शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

कल के सारे शायरों ने समां बांध दिया दीपावली को साकार कर दिया, आज कंचन चौहान, अभिनव शुक्‍ला, गौतम राजरिशी, रविकांत पांडेय, प्रकाश अर्श तथा अंकित सफर की ग़ज़लें ।

कल से ही तेज बुखार ने पकड़ लिया है । उसीके कारण रात भर का जागरण भी हो गया । किन्‍तु आज की पोस्‍ट लगाने आना ही था सो उठकर आफिस में आया हूं ताकि आज की पोस्‍ट लगा सकूं । कल के पांचों ही शायर धमाका करके गये हैं और आज तो छ: रचनाकार हैं । ये सारे रचनाकार ग़ज़ल की पाठशाला के नियमित विद्यार्थी हैं । पिछले दिनों अभिनव की भारत यात्रा के दौरान ये सब प्रकाश के दिल्‍ली स्थित निवास पर इकट्ठे हुए थे तब का ये फोटो देखिये और फिर सुनिये इन सबकी ग़ज़लें ।

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कंचन, अंकित, गौतम, रवि, अभिनव और प्रकाश

दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें

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अंकित सफर

साथ बीते वो लम्हें सताते रहे.
दूर जब तुम गए याद आते रहे.
इक बनावट हँसी ओढ़ ली हमने भी
दर्द जो दिल में था वो छिपाते रहे.
आसमाँ छूने का ख्‍वाब दिल में सजा
हम पतेंगे ज़मीं से उडाते रहे.
दांव पेंचों से वाकिफ नहीं चुगने के
वो परिंदे नए चहचहाते रहे.
खौफ हासिल हुआ हादसों से मुझे
ख्वाब कुछ ख्वाब में आ डराते रहे.
एक शरारत दुकां ने करी उससे यूँ
कुछ खिलोने उसे ही बुलाते रहे.
आंधियां हौसलों को डिगा ना सकी
दीप जलते रहे झिलमिलाते रहे

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प्रकाश अर्श

दीप जलते रहे झील मिलाते रहे
हम अजाबों से इनको बचाते रहे
वो हमें इस तरह आजमाते रहे
शर्त हमसे लगा, हार जाते रहे
उंगलियाँ इसलिये खुबसूरत हुई
प्यार का नाम लिखते मिटाते रहे
मिल गया है उन्‍हें पैर में घाव लो
फूल कदमों तले जो दबाते रहे
हम बहुत दूर तक लो कदम से कदम
फासले दुश्मनी के मिटाते रहे
मखमली बिस्तरें देख घबरा गए
रोड पर जो दरी को बिछाते रहे
खींच दूँ और चादर तो फट जायेगी
पेट पैरो में अब तक छुपाते रहे
अर्श चिठ्ठी नहीं देता है डाकिया
टकटकी द्वार पर हम लगाते रहे

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रविकांत पांडेय

चोट पर चोट यूं दिल पे खाते रहे
आदतन हम मगर मुस्कुराते रहे
भूख लाई उसे गांव से शहर में
पर उसे नीम बरगद बुलाते रहे
जाने क्यूं देखकर आइना देर तक
आप ही आप से वो लजाते रहे
आइये आइये आइये आइये
करके सज़दे उन्हे हम बुलाते रहे
नींद आई नहीं रात भर याद के
दीप जलते रहे,
झिलमिलाते रहे
चांदनी रात में प्रीत की वो कथा
सिन्धु-तट पर हमें वो सुनाते रहे
दर्द से छटपटाते रहे मेमने
भेंड़िये नोचकर जिस्म खाते रहे
राम का नाम लेकर वो बगुला-भगत
मछलियों को निशाना बनाते रहे
जब भी बिजली,
सड़क की हुई बात तो
बीरबल की वो खिचड़ी पकाते रहे
हमने खोजा बहुत आदमी ना मिला
कुर्सियां सिर्फ़ शैतान पाते रहे

