंगें । बहरों के बारे में जो कुछ भी हमने देखा था उसको फिर से देखना होगा क्‍योंकि काफी दिन हो चुके हैं और उसके बाद काफी कुछ हो चुका है । कहीं पर आपके माड़साब को ये भी कहा गया कि वे तो मूर्ख हैं और ये भी कहा गया कि वे अहंकार लेकर स्‍तंभ लिखते हैं । उसके बाद एक आत्‍मावलोकन माड़साब ने किया कि क्‍या माड़साब सचमुच ऐसे हैं । और आत्‍मावलोकन का परिणाम अभी कुछ मिला नहीं हैं । खैर माड़साब कक्षाएं प्रारंभ कर रहे हैं ऐ बात हर आमो खास को बता दी जाए । और हां एक बात और माड़साब ने भूतनाथ देखी और सच बोलें तो माड़साब को भोत मजा आया । काफी मजेदार है फिल्‍म । तो आज आप भूतनाथ देखें और कल कक्षा में आऐं जहां माड़साब आपको भूत बनाने वाले हैं । ( आज शीर्षक में जनाब इसहाक असर साहब के कुछ शेर लगे हैं ) 

3 टिप्‍पणियां:

  1. छात्र माडसाब की अहमियत तो कुछ बनने और कर गुज़रने के बाद ही जानते हैं पंकज भाई...आप तो जारी रखे...जिनका फ़ायदा हो रहा है (जैसे मै.)वे अनुगृहीत हैं आपके इस नेक काम के प्रति...

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  2. hamne batole baaji waali class le li massaab..bada maja aaya koi home work bhi nahii...he he he..!

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  3. यस सर,
    मुखड़े की पंक्तियों की बहर:
    फ़ाएलातुन मफ़ाईलुन फएलातुन फालुन (२१२२ १२२२ ११२२ २२)

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