गुरुवार, 15 अक्टूबर 2009

तरही की धमाकेदार शुरुआत की है बिटिया अनन्‍या ने, और अब सिलसिला आगे बढ़ा रहे हैं डॉ. मोहम्‍मद आज़म, तिलक राज कपूर जी, प्रकाश पाखी, मुकेश तिवारी तथा पारुल ।

दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें तरही भाग 1 अनन्‍या को पढ़ें  

दादा भाई महावीर जी के मंथन पर अपने इस मित्र की दीपावली विशेष कहानी को पढ़ें

अनन्‍या ने तरही को  जबरदस्‍त टेक आफ दिया है । मुझे लगा कि चूंकि अब काफी नाम बाकी हैं और समय भी कम हैं इसलिये एक बार में कम से कम चार या पांच कवियों को लेना होगा इसलिये मैं बात भी कम करूंगा ।तो चलिये तरही के इस क्रम को आगे बढ़ाते हैं और आज अलग अलग रंगों के कुछ शायरों को सुनते हैं । आज हम ले रहें हैं चार शायरों  और एक शायरा को । सभी अपने अपने फन में माहिर शायर हैं । और सबसे अच्‍छी बात ये है कि सब अलग अलग रंग में लिखने वाले शायर हैं । डॉ. मोहम्‍मद आज़म, तिलक राज कपूर जी,  प्रकाश पाखी, मुकेश तिवारी तथा पारुल ये वे पांच रचनाकार हैं जिनकी रचनाएं आज हम देखने जा रहे हैं । परिचय के लिये स्‍थान नहीं है इसलिये मैं सीधे ही रचनाओं पर आ रहा हूं ।

deepawalideepawalideepawalideepawalideepawalideepawaliदीप जलते रहें झिलमिलाते रहेंdeepawalideepawalideepawalideepawalideepawalideepawali