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कंचन चौहान

आप आये हैं तो आप आते रहें,

जिससे जी भर के हम मुस्कुराते रहें।

आप बन कर के साधन मेरी साधना,

साध्य तक साध कर के सुनाते रहें।

मेरे, तेरे नही, सब के आँगन में ही,

दीप जलते रहें, झिलमिलाते रहें।

लक्षमी बन के धन, घर में बरसे तो मन,

गणपती ही हमारा चलाते रहें।

ऐसी कोई हवा, अब बहा दे खुदा,

प्रेम देते रहें, प्रेम पाते रहें।

आपके हाथ में है क़लम तो ज़रा,

वीर गाथा भी सबको सुनाते रहें।

लाइये, लाइये दिल हमारा हमें,

चीज़ ये वो नही जो लुटाते रहें।

दिल में सागर बहुत,आँख में घन बहुत,

उम्र भर रोयेंगे, वो रुलाते रहें।

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गौतम राजरिशी

रात भर चाँद को यूँ रिझाते रहे

उनके हाथों का कंगन घुमाते रहे

इक विरह की अगन में सुलगते बदन

करवटों में ही मल्हार गाते रहे

टीस, आवारगी, रतजगे, बेबसी

नाम कर मेरे, वो मुस्कुराते रहे

शेर जुड़ते गये, इक गज़ल बन गयी

काफ़िया, काफ़िया वो लुभाते रहे

टौफियाँ, कुल्फियाँ, कौफी के जायके

बारहा तुम हमें याद आते रहे

कोहरे से लिपट कर धुँआ जब उठा

कमरे में सिमटे दिन थरथराते रहे

मैं पिघलता रहा मोम-सा उम्र भर

इक सिरे से मुझे वो जलाते रहे

जब से यादें तेरी रौशनाई बनीं

शेर सारे मेरे जगमगाते रहे

बात तेरी, तेरा जिक्र, तेरा ही नाम

इक सदी से ये हम गुनगुनाते रहे

सुब्‍ह के स्टोव पर चाय जब खौल उठी

ऊँघते बिस्तरे कुनमुनाते रहे

उनके आने के वादे पे ही रात भर

दीप जलते रहे, झिलमिलाते रहे

Dev Deepavali

अभिनव शुक्‍ला

दोस्ती अपने दिल से निभाते रहे,
प्यार करते रहे चोट खाते रहे,
हादसा, हादसा, हादसा, हादसा,
लोग आते रहे, लोग जाते रहे,
क्या हुआ, क्यों हुआ, जो हुआ, सो हुआ,
बात सुनते रहे, कंपकंपाते रहे,
मैं नदी में खड़ा गुनगुनाता रहा,
दीप जलते रहे, झिलमिलाते रहे,
चांदनी घर की छत पर बिखर सी गयी,
जो अँधेरे थे वो मुंह छुपाते रहे.

आनंद आ गया सभी ने अद्भुत शेर निकाले हैं । आंधियां हौसलों को डिगा ना सकी, प्यार का नाम लिखते मिटाते रहे, आइये आइये आइये आइये, टीस, आवारगी, रतजगे, बेबसी, मैं नदी में खड़ा गुनगुनाता रहा ये शेर लम्‍बे चलने वाले शेर हैं । आनंद लीजिये इस नयी पीढ़ी का जो साहित्‍य की मशाल को इस इरादे से थामने आ गई है कि अब अंधेरा न होने देंगें । बुखार फिर से बढ़ रहा है सो मुझे आज्ञा दीजिये । कल मिलते हैं दो अलग अलग अंकों के साथ ।

28 टिप्‍पणियां:

  1. शाम को लौटता हूँ , अभी जल्दी जल्दी उपस्थिति दर्ज कर रहा हूँ , आपकी तबियत खराब है और आप सुबह के चार बजे से नेट पर काम कर रहे हैं.... ऐसा ना करें गुरु देव दिवाली की ढेरो बधाईयाँ और शुभकामनाएं...

    अर्श

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  2. इस मुशयरे में सबने रंग जमाए।
    दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
    -------------------------
    आइए हम पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।

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  3. शिष्‍यगणों की इस मंडली के लिये विशेष त्‍वरित टिप्‍पणी:
    पाठशाला की 'तरही' सजाते रहें,
    शेर लिखते रहें औ सुनाते रहें।

    अच्‍छे शेर सामने आ रहे हैं। कहीं कहीं 'रहे' और 'रहें' के उपयोग का अंतर कठिनाई पैदा कर रहा है और यही वो पेंच था तरही के वैकल्पिक मिसरों में समझ में आ रहा था कि तंग कर सकता है। 'रहे' भूतकाल में उपयोग होना है और 'रहें' Present Continuous में, इसे समझने में त्रुटि हुई और व्‍याकरणीय खामी आई, इस बात पर विशेष ध्‍यान आवश्‍यक है।
    तिलक राज कपूर

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  4. प्रणाम गुरु जी,
    आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, ऐसे काम नहीं चलने वाला........पहले आप अपना ध्यान रखें फिर और काम.
    @अर्श जी "उंगलियाँ इसलिए ......." शेर बेहद खूबसूरत है.
    @रविकांत जी का शेर "भूख लाई.........." एक मजबूरी को लफ्जों का लिबास देकर हमारे सामने खडा कर रहा है. बहुत उम्दा शेर है.
    @कंचन दीदी का शेर जो मुझे बेहद पसंद आया वो है "तेरे मेरे नहीं........."
    @गौतम जी का शेर "कोहरे से लिपट कर............" जहाँ वो अभी हैं उस जगह की तस्वीर सामने ला रहा है, और वो शेर "मैं पिघलता रहा............." क्या कहना और जो शेर अपना अलग एहसास करा रहा है इन खूबसूरत शेरों में वो है "सुबह के स्टोव पे............."
    @अभिनव जी का शेर "मैं नदी में ................." बहुत उम्दा बन पड़ा है.
    सभी को पढ़कर एक आनंदमय अनुभूति हो रही है.

