गुरुवार, 5 मार्च 2009

समीर लाल जी के बिखरे मोती आ रहे हैं, होली को लेकर जुटे हैं हठीला जी उपाधियां देने में, तरही को लेकर जबरदस्‍त रचनाएं मिली हैं और हमारी दिल्‍ली की तैयारियां ।

होली तो आ ही गई है और वातावरण में  होली का उल्‍लास छाने लगा है । हम कवियों के लिये तो वैसे भी होली का अर्थ होता है कविता कविता और कविता । तो इस बार भी ग़ज़ल की कक्षाओं में होली को लेकर विशेष तैयारियां चल रहीं हैं । श्री रमेश हठीला जी की अपनी तैयारियां चल रहीं हैं तो इधर लोग भी दिये गये मिसरे पर उत्‍साह पूर्वक ग़ज़लें पेल रहे हैं । ऐसी पेल रहे हैं कि अपनी तो होली सप्‍ताह भर पहले ही मन रही है ।

पहले बात करते हैं समीर लाल जी की पुस्‍तक बिखरे मोती  के बारे में । समीर लाल जी जब पिछली बार बार भारत आये थे तब वे जनवरी में सीहोर भी आये थे और तब ही ये तय हुआ था कि उनकी पुस्‍तक शिवना प्रकाशन से आयेगी । किन्‍तु उसके बाद हिन्‍ुदस्‍तान की भांति भांति की नदियों में भांति भांति का पानी बह गया और पुस्‍तक पर काम चलता रहा । समीर जी अब एक बार फिर भारत में हैं तथा अब उस पुस्‍तक पर फिर काम प्रारंभ हुआ है । पुस्‍तक अब प्रिंट में जा चुकी है । संभवत: होली के पश्‍चात उसका विमोचन होगा । संग्रह में सबसे पहले तो समस्‍या ये आई कि समीर जी के कई रूप हैं और उस हिसाब से कई सारी कविताएं हैं तो क्‍या किया जाये । किन्‍तु जैसा होता है कि जब कोई राह नहीं सूझे तो बुजुर्गों से सलाह लेना चहिये अत: वयोवृद्ध कवि श्रद्धेय नारायण कासट जी से विमर्श किया गया और उनकी ही सलाह थी कि समीर जी का वो पक्ष इस संग्रह से सामने आये जिसको उन्‍होंने छुपा रखा है । श्री कासट जी का कहना था कि हास्‍य सुनने की चीज होता है जबकि गंभीर काव्‍य पढ़ने की । उनकी आज्ञा को समीर लाल जी ने भी शिरोधार्य किया और इस संग्रह में समीर जी का गंभीर रूप ही सामने आयेगा । पुस्‍तक का बहुत बेहतरीन कवर पृष्‍ठ श्री संजय बैंगाणी जी और श्री पंकज बैंगाणी जी ने छबी मीडिया द्वारा बनाया है जिसके बारे में ये ही कहा जा सकता है अद्भुत । शीघ्र ही समीर जी के गीतों, मुक्‍तकों, छंदमुक्‍त कविताओं, क्षणिकाओं तथा ग़ज़लों से सजी ये पुस्‍तक आपके हाथों में होगी बस थोड़ा सा इंतेजार ।

काफी लोगों को मजेदार उपाधियां देने का काम हठीला जी कर चुके हैं । मैं तो पूर्व से ही आनंद ले रहा हूं । दरअसल में हमारे यहां होली पर दुमदार दोहों के रूप में उपाधियां दी जाती है । दुमदार दोहे एक अलग विधा है हास्‍य की जिसमें दोहे के बाद दो छोटी छोटी दुमें भी होती हैं । जिनको जब कवि पढ़ता है तो श्रोता ठेके (ठेके का मतलब मुंह से अहा कहना)  लगाते हैं । जैसे पांच साल पहले जब मैंने एक दल विशेष के लिये प्रचार सामग्री बनाने में सहयोग दिया था तो हठीला जी ने अगली होली पर मुझे उपाधि दी थी

हवा देखकर आप भी बदल गये गुलफाम

सत्‍ता रज में लोट कर हो गये ललित ललाम

न बेंदा ना बेंदी का ( अहा)
ये लोटा बिन पैंदी का ( अहा)

