मंगलवार, 5 अगस्त 2008

ये सब क्‍या हो रहा है क्‍या किसी की कोई भी निजता अब बाकी नहीं रही है

अब लगता है कि ब्‍लागिंग से मोह भंग होंने लगा है । उसके पीछे कारण ये है कि  जो कुछ अच्‍छे मित्र बने हैं उनके ई मेल के स्‍थान पर अब दिन भर ऐसे मेल देखने होते हैं जो कि बिना सिर पैर के होते हैं । ये मुझे क्‍यों भेजे जा रहे हैं मैं भी नहीं जानता । बस चले आ रहे हैं । कई में आमंत्रण है कि उसने कुछ ऐसा लिख दिया है जो तुलसी और सूर के स्‍तर का है और आप उसे पढ़ के अपना जीवन धन्‍य कर लें कोई अपनी व्‍यक्तिगत राय हमारे मेल बाक्‍स में ठूंस रहा है । हम इधर प्रतिक्षा कर रहे हैं अपने मित्रों राकेश खंडेलवाल जी, सजीव सारथी जी, समीर लाल जी, अभिनव शुक्‍ला जी, शैलेष भारतवासी जी, नीरज गोस्‍वामी जी, कंचन चौहान जी, वीनस केसरी जी और हिन्‍द युग्‍म, ई कविता, हिन्‍दी भाषा समूहों सहित ऐसे ही कई सारे मित्रों के पत्रों की और इनके स्‍थान पर आ रहे हैं जाने किस किस के पत्र । क्‍या कहीं कोई नियंत्रण नहीं है इस ईमेलिया व्‍याभिचार का । और अभी तो और ऊंची हो गई है किसी सज्‍जन ने हमारे ग़ज़ल की कक्षाओं के सारे पोस्‍ट उड़ा कर अपने ब्‍लाग पर पूरी बेशर्मी के साथ लगाने प्रारंभ कर दिये हैं http://sangeetmasoom.blogspot.com  यहां पर । इसका मतलब ये है कि अब कुछ भी विशेष ब्‍लाग पर लगाना नहीं चाहिये क्‍योंकि जो आपका है वो तो चोरी होने की संभवना से भरा हुआ है । ये सब क्‍या है मैं नहीं जानता क्‍योंकि ये सब तो हो रहा है और किसी का कोई नियंत्रण ही नहीं है । अच्‍छा होगा कि सारे के सारे ब्‍लाग एग्रीगेटर अब मिलकर एक फोरम का निर्माण करें जिसमें तय किया जाए इस तरह की चोरी चकारी पर कैसे नियंत्रण हो ।

जहां तक मेल का सवाल है तो कुछ बानगी देखें

|| विश्व के निर्माण में जिसने सबसे अधिक संघर्ष किया है और सबसे अधिक कष्ट उठाए हैं वह माँ है।||

||Those who wish to Sing will always find a Song.||

जन मानस परिष्कार मंच

अपना डेस्कटोप बेकग्राउंड अनमोल बनाइये

--
आपके स्नेहाधीन
राजेंद्र माहेश्वरी
पोस्ट- आगूंचा , जिला - भीलवाडा, पिन - ३११०२९ ( राजस्थान ) भारत

Hello

apne hero calum ke antargat padhen Ram Kripal singh jee ko yahan click karen

http://www.bhadas4media.com/index.php/hamara-hero/31-hamara-hero/277-ramkripal-singh

     amit 09911045467

जिस दिन मैं धरती से जाऊं, मुझे कोई याद न करे

ये सब क्‍या है और इसको कैसे रोका जाए ये सोचना अब जरूरी हो गया हे ।

8 टिप्‍पणियां:

  1. यह तो गोरख धंधा है.अपना ई-मेल पता यथा संभव सुरछित करें

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  2. पंकज जी
    आप ने सच कहा...रोज की २०-२२ मेल रोज मुझे डिलीट करनी पढ़ती हैं...और ये जानकारी देकर की आप की पोस्ट को उडा कर किसी ने अपने ब्लॉग पर चिपका लिया है.....बहुत डरा दिया है...ये तो खतरनाक सूचना है है...कल को जो भी ब्लॉग पर आपका है वो किसी दूसरे का हो जाएगा...इसके लिए मुझे नहीं मालूम की क्या किया जा सकता है...बस इतना मालूम है की स्तिथि दुखद है.
    नीरज

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  3. आओ, एक दूसरे से गले मिलकर रोयें. मैं खुद भी इन सबसे बहुत दुखी हूँ और आपके खत का इन्तजार रहता है सो वो आता नहीं. दो बूँद आँसूं रो लेंगे तो कुछ मन हल्का हो जायेगा.