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  5. सब से पहले तो यही समझ नहीं आ रहा कि किस किस शायर की तारीफ करूँ हर एक ने एक से बढ कर एक शेर लिखा है। कंचन जी अभिनव शुक्लाजी,गौतमराज रिशी जी, रवीकान्त जी,प्रकाश अर्श और अन्कित सफर जी को बहुत बहुत बधाई हर शेर लाजवाब लगा इस लोये किसी एक एक शेर की तारीफ करनी सही नहीं होगी। मगर गौतम राज रिशी जी को विशेष तौर पर बधाई दूँगी कि अस्पताल के बिस्तर पर पडे हुये भी उनके हौसले इतने बुलन्द हैं कि जगमगाती हुई गज़ल ले कर हाज़िर हो गये। अर्श के लिये भी क्यों कि बहुत दिन बाद वो सुन्दर प्यारी सी गज़ल के साथ रूबरु हुया है। बहुत बहुत शुभकामनायें और सब को दीपावली मुबारक हो। आपकी कर्मनिष्ठा को सलाम कि इतनी तबीयत खराब होने के बावज़ूद आप ये मुशायरा ले कर हज़िर हुये। आपकी सेहत के लिये दुआ करती हूँ बधाई

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  6. Deewali ki bahut2 subhkamna aap sabhi ko ...Deewali ke diye ki tarah aap sabhi ki rachna hamre dil me roshni kar gayi waqai bahut hi khubsurat

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  8. गुरुदेव
    इसे कहते हैं खीर में कंकर आना . भला ये भी कोई बात हुई की ठीक दिवाली के दिन आप बीमार पढ़ गए...बहुत गलत बात है...ऐसे थोड़े ही ना होता है....दो तीन रुक जाते भाई दोज के बाद एक आध दिन बीमार पढ़ जाते इतनी जल्दी क्या थी? आपको भी गलत समय पर गलत काम करने की आदत पढ़ गयी है...चलिए बहुत हुआ अब जल्द से ठीक होने की सूचना दीजिये ताकि तसल्ली हो और आनंद वर्षा हो.
    आपकी बीमारी की खबर के बीच इन छै फनकारों को पढना विचित्र अनुभव है. सब ने कमाल के शेर कहें हैं. ये सभी शायर मेरे बहुत प्रिय हैं इन्हें पढ़ कर मुझे बहुत अच्छा लगता है. ये युवा ग़ज़लकार इतने अच्छे और सार्थक शेर कह जाते हैं की क्या कहूँ...मन गद गद हो जाता है ...लगता है ग़ज़ल अभी सुरक्षित हाथों में है और चिंता की कोई बात नहीं, साथ ही ये आशा भी बचती है की युवाओं में अभी प्रतिभा कूट कूट कर भरी हुई है और वो सही पथ पर अग्रसर हैं...पुरानी पीढी के लोग उन्हें लेकर बेकार चिंतित ना हों.

    आपका ये तरही मुशायरा जिस मुकाम पर धीरे धीरे पहुँच रहा है उसका अंदाजा पहले ही हो गया था अब सामने होता दिख रहा है. अगली खेप के शायरों का इंतज़ार है. आप को और तरही के सभी शायरों,पाठकों को दीपावली की ढेरों शुभ कामनाएं .

    नीरज

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  9. गुरूदेव, आपका हठ और आपकी निष्ठा को प्रणाम। मैं यूं ही नहीं कहता कि "सीहोर" मेरे लिये समस्त तीर्थ-स्थलों से भी ऊपर वाला तीर्थ-स्थल है। वैसे आपकी इस बात से दिल को एकदम अपना जैसा कुछ लगा कि ऐसे तमाम बुखारों में आप नियमित दिनचर्या की तरह सुबह उठ कर स्नान करते ही करते हैं और अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा शारीरिक श्रम करते हैं।

    फिर भी शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की शुभकामनायें...

    अब आज के शायर...आहहहा! क्या तस्वीर आयी है हमारी। मान गये आपको भी गुरूदेव...हम सब इकट्ठे कितने अच्छे लग रहे हैं...!!! वैसे किसी को अंकित से कुछ शिकायत है...

    अंक्त का हुस्ने-मतला कहर बरपा रहा है। और "आसमां छूने का ख्वाब..." वाला शेर एकदम आसमान से ही उतर कर आया है मानो। जलन पैदा करने वाला शेर कि पढ़कर जिसे लगे कि ये मैंने क्यों नहीं लिखा। वो "इक शरारत दुकां.." वाला भी बिल्कुल अनूठा शेर है।
    @अंकित, दिल से बधाई एक बेहतरीन ग़ज़ल के लिये...

