सोमवार, 12 मार्च 2018

बासी होली, आज इसमें शामिल है देश के महान शायर नीरज गोस्वामी और उतने ही महान दूसरे शायर भभ्भड़ कवि भौंचक्के का ग़ज़लिया मुकाबला ।

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वो निर्णायक को देकर घूस तेरा जीतना ज़ालिम
चली थी चाल तूने जो सयानी याद आएगी

होली के तरही मिसरे पर भभ्भड़ कवि भौंचक्के और देश के कुख्यात शायर नीरज गोस्वामी के बीच एक ग़ज़लिया मुकाबला संपन्न हुआ। शिवना प्रकाशन के श्री शहरयार ख़ान इस मुकाबले के निर्णायक थे। प्रारंभिक रूझान के मुताबिक श्री नीरज गोस्वामी ने यह मुकाबला जीत लिया है। प्रारंभिक रूझान इसलिए क्योंकि अभी अभी पता चला है कि गोस्वामी जी ने शिवना प्रकाशन को ऑफर किया था कि यदि उनको विजेता घोषित किया जाता है तो वे पुरस्कार में मिलने वाली शॉल, गुलदस्ते को स्वयं ख़रीद कर ले आएँगे तथा शिवना प्रकाशन पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ने देंगे। साथ ही वे अपनी ही पुस्तक यायावरी यादों की को सम्मान के रूप में प्राप्त करने को भी तैयार हैं। चूँकि शहरयार ख़ान ऑफर के कच्चे माने जाते हैं, इसलिए यह मुकाबला श्री नीरज गोस्वामी के पक्ष में जीता हुआ उनके द्वारा घोषित कर दिया गया है। एक श्रोताओं से खचाखच भरे सभागृह में जिसमें इन तीनों के अलावा केवल एक फोटोग्राफर और था, मुकाबले के विजेता रहने पर श्री नीरज गोस्वामी को उनकी ही लाई हुई शॉल, गुलदस्ते और उनकी ही किताब यायावरी यादों की देकर सम्मानित किया गया।

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वो ब्राउन ब्रेड जो थी घूस की और जेम रिश्वत का
वो भ्रष्टाचार की इक शादमानी याद आएगी

कार्यक्रम के पश्चात एक शानदार डिनर पार्टी का आयोजन भी किया गया। डिनर पार्टी में श्री नीरज गोस्वामी द्वारा लाई गई ब्राउन ब्रेड पर उनके ही द्वारा लाए गए टमाटर, ककड़ी जो उनके ही द्वारा काटे भी गए थे सजाकर सैंडविच बना कर खाए गए। यह रात्रिभोज श्री नीरज गोस्वामी द्वारा मुकाबला जीतने की खुशी में दिया गया ​था। इस डिनर पार्टी में बड़ी संख्या में यह तीनों शामिल हुए तथा करीब चार ब्राउन ब्रेड के पैकेट साफ कर दिये गए।

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गुलाब इस वाहियात अंदाज़ में जब कोई सूँघेगा
हमें तब आपकी ज़िल्ले सुभानी याद आएगी

आज इसमें शामिल है देश के महान शायर नीरज गोस्वामी और उतने ही महान दूसरे शायर भभ्भड़ कवि भौंचक्के का ग़ज़लिया मुकाबला। मुकाबले की ग़ज़ल में पहला शेर श्री नीरज गोस्वामी जी द्वारा कहा जा रहा है तथा उसका उत्तर भभ्भड़ कवि भौंचक्के द्वारा दिया जा रहा है। पहचान के लिए दोनों के शेरों को अलग अलग रंगों में दिया जा रहा है।

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हुई भभ्भड़ की नीरज से जहाँ पर ग़ज़लिया टक्कर
हमें वो इंडिया की राजधानी याद आएगी

नीरज गोस्वामी जी और भभ्भड़ कवि भौंचक्के के बीच कुल दस चक्रों में मुकाबला संपन्न हुआ जिसमें मतला और मकता भी शामिल है। दसों चक्र आपके सामने दिये जा रहे हैं।

