मंगलवार, 3 नवंबर 2009

शिवना प्रकाशन सीहोर द्वारा युवा शायर अंकित सफर तथा कवियित्री मोनिका हठीला के सम्‍मान में काव्य गोष्ठी आयोजित, पढि़ये कार्यक्रम की एक चित्रमय रपट -पंकज सुबीर

दीपावली का त्‍यौहार बीत गया और एक वर्ष के बीत जाने के संकेत मिल रहे हैं । दीपावली का तरही मुशायरा बहुत अच्‍छा हुआ है तथा श्रोताओं ने खूब आनंद लिया । दादा भाई आदरणीय महावीर जी का आदेश था कि अज्ञात को सामने आना चाहिये सो उस आदेश का पालन कर रहा हूं । वैसे तो आप सब ने ही पता लगा लिया था कि वो अज्ञात कौन है लेकिन फिर भी केवल स्‍वीकृति कि वो अज्ञात आपका ये मित्र ही था।

DSC_8011

अंकित सफर का सीहोर आगमन हुआ, मैं समझता था कि जो लोग फोटो में सुंदर दिखते हैं वे  वास्‍तव में सुंदर नहीं होते, अंकित ने ये धारणा तोड़ी । अंकित सफर और मोनिका हठीला के सम्‍मान में एक गोष्‍ठी का आयोजन किया गया जिसकी रपट नीचे संलगन है । इसी बीच ज्ञात हुआ है कि परम आदरणीय श्री रवीन्‍द्र कालिया जी को आधारशिला में प्रकाशित  महुआ घटवारिन कहानी इतनी पसंद आई कि उन्‍होंने हंस में प्रकाशित श्री भारत भारद्वाज जी के आलेख के साथ उसे नया ज्ञानोदय के नवंबर अंक में प्रकाशित किया है । इस प्रकार ज्ञानोदय के लगातार दो अंकों अक्‍टूबर ( क्‍या होता है प्रेम ) तथा नवंबर ( महुआ घटवारिन ) में आपके इस मित्र को प्रकाशित होने का अवसर मिला है । और ये भी कम होता है कि किसी पत्रिका में प्रकाशित एक कहानी का पुनर्पाठ इतनी जल्‍दी किसी प्रतिष्ठित पत्रिका ने किया हो तथा अन्‍य पत्रिका में प्रकाशित समीक्षा को भी प्रकाशित किया है । नैनीताल में आयोजित समकालीन कहानी के कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध आलोचक श्रीमती साधना अग्रवाल जी ने इसी कहानी पर अपना लम्‍बा आलेख पढ़ा तथा उस पर काफी चर्चा भी हुई ।  ये सब आपकी दुआएं हैं शुभकामनाएं हैं आप सबका आभार । और अब पढि़ये रपट । ( विशेष बात ये है कि तीन शायरों ने दीपावली के तरही की ग़ज़लों का पाठ किया जिनमें अज्ञात शायर भी शामिल था । )

साहित्यिक संस्था शिवना द्वारा दीपावली मिलन समारोह का आयोजन कर एक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई । काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता सृजन साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्री बृजेश शर्मा ने की । आयोजन में स्थानीय तथा बाहर से पधारे अतिथि कवियों द्वारा काव्य पाठ किया गया ।

shivna1

स्थानीय पीसी लैब पर आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम अध्यक्ष द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रावलित करके मां सरस्वती का पूजन अर्चन किया गया । सुप्रसिध्द कवियित्री मोनिका हठीला ने मां सरस्वती की वंदना प्यार दे दुलार दे का सस्वर पाठ किया । युवा कवि तथा नई विधा के हस्ताक्षर लक्ष्मण सिंह चौकसे ने अपनी छंद मुक्त विधा की कुछ कविताओं का पाठ किया ।

PICT0011

वरिष्ठ कवि हरिओम शर्मा दाऊ ने पल पल अपलक निहारा करेंगें सहित कई गीत प्रस्तुत किये जिनको श्रोताओं ने खूब सराहा । युवा व्यंग्य कार जोरावर सिंह ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए अपनी रचना सात पीढ़ियों का इंतजाम कर लीजिये पढ़ कर दाद बटोरी । पत्रकार शैलेष तिवारी ने अपनी व्यंग्य रचना कल्लू तांगे वाला के माध्यम से यातायात पुलिस की व्यवस्था पर करारा व्यंग्य किया ।