    प्रकाश को तो व्यक्तिगत रूप से उसके अच्छे शेरों के लिये बधाई दे चुका हूँ मैं। ऊँगलियों के खूबसूरत होने की वजह जान कर अचंभा हुआ। अगली बार उससे मिलने पर उसकी ऊँगलियां जरूर देखूंगा गौर से। "खींच दूं चादर.." वाला शेर भी जबरदस्त बना है।

    और रवि तो हमारा तमाम तारिफ़ो से परे लिखता ही है हर हमेशा। गुरूजी, आपके सब छात्रों में मुझे सबसे ज्यादा इससे ही ईर्ष्या होती है। "भूख लाई.." वाला शेर और फिर "हमने खोजा बहुत आदमी.." वाला शेर बहुत सुंदर बना है। लेकिन " चांदनी रात में.." मेरा सर्वाधिक पसंदीदा है। शायद सिंधु के जिक्र से शेर एकदम अलग-सा खड़ा दिखता है।

    कंचन की पूरी ग़ज़ल यूं तो पहले ही सुन चुका था पूरी की पूरी और एक-दो शेर अधिकार से खारिज पर भी कर दिया था मैंने कि खामखां वो गुरूजी के डंडे ना खाये। अब बहन की इतनी चिंता तो करनी ही पड़ती ही है ना। उसका ये "लाइये, लाइये.." वाला शेर जगह-जगह सुनाने वाला शेर है विशेष कर ल्ड़कियों को सुनाने वाला। यहाँ एक-दो नर्सॊं पर ट्राय मार चुका हूँ। परिणाम काफी सुखद रहा है। संजीता पे भी खूब असर किया है वैसे इस शेर ने।
    @शुक्रिया कंचन !

    मेरी भी ग़ज़ल अच्छी ही बनी है, गुरूदेव। क्या कहते हैं आप?

    शुक्ल जी को देखकर बड़ी प्रसन्नता हुई। तस्वीर में नया नवेला पितृत्व खूब झलक रहा है। "हादसा" का बड़ा अच्छा इस्तेमाल हुआ है उनके दूसरे शेर में। "मैं नदी में खड़ा वाला.." एकदम अनूठा कथन लिये है।

    ...और अंत में गुरूदेव, ये इस साइड-बार में रानी मुखर्जी के सर के ऊपर वो छूटती आतिशबाजी पर ध्यान अभी गय। मैं तो हैरान रह गया एक बारगी फिर से ब्लौग की इस सज्जा पर। कैसे कर लेते हैं आप इतना कुछ। वो "हरफ़नमौला" जो शब्द है एक, आपके समक्ष आकर अपना नया विशेषण ढूंढ़ने को विवश हो जाता है कमबख्त।

    अपना ख्याल रखिये, आप बहुत स्पेशल हैं...

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  10. @ अंकित,
    वो तुमने जो मेरे उस "कोहरे से लिपट कर धुंआ जब उठा" वाले शेर की तारीफ़ की है उसका शुक्रिया। सब तो यही समझेंगे कि ये शेर इधर वादी के मौसम पर केंद्र्ति है। लेकिन अभी इधर ये मौसम शुरू हुआ नहीं है।
    गुरूजी की एक बहुत ही लाजवाब कहानी है "अँधेरे का गणित"। ये शेर उस कहानी का संक्षेप है। मिस्रा-ऊला के बिंब उसी कहानी से उठाये गये हैं और भाव का इशारा भी मेरे शेर का उसी कहानी की तरफ है।
    ये कहानी अपने विषय-वस्तु और प्रस्तुतिकरण को लेकर एकदम अलग-सा है।

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  11. ANANYA,MOHD.AAZAM,TILAK RAJ KAPOOR
    PRAKASH SAAKHEE,MUKESH TIWARI,PARUL
    KANCHAN CHOHAAN,ABHINAV SHUKLA,
    GAUTAM RAJRISHI,RAVIKAANT PANDEY,
    PRAKASH ARSH AUR ANKIT SABHKEE
    GAZALEN MAIN BADE ITMINAAN SE PADH
    GAYAA HOON.MAZAA AA GAYAA HAI.
    SABKE SHER UMDAA HAIN.KOEE KISEE SE
    KAM NAHIN .MUJHE AESA LAGTA HAI KI
    EK-EK SHER DEEP KEE TARAH JHILMIL-
    JHILMIL KAR RAHAA HAI.APNAA-APNAA
    AALOK FAILAATEE GAZALON KE RACHNA-
    KAARON KO MERAA NAMAN.
    DO SHAYRON NE " SAZDA"
    LAFZ KAA ISTEMAAL KIYAA HAI.MEREE
    JAANKAAREE KE MUTAABIK YE LAFZ SIRF
    KHUDAA KE LIYE AATAA HAI.
    DEEWALEE SABKO MUBAARAK
    HO.
    PANKAJ SUBEER JEE KEE POORN
    SWASTHTA KE LIYE ISHWAR SE PRARTHNA
    HAI.