1
ग़ज़ल छाती पर चढ़कर वो सुनानी याद आएगी
वो भभ्भड़ तेरी हरक़त तालिबानी याद आएगी

हमें नीरज तुम्हारी बदगुमानी याद आएगी
ग़लतफ़हमी की इक लंबी कहानी याद आएगी

2

नाशिस्त-ए-भभ्भड़ी में हाय श्रोताओं का वो ग़ुस्सा
वो भभ्भड़ दाद जूतों से पिलानी याद आएगी

वो सामाइन का घटिया शेर पर तुमको पटक देना
बदन की खाट नीरज चरमरानी याद आएगी

3

अमाँ रहने भी दो जाओ हमारा मुँह न खुलवाओ
खुला भभ्भड़ हमारा मुँह तो नानी याद आएगी

हैं नीरज चाहते हम भी यही के मुँह न खोलो तुम
जो तुमने मुँह को खोला नाबदानी याद आएगी

4

जवानी जा चुकी कब की अभी तुम इश्क़ में ही हो
ऐ भभ्भड़ कब तलक बीती जवानी याद आएगी

ये डाली मोगरे की में हैं चूहे, शेर मत कहिये
कोई पढ़ ले तो नीरज चूहेदानी याद आएगी

5

किसी मजनूँ को चौराहे पे पिटता जब भी देखेंगे
हमें भभ्भड़ फटी इक शेरवानी याद आएगी

किसी की जब भी उतरेगी ज़नाना सैंडिलों से लू
हमें नीरज की इक घटना पुरानी याद आएगी

6

अचानक बीट कर देगा कोई कव्वा अगर सिर पर
वो भभ्भड़ तेरी ग़ज़ल-ए-नागहानी याद आएगी

ग़ज़ल ये आपकी नीरज बहत्तर फुट है लम्बी जो
इसे सुन कर बला-ए-आसमानी याद आएगी

7

ये जो दीवान भभ्भड़ है तेरा इसको पढ़ेंगे जब
हमें दादी की अपनी पीकदानी याद आएगी

हमें भी रस्म-ए-इजरा आपके दीवान की नीरज
थी महफ़िल शर्म से जो पानी-पानी याद आएगी

8

सुभान अल्लाह भभ्भड़ आबनूसी रंग ये तेरा
तुझे देखे कोई तो सुरमेदानी याद आएगी

मिलेगा जब भी गैंडे-सा कोई, तो फिर ख़ुदा की ये
तुम्हारे साथ नीरज बेईमानी याद आएगी

9

हमें भी याद आएगी फ़िदा जिस पर तू था भभ्भड़
तुझे भी तो चुड़ैलों की वो रानी याद आएगी

तुम अपने भी तो नीरज याद कॉलेज के करो वो दिन
तुम्हें मोहतरमा कोई मरकटानी याद आएगी

10

सवा सौ गालियाँ 'नीरज' को घण्टे भर में दीं तूने
तेरी भभ्भड़ ज़बाँ ये ख़ानदानी याद आएगी

बुला 'भभ्भड़' को नीरज घर कटाना अपने कुत्ते से
हमेशा आपकी ये मेज़बानी याद आएगी

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दुखी है शहरयार अब और हँसते खिलखिलाते तुम
हमें सच्चाई से ये छेड़खानी याद आएगी

मित्रों आज के यह दोनों शायर आपके चिर परिचित हैं। दोनो ही आपकी दाद पाने के हक़दार हैं। देर से आए हैं लेकिन दुरुस्त आए हैं। तरही में बस एक दो ग़ज़ल और बची हैं, उसके साथ ही हम तरही का समापन अगले अंक में कर देंगे। लेकिन आज तो बस आपकी दाद के लिए एक ही बात दे दाता के नाम तुझको…….

11 टिप्‍पणियां:

  1. 😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😅😅😅😅😅😅😅😅😅😅😅😅😅😅😅😅😅🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗
    ये नीरज कौनसा है बे...? हम तो ना हैं कसम से ....हमारी इत्ती इज्जत ना है समाज में....हां...