एक अनुरोध है कि हम तो अपने हिसाब से ब्‍लाग के जितने कवियों को जानते हैं उनको ले रहे हैं । किन्‍तु यदि आप अपने को इस सूचि में शामिल करना चाहते हैं तो अपना परिचय भेज दें । रविवार को ये उपाधियां प्रदान की जायेंगीं जिनको आप लोग सोमवार को पढ़ सकेंगें । अत: यदि शनिवार तक अपना या किसी अन्‍य कवि का परिचय भेजना चाहें तो भेज दें ।

अब बात तरही मुशायरे की उसको लेकर जबरदस्‍त चीजें मिल रही हैं । राकेश खण्‍डेलवाल जी ने तो एक ऐसी नज्‍म उस मिसरे पर भेजी है कि उसे पढ़कर मैंने उनको एक ही मेल भेजी है राकेश जी आप तो मूल रूप से हास्‍य के कवि है आप कहां ये श्रंगार वृंगार में पड़ गये । तिस पर नीरज जी के उफ उफ शेर योगेंद्र जी की ग़ज़ल । मेरी तो होली मन ही गई है होली से पहले ही । जो लोग अपनी ग़ज़लें या नज्‍म नहीं भेज पायें हैं तुरंत भेजें । होली पास है तरही मुशायरा मंगलवार को होगा ।

उधर दिल्‍ली में ज्ञानपीठ का कार्यक्रम 14 को है सो वहां जाने की तैयारियां भी चल रहीं हैं । जैसी सूचना है कि 14 मार्च को दिल्‍ली में हिंदी भवन में ज्ञानपीठ के कार्यक्रम में पुस्‍तक का विमोचन होगा तथा नवलेखन पुरुस्‍कार प्रदान किये जायेंगें । 13 की रात्रि को पहुंचना है तथा 15 की सुबह भागना है । सो उसकी भी तैया‍रियां  चल रहीं हैं ।

ग़ज़ल का एब : आज का एब ये है कि ग़ज़ल में कोई भी एक पंक्ति यदि इस प्रकार का उच्‍चारण कर रही हो जो द्विअर्थी हो तो उसे एब माना जाता है । कई बार होता है कि हम मिसरे का आधा हिस्‍सा ऐसा बनाते हैं तो हमको तो पता ही नहीं चलता पर वो एक दूसरा अर्थ भी पैदा करता है । ये बात अलग है कि मिसरे के दूसरे हिस्‍से को पढ़ने पर वो अर्थ स्‍वत: ही समाप्‍त हो जाता है । किन्‍तु जब तक आप दूसरा हिस्‍सा नहीं पढ़ें तब तक तो वो ग़लत अर्थ पैदा कर ही रहा है । इसका उदाहरण मैं यहां नहीं दे सकता मर्यादाओं के चलते । बस ये सम्‍झ  लें कि एक मिसरा है

उजाले अपनी यादों के, हमारे साथ रहने दो

इसमें पहली अर्द्धाली है ''उजाले अपनी यादों के'' । यहां पर आप रुक कर फिर पढ़ते हैं ''हमारे साथ रहने दो'' तो यदि पहली अर्द्धाली द्विअर्थी है तो आपके दूसरी अर्द्धाली पढ़ने तक तो लोग संशय में आ ही जायेंगे । तो इस बात का ध्‍यान रखें । मैं उदाहरण नहीं दे पा रहा इसलिये जानता हूं कि कुछ लोगों को समझने में दिक्‍क्‍त आयेगी ।

चलिये आज की तस्‍वीर जो पिछली होली की मेरी स्‍वयं की है हठीला जी के निवास के बाहर जहां मेरे ही कम्‍प्‍यूटर के छात्रों ने मेरा ये हाल किया था ।

Image(309)

13 टिप्‍पणियां:

  1. समीर जो को बहुट बहुट बधाइयाँ और आप को भी बधाई उनकी पुस्तक पर. होली पर लगता है बहुट कुछ होने वाला है, पता नही रहस्य से परदा कब हटेगा

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  2. समीरजी हमारे प्रिय लेखक हैं और उन्हें सिर्फ ब्लॉग पर पढने का ही सौभाग्य प्राप्त हुआ है...उनके बारे में और जानने में उनकी पुस्तक सहायक होगी सो उसके छपने का बेताबी से इन्तेजार है...
    मुशायरे के बारे में बहुत उत्सुकता जगा दी है आपने...कब आएगा मंगलवार?
    फोटो में सच आप बहुत जँच रहे हैं...चश्मे बद्दूर....
    आपको दिल्ली यात्रा की अग्रिम शुभ कामनाएं...