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  12. " RAHE" KAA PRAYOG EK VACHAN SHABD
    KE LIYE HOTA HAI AUR " RAHEN" KAA
    PRAYOG BAHUVACHAN SHABD KE LIYE.
    JAESE--
    TARA JHILMILATA RAHE
    TARE JHILMILAATE RAHEN
    " RAHAA" BHOOTKAAL MEIN PRAYUKT
    HOTAA HAI.JAESE-
    TARA JHILMILATA RAHAA.

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  13. आदरणीय गुरूदेव,

    सादर नमन!


    आज की गज़लें पढ़के कुछ नशा छा गया है। मेरे पास किसी एक की भी तारीफ के लिये शब्द नही हैं। मैं पहली बार शामिल हुआ हूँ, तो जाहिर है कि कुछ नये-नवेले होने की झिझक भी है और अपना अल्प ज्ञान भी।

    प्यारे मेजर साहब श्री गौतम जी की हर बात निराली होती है, तभी तो एक नादां रोग पाले बैठे हैं जिन्दगी के वास्ते। बहुत ही खूबसूरत लिखते हैं।

    श्री प्रकाश अर्श, रविकांत जी, सुश्री कंचन जी सभी ने बहुत अच्छी गज़लें कहीं, यह मुझ जैसे सीखने वालों के लिये बहुत ही अच्छा अवसर है कि एक मस्ले से कितना बेहतर किया जा सकता है।

    कल की महफिल का इंतजार है।

    सादर,


    मुकेश कुमार तिवारी

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  14. अभिनन्दन !

    आपको और आपके परिवारजन को
    दीपोत्सव की हार्दिक बधाइयां
    एवं मंगल कामनायें.......

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  16. एक से एक धांसू गज़लें पढ़ने मिल गई, वाह! सभी जबरदस्त!!

    भाग न ले पाने का मलाल है.



    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    -समीर लाल ’समीर’

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  17. गुरुदेव अपनी तबियत का ख्याल रक्खें ......... सब शाएर कमाल की हैं ............. किसी एक का नाम लिखना आसान नहीं है आज ......... एक लाइन पर इतना अलग अलग लिखा है ............ कितनी अलग अलग और नायाब सोच है ...... जुदा जुदा से अंदाज़ हैं सब के ................ नमन है सबको मेरा .............. और सब ब्लॉग बंधुओं के साथ
    आपको और आपके पूरे परिवार को दीपावली की मंगल कामनाएं ..........

    उत्तर देंहटाएं
  18. गुरु जी ..! पहले तो उद्घोषणा कर दूँ कि आपको सबसे ज्यादा मैं ही मानती हूँ..क्योंकि आप के साथ मैने भी खुद को बुखार चढ़वा लिया है।

    ब्लॉग खोलते ही हम साथ साथ हैं वाला फोटो देखना... अत्यंत सुखद एवा रोमांचक था...!

    अब पहली बात शुरू करती हूँ अंकित की.... हर इंसान का अलग अलग अलग लोगों पर अलग अलग प्रभाव होता है। मेरे ऊपर अंकित का जो प्रभाव है वो एक भोले भाले बच्चे का ही है। हो सकता है कि औरों के लिये ना हो...!

    तो उसकी गज़ले भी उतनी ही भोली लगती हैं मुझे।

    इक बनावट हँसी.. ऐसा क्या मुझे तो बड़ी असल हँसी लगी थी तुम्हारी...और तुम्हारा ये आसमाँ छून वाला शेर वाह वाह..क्या बात है..क्या ऊँचाई है खयालों की। और फिर ये शेर .. खिलौने वाला.. बिलकुल तुम्हारी तरह निश्छल...

    दीपावली तुम्हे बहुत मुबारक़ हो....!

    @ वीर जी दीपावली का माहौल यूँ ही संवेदनशील होता है..ज़रा सी चिंगारी से आग फैल सकती है.... कृपया छोटे बच्चों को भड़कायें मत

    अर्श क्या कहा दूसरा शर्त भी लगाता है और हारता भी है... तो तुम क्या करते हो ?? कभी खुद भी हार के देखो भाई... तुम्हारा ये चादर वाला शेर बहुत ही नायाब है... बहुत ही अच्छा...!

    दीपावली तुम्हारे लिये लक्ष्मी के साथ साथ गृह लक्ष्मी भी ले कर आये...! और अगली दीवाली तुम युगल हो के मनाओ

    रविकांत जी और अंकित के मतले के भाव कुछ मिलते जुलते लगे मुझे...! और आपका ये मेमने वाला शेर मुझे कुछ अंदर तक छू गया जाने क्यों

    आपको और गुंजन जी को दीपावली की शुभकामनाएं...!