azam ji TRK Small prakash pakhi mukesh tiwari

डॉ. मोहम्‍मद आज़म    तिलकराज कपूर जी         प्रकाश पाखी          मुकेश तिवारी

277115835_005ee4a967 DiwaliLight 277115835_005ee4a967a

deepawali डॉ. मोहम्‍मद आज़मdeepawali

काग़ज़ी आंकड़े वो दिखाते रहे

लोग जश्‍ने तरक्‍की मनाते रहे

हम हथेली पे सरसों जमाते रहे

साथ यूं जिंदगी का निभाते रहे

खट्टे मिट्ठे मेरे रिश्‍ते नाते रहे

कुछ हंसाते रहे कुछ रुलाते रहे

                                लौट कर जब तलक वो घर आया नहीं

          बस बुरे ही ख़यालात आते रहे

दिल मिलाना हर इन्‍सां से मुमकिन न था

हाथ रस्‍मन सभी से मिलाते रहे

गिन रहा था तमाम अपने दुश्‍मन मगर

दोस्‍त जिगरी भी कुछ याद आते रहे

हो गया था नज़र से वो ओझल मगर

देर तक हाथ अपना हिलाते रहे

इक सराये है ‘आज़म’ ये दुनिया यहां

लोग आते रहे, लोग जाते रहे

deepawaliतिलक राज कपूर जीdeepawali

दिल पे मेरे वो बिजली गिराते रहे
आशियॉं अपना खुद ही मिटाते रहे ।

उनकी फितरत थी हमको सताते रहे,
हम भी कुछ कम नहीं मुस्‍कुराते रहे।

जिस डगर हम चले चोट खाते रहे,
राह अपनी मगर हम बनाते रहे।

चॉंदनी से तराशे हुए जिस्‍म पर
वो सितारों की महफिल सजाते रहे।

कनखियों से ही शायद कभी देख लें,
सोचते हम रहे, वो लजाते रहे।

रूठने-औ-मनाने के इस खेल में,
रूठते वो रहे, हम मनाते रहे।

उनका चेहरा अचानक ही वो कह गया
राज़ परदे में जो वो छुपाते रहे।

आज आयेंगे वो, सोचकर उम्रभर,
उनकी राहों में पलकें बिछाते रहे।

रंग जीवन से पाये, कलम में भरे
गीत लिखते रहे गुनगुनाते रहे।

एक फुटपाथ सोता रहा रातभर,
दीप जलते रहे, झिलमिलाते रहे।

पेड़ बूढ़ा नहीं हो सका, जब तलक
कुछ परिंदे घरौंदा बसाते रहे।

ख्‍वाब-ए-मंजिल में ‘राही’ जी, क्‍यों खो दिये
रास्‍ते में नज़ारे जो आते रहे।

deepawaliप्रकाश पाखी deepawali

आंगनों में ख़ुशी,रौशनी नूर हों

दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें

मैल मन से मिटे दोष भी दूर हों

बैर की भावना को मिटाते रहें

सरगमें प्यार की दिल में बजती रहें

नेमतों की ख़ुशी गुनगुनाते रहें

दर्द हो, हो चुभन,आग जलती रहे

रिश्ते में हो तपन पर निभाते रहें

मुश्किलें हों बड़ी,राह काँटों भरी

ख्वाब जन्नत के फिर भी सजाते रहें

मिल गले हम मिले घाव भूलें सदा

माफ़ कर दुश्मनी हम मिटाते रहें

 deepawaliमुकेश तिवारीdeepawali

दीप जलते रहे झिलमिलाते रहे

तूफां आये मगर जगमगाते रहे

                                    दिन गुज़रते रहे रातें कटती रही

वो ना आये जिन्हें हम बुलाते रहे

अपनी खामोशियाँ बन गई है सदा

जान जाती रही याद आते रहे

जीत उनकी तुम्हें भी मुबारक बहुत

हार के हम उन्हें यूँ जिताते रहे

रोटियाँ आस्मां से अभी आएंगी

भूख को यूँ दिलासा दिलाते रहे

deepawaliपारुल deepawali

tarapeeth2009 014

दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें
गर अमावस भी हो मुस्कुराते रहें
बेतकल्‍लुफ़ हुए जो, बढे़ फ़ासले
मश्‍वरा अब ज़रा हिचकिचाते रहें
रेख लांघी थीं सीता वो अंजाम गर
हो सके बेटियों को सुनाते रहें
ऐसी ख़फ़गी मेरी जाँ मुनासिब नहीं
हम मनाते रहें, जाँ से जाते रहें
ज़ब्त ऐसे करें बाज़ औकात गम
तिलमिलाते रहें कसमसाते रहें
चाँद "पुखराज" ऐसे उफ़क़ पर खिलो
लोग सजदे करें ,सर झुकाते रहें

जबरदस्‍त शेर और कमाल की शायरी की है पांचों ने दिल मिलाना हर इन्‍सां से मुमकिन न था, एक फुटपाथ सोता रहा रात भर, मैल मन से मिट दोष भी दूर हो, अपनी खामोशियां बन गईं हैं सदा, और बेतकल्‍लुफ हुए जो, बढ़े फासले  ये शेर यादों में बसे रह जाने वाले शेर हैं । आज़म जी ने संयुक्‍त अक्षरों का जबरदस्‍त खेल रचा है जो नये लिखने वालों के लिये सीखने योग्‍य है । अनोखे अंदाज से लिखे गये शेर हैं इन ग़ज़लों में । अनन्‍या द्वारा की गई धमाकेदार शुरूआत को मध्‍यक्रम के बल्‍लेबाजों ने स्‍थिरता प्रदान की है और तरही को ऊंचाइयां । पांचों को पढ़ें और दाद दें । और कल मिलिये कुछ और शायरों से । इंतजार कीजिये दीपावली के दिन का उस दिन मिलेंगीं आपको दिग्‍गज रचनाकारों की रचनाएं अर्थात दीपावली का धमाका ।

परिवार