    नीरज

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  3. गुरु जी सादरं प्रणाम,

    समीर जी को उनके पुस्तक के लिए जो के प्रिंट के लिए गई है ढेरो बधाई उनके हास्य को तो जानते है सभी ब्लॉग के जरिये.. पुस्तक से उनके गंभीर चेहरा सामने आएगा..... तरही मुशायरे के लिए इंतज़ार कर रहा हूँ ... और आपके देल्ली आगमन का भी .... आप ब्यस्त होंगे मुझे पता है मगर आप से मिलना तो है ये चाहे जो हो...

    आपका
    अर्श

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  4. मास्साब!! नजर न लग जाये-हमें साथ बैठा कर फोटू खिंचवाया करो, नजर नहीं लगेगी.

    आभार इस सूचना को प्रसारित करने का.

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  5. मेरी लिये उत्सव का आनंद कई गुना बढ़ गया है। इतनी अच्छी-अच्छी खबरें--गुरूजी को नवलेखन पुरस्कार, बिखरे मोती, तरही मुशायरा, दुमदार दोहे.......और क्या कहने को शेष रहता है?

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  6. वाह गुरू देव क्या लग रहे हैं आप....नज्र न लग जाये किसी की राहों में...ओहो किसी की ब्लौगो में
    और समीर जी के किताब की अग्रीम बुकिंग मेरे नाम की कर दें अभी से...
    आज की एब की कुछ बातें जो आप कह कर भी नहीं कह रहे थोड़ा समझ रहा हूँ
    तुफ़ैल जी ने इसी शेर पर बड़ी प्यारी{?} बातें लिखी थी एक बार
    और हम तो आपकी जबरदस्त हास्य-कथा के झिंझौटीपुर में वीरू और बसंती के संग श्री छैल बिहारी सक्सेना की आँखों से रंग गये, गुरूदेव !!!!

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  7. गुरु जी प्रणाम
    समीर जी को हार्दिक बधाइयाँ आपकी पुस्तक का तो इंतज़ार है ही अब समीर जी की पुस्तक का विमोचन जल्दी से करवाइए

    गजल का एब विषय पर कही आपकी बात से थोडा उलझ गया हूँ क्योकि हर रुक्न के बाद थोडा अन्तराल हो ही जाता है मुझे तो आपकी बात का यही मतलब समझ में आया की पहले के रुक्नों में ऐसी बात न लिखो जो श्रोता को उलझा दे और वह मुख्य बात से भटक जाए

    (क्या आप यही कहना चाहते है ???)


    दुमदार दोहों का भी बेसब्री से इन्तजार रहेगा

    फोटो मस्त

    आपका वीनस केसरी

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  8. समीर भाई की पुस्तक के बारे मेँ सूचना बहुत बढिया लगी और होली की तस्वीर रँगीन !

    -लावण्या

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  9. ham sameer ji ki pustak ka intazaar kar rahe hai.n

    aur aap ko shubhkamanae.n de rahe hai, delhi gaman par

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  10. aadarniya guru ji , shri pankaj ji ko pranaam,

    aapko , sabse pahle purushkar ki badhai , thoda late ho gaya ,tour ki wajah se , maafi chahunga..

    aapo der saari shubkaamnayen..

    main bhi kuch likha hai , jarur padhiyenga pls : www.poemsofvijay.blogspot.com

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  11. शिवना प्रकाशन की निरन्तर होती साहित्यिक प्रगति के लिये अनन्य शुभकामनायें और होली के अवसर पर आप एवं समस्त शोहराओं को अग्रिम बधाई.

    अब समीर जी के बाद अगली पुस्तक शिवना प्रकाशन से नीरज जी की आयेगी न ? उनकी गज़लें अब तारीफ़ की मोहताज नहीं

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  12. बधाई हो समीरलालजी को उनकी किताब छपने के लिये। इंतजार है लोकार्पण का!

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