PICT0008

सुमधुर गीतकार रमेश हठीला ने कई छंद  तथा गीत पढ़े । केश यमुना की लहर रूप तेरा ताजमहल बनाने वाले ने ली तुझसे अजंता की शकल जैसे  सुप्रसिध्द गीतों को उन्होंने सस्वर प्रस्तुत किया ।

PICT0025

युवा शायर डॉ. मोहम्म्द आज़म ने अपनी ग़ज़ल हम हथेली पर सरसों जमाते रहे साथ यूं जिंदगी का निभाते रहे  के शेरों को अत्यंत प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा ।

PICT0012

पंकज सुबीर ( अज्ञात ) ने अपनी ग़ज़ल धर्मधारी युधिष्ठिर हर इक दौर में दांव पर द्रोपदी को लगाते रहे सहित अपना गीत भारत कहानी पढ़ा ।

PICT0023

मुंबई से पधारे युवा शायर अंकित सफर ने अपनी कई सारी ग़ज़लें पढ़ कर समां बांध दिया । उनकी ग़ज़लों कुछ न कुछ मैं सीखता हूं अपनी हर इक हार से, हजारों ढूंढती नजरें कहां आखिर नजर वो इक को श्रोताओं ने खूब पसंद किया ।

PICT0020

भुज से पधारी कवियित्री मोनिका हठीला ने अपने कई मुक्तक तथा कई गीत पढ़े । यहां हर शख्स हरजाई नमक लेकर के बैठा है हरे जख्मों को भूले से किसी को मत दिखाना तुम जैसे शेरों को पसंद किया गया ।

PICT0007

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सृजन साहित्य परिषद के अध्यक्ष तथा व्यंग्यकार बृजेश शर्मा ने भी अपनी ग़ज़लों का पाठ किया । श्री शर्मा ने श्रोताओं के अनुरोध पर अपनी छंदमुक्त व्यंग्य रचनाओं का भी पाठ किया । उनकी जीवन दर्शन पर प्रस्तुत ग़ज़लों को श्रोताओं ने विशेष रूप से सराहा । अंत में आभार शिवना के सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने व्यक्त किया ।

PICT0015

कार्यक्रम में धर्मेंद्र कौशल, अब्दुल कादिर, सनी गोस्वामी, सुधीर मालवीय सहित अन्य श्रोता गण उपस्थित थे ।

DSC_8013

ग़ज़ल की कक्षा में अंकित की भौतिक उपस्थिति

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया लगा सचित्र विवरण -
    आपको ढेरों बधाई श्री पंकज भाई -
    सभी कवियों को देखकर खुशी हुई
    सादर, स स्नेह

    मंगल कामना सहित,
    - लावण्या

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही बढि़या प्रस्‍तुति, सचित्र विवरण अच्‍छा लगाख्‍ आभार

    जवाब देंहटाएं
  3. आदरणीय गुरुदेव को साहित्य के इतिहास में इस(महुवा घटवारिन) महत्वपूर्ण कहानी के द्वारा जो उपलब्धि मिली है उसके लिए हार्दिक बधाई...
    ये सब आपकी कलम का प्रताप है, लेकिन आपकी उदारता ही है जो इसमें भी हम सबकी दुआओं का असर ढूंढ रहे हैं...
    आपका शिष्य
    जय हिंद...

