गुरुवार, 24 अप्रैल 2008

विदा प्रिय बिटिया तुम्‍हारा और मेरा साथ शायद इतना ही था, जाओ सितारों के देश में जाकर बसो

रिश्‍ते ख़ून के होते हैं तो अपने साथ जाने कैसा बंधन रखते हैं कि उनसे मन जुड़ ही जाता है । और बिछोह पर एक टीस एक दर्द सा दे जाता है । एक माह से ब्‍लागिंग से दूर रहने के पीछे कारण था कि घर में एक नए मेहमान के स्‍वागत की तैयारियां चल रहीं थीं । और उसीको लेकर कुछ परेशानियां थीं ।सप्‍ताह भर पहले वो अपनी मां के पेट से मुझे पैर मार मार कर कह रही थी कि पापा तैयार रहो मैं आने वाली हूं । दो दिन पहले उस नए मेहमान का आगमन भी हुआ । एक नन्‍हीं सी प्‍यारी सी बिटिया के रूप में । मगर शायद उसका और हमारा साथ विधाता ने बहुत ज्‍यादा नहीं लिख कर भेजा था । जन्‍म के साथ ही कुछ परेशानियां उसे थीं और जनम के घंटा भर बीतते न बीतते तो उसे लेकर भोपाल भागना पड़ा किन्‍तु रास्‍ते में ही उसने कह दिया प्‍यारे पापा इस जनम में बस इतना ही साथ फिर कभी मिलेंगें । और वो विदा ले गई । सुंदर सी उस बिटिया को हाथों में थामे मैं लौट आया । जाने क्‍यों या किस बात पर रूठ गई वो मुझसे जो आते ही केवल एक घंटे में ही मुझे और अपनी मम्‍मी को छोड़ कर चली गई । जाने क्‍या अपराध था हम दोनों का जो उसने हमारे साथ रहना ही पंसद नहीं किया । कुछ देर पूर्व जो मां के गर्भ में खेल रही थी अब पृथ्‍वी माता के गर्भ में है । बस रह रह कर एक ही बात मुझे साल रही है जो लिखने के लिये आज मैंने यहां ब्‍लाग पर आने का निर्णय लिया कि क्‍या अपराध था मेरा जो वो इस तरह से रूठ कर चली गई । सब कह रहे हैं कि बहुत सुंदर थी वो और ज्‍यादा सुंदर होने के कारण ही नहीं रुकी क्‍योंकि उसे तो वहां जाना था जहां पर सुंदर लोग रहते हैं । जो भी हो प्रिय बिटिया भले ही तुम मुझसे और अपनी मम्‍मी से नाराज होकर चली गईं मगर हम तुम्‍हें याद कर रहे हैं । विदा प्रिय बिटिया सितारों में जाकर बसो । मीठी ( यही नाम सोचा था मैंने उसके लिये ) शायद मैं और तुम्‍हारी मम्‍मी तुम्‍हारे लायक नहीं थे । विदा मीठी विदा । तुम्‍हारा पापा

17 टिप्‍पणियां:

  1. janm aur mrityu manushya ke haath meim nahin hain, meethi ki yaad mein kisi garib bachchi ko paalen shayad kuchh man badale. meethi to devi thi devlok chali gayi. dhairy rakhen.pranaam meethi.

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  2. aap kae saath hun is dukh kee gadi mae . man shaant ho jaaye to aas paas daekhe koi na koi balika jarur hogee usko pyaar karey aur apni bityiaa kii sab cheejay usey dae dae
    paayar ko baantey man shant hoga

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  3. मुझे भी रूला दिया आप ने ,धैर्य धरे क्या कहूँ ...

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  4. बहुत दुख है…धैर्य रखिये…

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  5. कैसे कहूं कि आप धैर्य रखें !
    मीठी जहां भी हो सुखी रहे..... अपने पापा मम्मी को याद करती रहे ... और आप भी महसूस करें तो पाऎगे मीठी हर फूल में तारे में खुश्बू में रंग में ..सब जगह ही तो है ..आपके साथ ही !
    मेरी आंखें नम है...

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  6. बहुत दुखद ! असह्य कष्ट है ....पत्नी को साथ और स्नेह दें ,उसके लिए और भी ज़्यादा कष्ट कर है जन्म के दर्द के बाद तुरंत मृत्यु का यह दर्द !
    मेरी सम्वेदनाएँ .............

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  7. सचमुच आँखें नम हो गयीं. पीड़ा असह्य है आप दोनों की पर ...... क्या करें? संवेदनाएं.

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  8. दुखद समाचार है.आप धैर्य रखें.पत्नी को भी धीरज दें.इससे ज्यादा क्या कह सकता हूँ.आंखें नम हैं और दिल आपके साथ.

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  9. चैन से रखना मेरी मीठी को ऐ ज़मीं...!
    ये अभी आई है माँ को छोड़कर...!

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  10. पंकज जी बहुत दुःख हुआ पढ़कर मीठी का इस तरह जाना।
    भगवान् आपको और आपकी पत्नी को धैर्य और शक्ति प्रदान करे।

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  11. बहुत ही दुखद आँखे नम हो गई .

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  12. क्या कह सकते हैं....शायद इतना ही नाता था उससे...

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  13. ये एक ऐसा पल है जहाँ सारे शब्द अधूरे रह जाते हैँ
    पँकज भाई, आपके परिवार को किन शब्दोँ से साँत्वना दूँ ?
    i am very very sad :-((
    लावन्या

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  14. भगवान आपको और आपकी पत्नी को धैर्य और शक्ति प्रदान करे।

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  15. क्रूर नियति के हाथों में हम सब ही तो बस हैं कठपुतली
    किस पल डोर कौन सी खींचे, किसे विदित ये कभी हुआ है
    कुछ पल अक्सर युग बन जाते निमिष निमिष भर जी लेने को
    ऐसा की कालांश आपको जिसनी आकर यहाँ छुआ है

    क्षमता कहाँ रही शब्दों में व्यक्त कर सकें मन की भाषा
    आशा लेकर अभिव्यक्ति की अक्सर रह जाता मन प्यासा
    मैं अभिज्ञ हूँ उबर सकेंगें आप निराशा की घड़ियों से
    मुझे विदित है दे न सकूँगा, शब्दों से मैं कोई दिलासा

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  16. पंकजजी,
    ‘मीठी‘ बिटिया की बिदाई
    पढ़ते पढ़ते दिल भर आया।
    आपने तो हमारे साथ पापा का दर्द बाँटा
    पर
    मीठी की माँ किस कदर अंदर ही अंदर
    दुख की बारीश झेलती होगी,
    इस बात को उजागर करना
    दुनिया की किसी भी भाषा के
    बस की बात नही है।
    भगवान आप दोनो को
    धैर्य दे।
    शक्ति दे।

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  17. अत्यन्त दुखद. इस दुख की घड़ी में हम आपके साथ हैं.

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