    अभिनव जी की गिरह वाह वाह... मैं नदी में खड़ा गुनगुनाता रहा...एक पुरानी कथा याद आई

    और अब वीर जी...! वाह वाह वाह वाह...! मतला ही ऐसा कि जिसके लिये कहो वो बस फ्लैट हो जाये...!
    फिर ये शेर ... वरह की आग को बुझाने के लिये राग मल्हार गाना ... जो वर्षा ऋतु में गाया जाता है, क्या बात है भाई...! और फिर टीस, आवारगी, रतजगे,बेबसी ... हर आदमी को एक बार हॉस्पिटल ज़रूर पहुँचना चाहिये... शेर गहरे निकलते हैं..

    टाफियाँ, काफियाँ, कहाँ से ढूँढ़ के लाये हैँ ये नायाब सोच....! और ये मैं पिघलता रहा वाले शेर के लिये दाद मेरे भतीजे की तरफ से आ रही है। रहीम दास जी ने सही कहा है...
    रहिमन विपदा हू भली जो थोड़े दिन होय,
    उम्दा उम्दा शेर से गज़ल मुकम्मल होय....!


    दीपावली आपके और आपकी नर्सों के बीच ढेरों फुलझड़ियाँ छुड़ाये...! परिणाम और सुखद हों..बताइयेगा तो हम क़ासिद भी बन जायेंगे....!!!

    मेरे ख्याल से रहे और रहें का अंतर सभी गज़लकारों के मध्य स्पष्ट रहा है किसी ने भी दोनो का प्रयोग नही किया है औ‌र जिसका किया है उसका उचित प्रयोग हुआ है....!

    उत्तर देंहटाएं
  19. सुबीर भैया, अब आप एकदम आराम करिए और जल्दी से ठीक हो जाईये. फ़िर ही कोई पोस्ट लिखिए, ऎसी क्या जल्दी है!!
    आज की पोस्ट में कितनी खूबसूरत ग़ज़लें हैं, कुछ बहुत ही उम्दा शेर हैं !! सभी शायरों और प्यारी कंचन (इस बार जी नहीं :) को बहुत-बहुत बधाई !
    "गागरों में समुन्दर समाते रहे
    आप लिखते रहे,दिल लुभाते रहे"

    उत्तर देंहटाएं
  20. सुबह जब ऑफिस पहुंचा तो किसी ब्लॉग पे आपकी टिपण्णी देखी समय था उसमे सुबह का ४ बजे जब ब्लॉग पे आया तो आपके बुखार की खबर मिली गुसा भी आया और दिल पिघल भी गया , क्या करता एक तो आप ठहरे बड़े भाई और ऊपर से सबसे बड़ी बात के मेरे गुरु जी हैं आप ... बस विनती है गुरु देव के ऐसा ना करें शाम को आप से बात करके दिली सुकून मिला ... दिवाली की ढेरो बधाईयाँ और शुभकामनाएं आपको तथा आपके पुरे परिवार को मेरे तरफ से ....
    हम सभी को एक ही फ्रेम में लगा के आपने हमें और करीब ला खडा किया है गुरु देव सभी खूब जच रहे हैं , आपके मनाजेरियल स्किल की दाद देता हूँ गुरु देव...
    बात जब तरही की हो तो ग़ज़लों का पूरा दौर होता है ... बात जब अंकित की होती है उसे मैं हैण्डसम कहे के बुलाता हूँ ,.. जितना प्यारा अंकित है उतने ही प्यार से यह ग़ज़ल भी कहता है मतले की ही बात करें तो कितनी मासूमियत भरी है इसमें और फिर दूसरा ही शे'र कमाल कर देने वाला है ... पूरी तरह से इसने अपना हक़ अदा किया है बहुत बहुत बधाई भाई