    जवाब देंहटाएं
  4. सुबीर भैया, आपने बिलकुल सही पहचाना कि ये सब हमारी दुआओं का ही असर है:) अब ज़रा चेक भिजवा दीजिये यहाँ:) हम आपके लिए दुआ कर-कर के इतनी मेहनत कर रहे हैं और आपने वह दिवाली वाले गुलाब जामुन तक हटा लिए हैं पोस्ट पे से :( :( कितनी गलत बात है! ब..हू..हू..हू . . .
    और ये क्या . . . "जो फोटो में सुन्दर दिखते हैं वह सुन्दर नहीं होते..." उफ्फ, कितनी गलत बात सोची आपने!!! हमारा क्या होगा फिर :) :)
    ===========
    आत्मीयता भरी कविगोष्ठी के लिए बधाईयाँ! विवरण पढ़ के अच्छा लगा.
    मोनिका जी की मधुर आवाज़ को गुरुजी के पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में भी सुना है!
    आशा है आपने भी कुछ काम-चलाऊ सुना ही दिया होगा :) :)
    ===========
    अलगी कहानियों के लिए दुआएं करने के लिए कुछ advance payment भिजवा दीजिये ना, क्योंकि मन कह रहा है कि ये कामयाबी तो बस शुरुआत है.
    ढेर सी दुआओं के साथ, दीदी

    जवाब देंहटाएं
  5. gurudev ............ आपके sheron को pahchaanna मुश्किल नहीं था ........ सच में isse पहले इतने लाजवाब sher नहीं padhne को मिले थे .......... आपकी chitrmay jhaanki इस कविगोष्ठी के साथ साथ बहुत sundar लग रही है ........ mahuaa ghatwaarin को तो इतना sammaan milna ही है ........ इस बात में किसी को कोई भी shak नहीं था ....... aankit जी और monika जी को भी bahot बहुत badhaai ...........

    जवाब देंहटाएं
  6. गुरु देव को सादर प्रणाम,
    अंकित सीहोर धाम में पहुच गया पहले से खबर तो थी मगर आयोजन इतनी धमाके दार होगी इसकी बस भनक भर ही थी... अछा हुआ आपका भ्रम टुटा के फोटोजेनिक चेहरा असल में उतना अच्छा नहीं होता शुक्र है मेरे लिए लोगों का भ्रम टूटेगा... हा हा हा ... मगर गुरु देव ग़ज़ल की सारी बारीकियां एक बार में ही आप अंकित को नहीं सिका देना नहीं तो हमारे लिए तो कुछ बचेगा ही नहीं ... हा हा हा ... यह वही वाकया है किसी फिल्म की जिसमे अभिनेता कहता है के नदी के सारे पानी से बिजली ही बना दोगे तो पानी बचेगा ही आन्ही फिर तो ... हा हा हा कमाल है ... क्या खूब रंग जमी होगी गुरु देव यही सोच के झूम रहा हूँ क्या पता कभी हम भी ऐसे मुक़द्दस मौके में शरीक हो पाएंगे के नहीं ऊपर वाला ही जानता है ... अंकित पाठशाला में सबसे छोटा है और सबसे आगे निकला के आपके सामने अपनी ग़ज़ल का पाठ किया इसने ... वेसे छोटे दुलारे होते हैं पहले सिर्फ सूना था मगर आज सही में यह बात साबित हो गयी ... मुझे लगता है कुछ लोग इससे जल रहे होंगे पता नहीं वो इंसान कहाँ मसरूफ है आजकल... उनकी टिपण्णी का इंतज़ार करूँगा ... ब्लॉग का रूप रंग अपने पुराने कलेवर में आगया खुबसूरत रंग के साथ सच बहुत अछा लग रहा है ... महुआ घटवारिन के बारे में पहले ही बहुत कुछ पढ़ चुका हूँ उत्सुकुता बढाती जा रही है और इसे और बढाता जा रहा हूँ... खूब मजा आने वाला है पढ़ के इसे ... आपने लिंक दी है मगर उसे सुरक्क्षित रख रहा हूँ उत्सुकता और बड़ा रहा हूँ एक हद तक .... सादर चरण स्पर्श गुरु देव और अंकित को बहुत बहुत बधाई आपके पास होने के लिए ... आपसे मिलने का आनंद का स्वाद चख चुका हूँ जैसे अपने प्रभु से मिल रहा हूँ उफ्फ्फ्फ़


    बस आपका
    अर्श

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह!! अग्यात जी ने अग्यात जी को ढूढ निकाला :)

    गुरुदेव, हमने भी आपको अपनी नज़्म (या नज़्म जैसी) भेजी थी.. लगता है आपको मिली नही य देर मे पहुची होगी...