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  2. दो शायरों की भयंकर मुठभेड़ में भाई शहरयार फंस गए मालूम होते हैं। बहरहाल इस जंग में दागे गए गोलों से एक हास्य का गुब्बार उमड़ उठा है। दोनों की संतुक्त हज़ल से तरही को चार चाँद लग गए।

    आप दोनों को हार्दिक बधाई।

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  3. अब जब दो कुख्यात शायर अपने अपने शब्दों के लिबास खुद ही मंजे अंदाज़ में फाड़ रहे हों तो हमारी क्या बिसात की हंसने के अलावा कोई काम करें ... और हर शेर पे आप लाख लाख बार हंसा रहे हो बात ही क्या है ...
    हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ...
    हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ...
    हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ...
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    हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ...
    हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ... हा हा हा हा हा हा हा ...
    कृपया इस हंसी को संसद वाली हंसी न समझा जाये ....

    उत्तर देंहटाएं
  4. समझ ना आ रहा फोटुआ में भभ्भड़ का थोबड़ा बढ़िया है या हाथ पे बंधी घड़ी... पर इसमें समझने जैसी बात है ही कहा..? घड़ी ही बढ़िया है..सौ टका...😁😁😁

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    1. हम तो अभी देखे हैं दुबारा से ... खींचने को मन है रो है ... पर इ सुसरी स्क्रीन से बाहर नै आ री ...

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  5. बिसाते तर्ही' पर यह, पहलवानी याद आएगी 
    कभी  भभ्भड़ कभी नीरज को नानी याद आएगी। 

    पटख़नी दे रहे उस्तादो शागिर्द एक दूजे को
    जो देखी 'नूरा कुश्ती', बेइमानी याद आएगी!

    मदद ली चूहेदानी, तालिबानी काफ़यो से भी
    दिखा कर 'केक' फाँसा, मेज़बानी याद आएगी!

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  6. बहुत नाइंसाफी है यह, यह मुकाबला दो ऐसे शायरों के बीच कैसे हो सकता है जिनमें से एक बड़े प्यार से मक्खन लगा रहा हो और दूसरा गुलाब के फूल को भी ऐसे देखे जैसे उसमें मधुमक्खी या बर्र का छत्ता लगा हो। इसलिए यह मुकाबला बिना परिणाम के रहा ऐसा माना जाना आदेशित किया जाता है। हां, जिन्हें इस मुकाबले के शेर पढ़कर हँसी आ रही हो उन्हें अधिकार रहेगा कि वह इन शेरों को पढ़कर तब तक हँस सकते हैं और तब तक हँसते रह सकते हैं जब तक उनका मन न भर जाए या आस पास खड़े लोग किसी अन्य व्यवस्था के लिए मजबूर ना हो जाएं।
    दोनों शायरों को धारा 307 का प्रथमदृष्टया दोषी पाया गया है लेकिन किसी पाठक का पेट फटने की कोई सूचना न होने से दोनों को क्षमादान दिया जाता है और ताकीद की जाती है कि भविष्य में एकहोली का यह अनर्थ कदापि न लें कि इस मौके पर किसी का पेट फाड़ने की अनुमति होती है।

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  7. पढ़ेंगे नीरज और भभ्भड़ की द्विज ग़ज़लों की जब कसरत
    अखाड़ों की हमें वो पहलवानी याद आएगी
    ह हा हा हा ह हा हा हा
    ह हा हा हा
    ह हा हा हा


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  8. वाह!वाह!वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति......बहुत बहुत बधाई......

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  9. यह तो कमाल कमाल कमाल नहीं धमाल धमाल धमाल हो गया है अब जाकर सारी पोल खुली। तिलक जी आप पेट फटने की बात कर रहे हैं यहां सांस आनी मुश्किल हो गई है हंस-हंस के बुरा हाल है त्राहि माम त्राहि माम,दुहाई है इस हंसी को रोका जाए। हास्य के इतनी सटीक वार प्रहार एक ही मुशायरे में एक ही जगह पर कभी नहीं सुने थे।
    हा हा हा हा हा हा हा । यादगार मुशायरा रहेगा ये।

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