    हमारे पाठशाला में एक और इन्नोसेंट सा चेहरा है वो हैं रवि जी और शे'र भी अपने हिसाब से ही कहते है ., जितने शर्मीले है मतला भी वही गुनाह कर रहा है ,... कहर बरपा रहा है ,और शे'र भूख लाई उसे .. इसे मैं अपने बहुत करीब पता हूँ , हिंदी का प्रयोग ये जिस तरह से करते हैं पाठशाला में कोई नहीं करता , गुरु जी को भी बहुत भाते हैं ये अपनी हिंदी की विशेषता के कारण ,...
    पाठशाला की एकलौती बहन जिसका होने का ये पूरा फायदा उठाती हैं, आप सभी के सामने तो नहीं कहानी चाहिए मगर गुरु जी ने अपने जन्मदिन पर जो काजू की बर्फी दी थी सारी इन्होने छुपा दिए थे ,.. हमारा झगडा बहुत होता है मगर मैं जानता हूँ ये मुझे कितना प्यार करती हैं... वो छुपाया हुआ एक एक करके मुझे हर रोज देती हैं... जितना मीठा ये गाती हैं ये ग़ज़ल भी उसी के हिसाब से कहती है इनकी गज़ल्गोई के क्या कहने बहुत कुछ सीखता हूँ .. शे'र आप आये हैं तो आप आते रहे .. कितनी नजाकत के साथ बात कही है इन्होने साफ़ पता चलता है के ये लखनऊ में रहती है .. और एक और शे'र का जिक्र करना चाहूँगा .लाईये लाईये दिल हमारा हमें ... कितना प्यार भरा है इसमें .. उफ्फ्फ्फ्फ़ वाली बात है ये तो ...
    और अब बात करते है मेरे प्रिय शाईर के बारे में वेसे जो बर्फी मुझे मेरी बहन जी देती हैं उसमे ये अपना हक़ जताने लगते हैं .. कभी कभी तो छीन भी लेते है मगर जब मुझे छड़ी खानी होती है गुरु जी से तो अपना हाथ पहले ला देते है ताकि मुझे ना पड़े .. एक भी .. काश वो गोली मुझे लग गई होती ... इनकी संवेदनशीलता का मैं कायल हूँ जैसा हैं वेसा ही शे'र भी कहते है अमूमन यह बात सबके साथ नहीं होता है ... कोई एक शे'र लाकर पंगा नहीं लेना मुझे इनसे फिर से .. हर शे'र दाद के काबिल और खड़े होकर तालियाँ...
    पाठशाला के सबसे मस्त छात्र है शुक्ला जी ये ग़ज़लों में प्रयोग करते है .. जैसे हादसा हादसा हादसा हादसा ,.. क्या खूब शेर'बनाया है इन्होने इस बात को सामने लाकर ,.. वेसे काजू जी बर्फी दूर से ही ये देखते रह जाते है और हम चाट कर जाते हैं... बहुत बहुत बधाई इनको भी /....
    साथ में एक बार फिर से सभी को दीवाली की ढेरो बधाईयाँ और शुभकामनाएं .. खूब खुशियाँ मिले .... और सभी लोग मुझे खूब काजू की बर्फी गिफ्ट में दें.... गुरु जी को सादर चरण स्पर्श

    आप सभी का
    अर्श

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  21. सबसे पहले तो आपके शीघ्रातिशीघ्र स्वास्थ्य लाभ की ईश्वर से कामना करता हूं और आशा ही नही विश्वास है कि कल सुबह का ब्लॉग आप तरो-ताज़ा अवस्था में लिखेंगे।
    अब महफिल की बात, क्या महफिल सजाई है आपने। हर ग़ज़ल को पढ़ कर मैं वाह-वाह कर उठा। सुबीर जी आपकी चेष्टाएं झिलमिला उठीं हैं। आपकी ईमानदारी व प्रयासों की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। अलग-अलग क्या कहूं, सबका प्रयास इतना अच्छा लगा कि क्या कहूं, मेरे पास शब्द नहीं हैं, बस ... ...
    शब्द तो शोर है तमाशा है,
    भाव के सिंधु में बताशा है।
    मर्म की बात होठ से न कहो,
    मौन ही भावना की भाषा है।
    सुबीर जी आप दिल से बधाई के पात्र हैं। शुभ दीपावली।

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  22. सबसे पहले तो आपके शीघ्रातिशीघ्र स्वास्थ्य लाभ की ईश्वर से कामना करता हूं और आशा ही नही विश्वास है कि कल सुबह का ब्लॉग आप तरो-ताज़ा अवस्था में लिखेंगे।
    अब महफिल की बात, क्या महफिल सजाई है आपने। हर ग़ज़ल को पढ़ कर मैं वाह-वाह कर उठा। सुबीर जी आपकी चेष्टाएं झिलमिला उठीं हैं। आपकी ईमानदारी व प्रयासों की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। अलग-अलग क्या कहूं, सबका प्रयास इतना अच्छा लगा कि क्या कहूं, मेरे पास शब्द नहीं हैं, बस ... ...
    शब्द तो शोर है तमाशा है,
    भाव के सिंधु में बताशा है।
    मर्म की बात होठ से न कहो,
    मौन ही भावना की भाषा है।
    सुबीर जी आप दिल से बधाई के पात्र हैं। शुभ दीपावली।