    यहा उसे पोस्ट किया था और अभी भी आपके आर्शीवाद की प्रतीक्षा मे हू॥ :)

    http://pupadhyay.blogspot.com/2009/10/blog-post_23.html

    http://pupadhyay.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  8. Subeer ji
    aapko badhayi hi is sangoshti ko parichay samet pesh kiya hai. sabhi kavion se parichit hokar acha laga. meri mumbai bhi vahan shamil hui hai is baat ki alag khushi.
    ssneh
    Devi Nangrani

    जवाब देंहटाएं
  9. गुरुदेव कई बार ऐसा होता की जहाँ आप समय से पहुँचाना चाहते हैं वहीँ पहुँचने में देर हो जाती है...अब इस पोस्ट के साथ भी ये ही हुआ...देख मैंने चार दिन पहले ही ली थी लेकिन बाद में टिपण्णी करूँगा सोच कर जो वहां से लौटा तो अब वापस आया हूँ...
    खुशकिस्मत है अंकित जिसे आपका साथ मिला हम तो आपसे मिलने की आस में महीनो मुंबई रेलवे स्टेशन के चक्कर काट काट कर थक गए थे...आप ने आश्वाशन जो दिया आने का...आखिर कार "ग़ज़ब किया तेरे वादे पे ऐतबार किया..." गुनगाने हुए अपना सा मुंह ले कर घर आ कर बैठ गए...

    अंकित के आने पर जो आपने उसका स्वागत किया है और उसकी शान में गोष्ठी आयोजित की है वो सच में कहूँ मेरे लिए इर्षा का विषय है...फिर भी कलेजे पे पत्थर रख कर तालियाँ बजा रहा हूँ...चलिए कभी हमारी भी किस्मत पलटेगी...

    आपने बहुत खूब बढ़िया सचित्र वर्णन किया है अगर एक आध पंक्तियाँ हर कवि शायर की पढ़वा देते तो हम जैसे लोग धन्य हो जाते...जो नहीं पढ़ सुन पाए उसे अंकित की जबानी उसके लौटने के बाद सुन जान लेंगे...

    अंकित और आप को इस आयोजन के लिए बधाई...

    महुआ घटवारिन कहानी जैसा मैंने पहले भी कहा साहित्य की एक अमूल्य निधि है...ये आपको बहुत ऊपर तक ले जायेगी...ये तो इब्तिदा है...आगे आगे देखिये होता है क्या...इस विलक्षण कृति की सफलता का कारण आप हम जैसों की दुआओं का असर मानते हैं ये आपका बड़प्पन है...
    नीरज

    जवाब देंहटाएं
  10. अनुज सुबीर् जी आपकी इस कहानी को तो मैने पहले ही कहा था कि ये कालजयी रचना है। आभी तो ये और पत्रिकाओं मे भी छपेगी। आप भेजिये तो सही। महुआ घटवारिन जैसी कहानियां बहुत कम देखने मे मिलती हैं और ये कहानी और पंकज सुबीर साहित्यजगत के लिये उपलब्धि है । आपका साहित्यिक सफर बुलन्दियों को छूए दिल से दुया करती हूँ। अंकित ने तो जैसे आपके दिल पर अपना नाम अंकित कर दिया है बहुत सुन्दर लगा आपका ये काव्यपाठ और तस्वीरें। अंकित को भी बहुत बहुत आशीर्वाद्

    जवाब देंहटाएं
  11. पूरी रपट पढ़ने के बाद, अंकित से जल-भुन लेने के बाद, अज्ञात शायर का परिचय जान लेने के बाद...शार्दुला दी की टिप्पणी पर देर तक हँसता रहा हूँ।
    आप भी ना गुरूदेव...वो जो अंग्रेजी में कहते हैं "modesty personified" , आप पे बिल्कुल सटीक बैठता है। "महुआ घटवारिन" की महक अब तक रविन्द्र कालिया जी तक नहीं पहुँची थी तो वो खुद घाटे में थे। उन्हें तो शुक्रगुजार होना चाहिये भारत भारद्वाज जी का।

    और काव्य-गोष्ठी की एक-दो रिकार्डिंग भी सुना देते तो मजा आ जाता....