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  4. स्पैम मे डालिये दो चार रोज मे कम होते होते गायब हो जायेगे :)

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  5. आपकी ये बातें सुन कर तो गुरूजी,अजीब सा मन हो गया है....आपके ब्लौग ने हमें,मेरे शब्दों को नयी रौशनी दी है-और अब ये खबर तो...कुछ समझ में नहीं आ रहा क्या कहूँ. आपसे प्रेरणा ले कर मैने अपने ब्लौग पर काम करना शुरू किया था.
    बस एक अनुग्रह है कि इन कुछ गिरे हुये प्राणियों के चलते हम पर से अपना आशिर्वाद नहीं उठाइयेगा.

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  6. गुरु जी प्रणाम
    समझ में नही आ रहा क्या टिप्पडी करू आपकी इस पोस्ट पर
    बहरहाल आपने मेरी पोस्ट पर ध्यान दिया और प्रतिक्रिया की अच्छा लगा परन्तु ये देख कर दुःख भी हुआ की मेरी वजह से आपको छोभ हुआ हलाकि ये बात भी थी कुछ वैसी ही.......अब इसके लिए क्या नियम कानून है ये तो मै नही जानता मगर आपको कुछ तो करना चाहिए..........................
    ये देख कर तसल्ली हुई कि आपने कुछ किया है जिससे अब आपके पोस्ट कॉपी नही हो रहे है अब ऐसा सही में है या मेरे लैपटॉप में कुछ एरर आ गया है बता नही सकता

    आपकी पोस्ट में अपना नाम देख कर ये तो स्पष्ट हो गया कि आपने हमें अपना शिष्य मान लिया है खुशी हुई
    मै नही जनता था कि आप हमारी इमेल का इन्तेज़ार कर रहे है वरना हमारी ऐसी हिम्मत कहाँ जो अपने गुरूजी को इंतज़ार करवाए

    एक आखिरी बात ....
    मै ये जानना चाहता हु कि यदि मै आपसे अपनी गजल कि तख्ती करना चाहू तो ग़ज़ल आपको कहाँ पर भेजू ब्लॉग पर या इमेल पते पर कृपया बताने कि महती कृपा करे ........venus kesari

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  7. कंचन जी
    जैसा कि आपने लिखा (((सबसे पहले तो उन सज्जन को नमन जिनका जिक्र वीनस जी द्वारा किया गया...! इतना साहस रखना भी अपने आप में क़ाबिल-ए-तारीफ है। ब्लॉग जगत में गज़ल की विधा में रुचि रखने वाला व्यक्ति पंकज सुबीर के नाम से शायद ही अनभिज्ञ हो और उनकी कक्षाओं को बिना किसी reference बिना किसी सूचना के हू-ब-हू अपने ब्लॉग पर चस्पा कर देना है तो जज़्बे का काम।)))

    आप चोरी करने को तारीफ़ का काम कैसे कह सकती है ......
    ये तो शर्म कि बात है और ""जज्बा""

    आपके क्या कहने कंचन जी..........................
    वीनस केसरी

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  8. जार जार आंसूं बहाइये...मैं आप को अपना तौलिया जरूर इस्तेमाल के लिए दे सकता हूं । लेकिन एक शर्त पर कि आधा मैं इस्तेमाल करूंगा। इन हरकतों को रोकना चाहिए, ये गलत है। मैथली जी कुछ करते क्यों नहीं? वैसे जो मेल आते हैं उसमें स्टोपर लगा दीजिए ये मेल आने बंद हो जाएंगे। उस मेल आईडी से फिर मेल नहीं आपाएगा। स्पेम भी एक जरिया हो सकता है।

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