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  23. वाह वाह --
    हमारे युवा साहित्यकारों ने
    आज धनतेरस का दिन
    ( यहां, उत्तर अमरीका में
    आज ही मना रहे हैं हम लोग :)
    सफल कर दिया जी -
    - और इसीलिये ,
    " दीप जलते रहें,
    झिलमिलाते रहें "
    यह मुख्य भाव
    सार्थक हुआ है
    अब ,
    ये अभी अभी देखा -
    - भावना सुन्दर है ,
    सो, भेज रही हूँ
    "दीप जलते रहे जगमगाते रहे ,
    हम आपको , आप हमें
    याद आते रहे ,
    जब् तक ज़िन्दगी है ,
    दुआ है हमारी
    'आप छन्द की तरह
    जगमगाते रहे ..."
    बेहद सुन्दर भाव लिए रचे ,
    हरेक के शेर ,
    बहुत सारा समेटे हुए ,
    हमेशा याद रहेंगें
    प्रिय बिटिया कंचन की भावना पर
    " आमीन कहूंगी "
    " ऐसी कोइ हवा अब बहा दे खुदा "
    अंकित बाबू की पतंगें
    बुलंदियों के आसमान तलक पहुंचे
    आपके हौसलों को
    कोइ आंधी ना डीगाये
    ये दुआ है --
    अर्श भाई ,
    आपके कदम फूलों पे चलकर
    हर दुश्मनी को मिटा दे
    ये दुआ करती हूँ
    रवि भाई ,
    काश अब ऐसा हो के
    फरिश्तों को कुर्सियां मिलें और सिन्धु तट पर सरस कथाएँ सुनीं जाएँ...
    गौतम भाई ,
    आपने पूरी ग़ज़ल में
    कई सुखी गृहस्थी के द्रश्य खींचें हैं
    जो मन को भाये -
    खुश रहीये , स्वस्थ रहीये
    अभिनव भाई ,
    आप भी अपने स्वर में सुनवा देते ....? :)
    तब समाँ बांध जाता दीपावली का
    - नदी में श्लोक के बाद
    गीत भी गुनगुनाते :)
    सुन्दर !!
    और अब,
    हमारे पंकज भाई को
    शीघ्र स्वस्थ होने की दुआएं भेजते हुए ,
    पुन: कल का इंतज़ार करते हुए
    आप सभीको ,
    पावन पर्व की अनेकों बधाई
    स स्नेह,
    - लावण्या

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  24. filhal तो मजे ले के पढ़े जा रहा हूँ,tippanion sahit .

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  25. सुबीर जी दिवाली मुबारक !!!

    रिमझिम रिमझिम, छन छनन छन
    पैजनियाँ है बोल रही

    सुन ले सुर और ताल के रस में

    बारिश जो है घोल रही

    इतने सारे जगमग जगमग

    रोशन चहरे देख यहाँ पर

    देवी भी खुश हो रही

    दीवाली की शुभकामनाओं के साथ

    देवी नागरानी

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  26. ओह बुखार में भी पोस्ट! गुरूदेव, आपकी काम के प्रति निष्ठा ऐसी है जो मनुष्य को देवत्व की ओर ले जाती है। वैसे बुखार तो मुझे भी है पर ये शायरीजन्य बुखार है और सुनता हूं इसका कोई इलाज भी नहीं है। हां, सीहोर के तपोवन में सारस्वत-साधना के साधकों ने ऐसा ऊर्जाक्षेत्र जरूर निर्मित कर दिया है जहां ये बिमारी पीड़ा के बजाए आनंद देती है।
    अंकित ने जो गिरह बांधी है, सकारात्मक, विशेष पसंद आयी। और अर्श भाई ने जबसे खूबसूरती का राज बताया है सुना है, तेल, पाउडर, इत्र की दुकानें बंद होने के कगार पर हैं! कंचन जी, आपको जो साम्यता दिखी मेरे और अंकित के मतले में...कैसा संयोग है...और एक विचित्र संयोग ये भी है कि "रहें" के साथ अगर मैं लिखता तो फ़िर मतला बिल्कुल आपके मतले जैसा बननेवाला था...खैर, मतले से आगे मैं लिख नहीं पाया था इसलिये बात वहीं रह गयी। वैसे व्यक्तिगत तौर पर, साधन, साधना, साध्य वाला शेर पसंद आया। गौतम जी के शेर तो क्या कहूं। कई शेर अलग से दाद मांग रहे हैं...मल्हार, टीस, आवारगी और मोम वाले शेर विशेष पसंद आए। अभिनव जी ने जबरदस्त गिरह बांधी है।

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  27. इस दीपावली में प्यार के ऐसे दीए जलाए

    जिसमें सारे बैर-पूर्वाग्रह मिट जाए

    हिन्दी ब्लाग जगत इतना ऊपर जाए

    सारी दुनिया उसके लिए छोटी पड़ जाए

    चलो आज प्यार से जीने की कसम खाए

    और सारे गिले-शिकवे भूल जाए

    सभी को दीप पर्व की मीठी-मीठी बधाई

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  28. आप सभी धर्म एवं पर्व प्रेमी भाइयों एवं बहनों को हमारी और से दीपावली की बहुत बहुत बधाईयाँ आपका जीवन प्रकाश माय हो माँ लक्ष्मी से यही दुआ करता हूँ

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