    जवाब देंहटाएं
  12. प्रणाम गुरु जी,
    आजकल नेट नहीं है इसलिए टिपण्णी नहीं दे पाया था.................
    क्या कहूं और क्या लिखूं, उलझन में हूँ इतना प्यार मिला की उसे कह पाना ही मुश्किल है फिर भी कोशिश करता हूँ.
    आपसे मिलने का सपना संजोये हुए मुझको किस्मत का साथ मिला जो काफी आँख मिचोली करती हुई आखिर मुझे भोपाल खींच लाई, ये मेरा अच्छा नसीब रहा की भोपाल आने के एक हफ्ते बाद ही आपसे साक्षात् मिलना हुआ.
    और मिलने के थोडी देर में एक झटका की साक्षात्कार देने के लिए तैयार हो जाओ, गुरु जी ने पहला ही शाट बौंदरी पार लगा दिया और उसके बाद मोनिका हठीला दीदी और मेरे आने की ख़ुशी(जबकि मुझे ज्यादा ख़ुशी थी) में कवि सम्मलेन. अब इससे ज्यादा कोई क्या सोच सकता है, एक भव्य आयोजन और प्यार की बरसात चाहे वो गुरु साब(हठीला जी) हों, दाऊ साब हो, मोनिका दीदी हों, या अन्य आदरणीय लोग हों या फिर सुन्नी, विक्की, सुधीर और सोनू हों.
    इन सब के बाद आंटी जी(माता जी), भाभी और सभी का अपनापन और इलू, परी और पंखू का मजेदार साथ हो, कभी ना भुलाये जाने वाले पल हैं.
    अर्श भाई सही में ज्ञान की पूँजी प्राप्त हो रही है आप भी जल्दी सीहोर का टिकेट ले लो, पूरे दिन भर गुरु जी से बातें कितना कुछ बता गयी और सिखा गयी हैं क्या कहूं.
    neeraj जी को सलाम, आपका माल गुरु चरणों में रख दिया है और प्रमाण भी दे दिया है.
    अभी वक़्त की कमी होने के कारन यही पे रुक रहा हूँ, जल्द ही फिर आऊंगा.

    जवाब देंहटाएं
  13. गुरूवर सादर प्रणाम,

    अंकित की किस्मत पर रश्क होना तो स्वाभाविक ही था। पर एक मुलाकात को इतने अच्छे से एक गोष्ठ में बदल देना भी सीखने की बात है।

    सादर,


    मुकेश कुमार तिवारी

    जवाब देंहटाएं
  14. rashk ho rahaa hai ab to guru dev... kya karun....???????


    arsh

    जवाब देंहटाएं
  15. चित्रों ने बड़ा खुबसूरत शमा बंधा.
    लगा की जैसे बगल की पंक्ति में बैठकर हम भी आनंद ले रहे हैं..

    जवाब देंहटाएं
  16. अंकित के तीर्थाटन की सुंदर रिपोर्ट....काश! हम भी होते!...अंकित के इस सौभाग्य पर किसे न ईर्ष्या होगी? सारे चित्र जीवंत प्रतीत हो रहे हैं। और महुआ घटवारिन के बारे में हम क्या कहें! कहानी के इतिहास में एक मील का पत्थर है जो कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। ऐसे शख्स से जुड़कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।

    जवाब देंहटाएं
  17. जहाँ भी मसरूफ थी जलाने वाले खबर वहाँ तक पहुँचा ही दे रहे थे....! अंकित को फोन मिला रही थी, लग रहा है कि डर के कारण उसने नं० बदल दिया है। अब शीघ्र ही कोई दूसरा उपाय सोचती हूँ उसे धमाकाने का...!

    गुरु जी सब कुछ पढ़ कर बस एक बात पर धन्य हो रही हूँ कि ईश्वर ने गुरु उत्तम दिया। रामायण की वो चौपाई नही याद आ रही जिसमे सबसे बड़ा सुख संतो का साथ बताया गया है। इस मानक पर १०० प्रतिशत सुखी इंसानो में मेरी गिनती की जा सकती है...!

    जवाब देंहटाएं
  18. सीहोर का कार्यकृम बेहतर रहा।

    जवाब देंहटाएं