सोमवार, 25 सितंबर 2017

दीपावली आ गई है और काम पर लगने का समय आ गया है, तो आइये दीपावली के अवसर पर आयोजित होने वाले तरही मुशायरे के मिसरे की बात करें।

मित्रों एक वर्ष बीत गया और दीपावली का त्योहार एक बार फिर से आ गया है। इस बीच इस ब्लॉग ने भी अपनी स्थापना के दस वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 2007 में इस ब्लॉग की शुरूआत हुई थी माह अगस्त के अंति सप्ताह में, इस प्रकार ये दस वर्ष हँसते खेलते बीत गए। आई पी एल से उधार लेते हुए कहता हूँ – ये दस साल आपके नाम। बीतना समय की प्रकृति है और वह बीतता ही है। पीछे छोड़ जाता है कई सारी खट्टी मीठी यादें। इस बीच कई रिश्ते बने, कई लोग मिले जिनसे मिलकर ऐसा लगा कि जन्मों जन्मों का संबंध है। एक परिवार जैसा बन गया। इस परिवार ने मिलकर सारे त्योहार मनाए। फिर ये भी हुआ कि कुछ लोग दूर हो गए। कुछ को ईश्वर ने अपने पास बुलाकर हमसे दूर कर दिया तो कुछ मन से दूर हो गए। जो दूर हो गए वे भी हमारे ही हैं। असल में सच कभी भी निरपेक्ष सच नहीं होता, वह हमेशा सापेक्ष सच होता है। हर व्यक्ति का अपना सापेक्ष सत्य होता है। इसलिए ज़रूरी नहीं होता कि जो किसी एक का सापेक्ष सच है वो दूसरे का भी हो। कोई भी सत्य पूर्ण या अंतिम सत्य नहीं होता, उसे सापेक्ष होना ही होता है। दुनिया में सापेक्ष सत्यों की ही लड़ाई है। हम सब अपने-अपने सापेक्ष सचों को अंतिम मान कर उसी को दूसरों से भी मनवाने की कोशिश में लगे रहते हैं। और नतीज़ा यह होता है कि रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है।

आइये आज बात करते हैं दीपावली के त्योहार की। दीपावली का त्योहार एक बार फिर से आ गया है और एक बार फिर से हम सब सब कुछ भूल कर कुछ दिनों के लिए उत्सव की मस्ती में डूबने को तैयार हो चुके हैँ। दस सालों से इस मस्ती का एक और ठिकाना भी होता है और वो होता है इस ब्लॉग पर आयोजित होने वाला यह तरही मुशायरा। सब लोग जिस उमंग से जिस उत्साह से इसमें भाग लेते हैं उसीके कारण यह मुशायरा हर वर्ष यादगार हो जाता है।

कुमकुमे हँस दिए, रोशनी खिल उठी

इस बार बहर वही ली जा रही है जो होली पर भी ली गई थी। असल में जब दीपावली की तरही का विचार आया तो सबसे पहले जो मिसरा दिमाग़ में बना वो यही था। इसके बाद बहुत सोच विचार किया कि कुछ और कर लिया जाए लेकिन बहरे मुतदारिक मुसमन सालिम के अलावा कोई और ठौर नहीं दिखा। तो फाएलुन फाएलुन फाएलुन फाएलुन पर ही इस बार का तरही मुशायरा करने का तय कर लिया। रोशनी में जो ई की मात्रा है वो हमारे काफिये की ध्वनि होगी मतलब ज़िंदगी, शायरी, रोशनी आदि आदि। और खिल उठी रदीफ होगा।

तो यह है दीपावली का होमवर्क अभी काफी दिन हैं तो उठाइये काग़ज़ कलम और तैयार हो जाइए। मिलते हैं दीपावली के मुशायरे में।

18 टिप्‍पणियां:

  1. वाह अब लगा कि दिवाली आ रही है। होली दिवाली या ईद सबकी गहमागहमी,मिठाई,रंग,रोशनी की लड़ियो में मिसरे ग़ज़लें गुंथे होते हैं। इस ब्लॉग से जुड़े लोगों के त्योहार कुछ ओर होते हैं। जिसे यंहा जुड़े लोग ही समझ सकते हैं।
    सापेक्ष सच,,,बहुत कम शब्दों में बड़ी बात कही आपने। "जो दूर हो गए वे भी हमारे अपने ही हैं। सच।

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  2. गुरुजी,

    सत्य के सापेक्ष होने की बात ने आज सत्य को ही
    पुनर्परिभाषित कर दिया..... वाह

    देखिये अपनी कोशिश तो करते है इस महापर्व पर एक दीप जलाने की वैसे साहबजादे अंशुल जरूर तैयार हो गए होंगे अब तक...

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  3. प्रणाम sir
    बहुत लम्बा इंतज़ार करवाया आपने। मुझे तो लगा कि व्यस्तताओं के चलते इस बार तरही कैंसिल हो गयी।

    अब लगा की फेस्टिव सीजन शुरुअ हुआ

    हमारा दमाग भी कुछ कसरत करे।

    सादर
    नकुल

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  4. ब्लॉग के दस वर्ष पूरे होने के लिए हार्दिक बधाई

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  5. करते हैं...वैसे करने लायक न पहले थे न अब हैं.. फिर भी कोशिश करेंगे...

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  6. अब प्रतीक्षा की घड़ियाँ हुई खत्म है।
    देखिए सब हँसे, रोशनी खिल उठी।

    वाहहह

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-09-2017) को रजाई ओढ़कर सोता, मगर ए सी चलाता है; चर्चामंच 2739 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. त्यौहार का मौसम तो अब अंगडाई लेगा ...
    दिवाली का त्यौहार हो वैसे भी दीपों का त्यौहार है अँधेरे में रौशनी का त्यौहार है ... इस बार भी रौशनी के नए मंज़र खिलेंगे ...
    १० साल पूरे होने पर सभी को बधाई ... यूँ ही फलता फूलता रहे ये सफ़र ...

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  10. एक दशक ! यानी एक युग ! .. इस काल-खण्ड में क्या कुछ नहीं बदल गया ! यदि कुछ नहीं बदला है तो समवेत आगे बढ़ने का उत्साह ! ऐसी निरंतरता फिर तो परिदृश्य में बदलाव की साक्षी तो होगी ही.
    हार्दिक बधाइयाँ एवं अशेष शुभकामनाएँ

    -सौरभ

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  11. वाह !
    बधाईयाँ ! सीजन शुरू होता है अब...

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  12. नमस्ते अनुज श्री पंकज भाई
    आशा है आप सपरिवार , स्वस्थ व प्रसन्न हैं।

    आहा ! दीपावली का त्यौहार, भी अब आ ही गया समझो !
    नव - दुर्गों के उत्सव से ही से मानों शुभ संकेत देते हुए
    जीवन - मंच के नेपथ्य से, हमें आगाह करता हुआ दीपावली का वार्षिक महोत्सव शुभ चरण धर कर आता प्रतीत होता है।


    आप के ब्लॉग के एक दशक पूर्ण करने पर आपको शुभकामनाएं एवं ब्लॉग पर सार्थक प्रयास प्रस्तुत करने के हेतु आपको ढेर सारी बधाई !
    इस दौरान आपकी रचनात्मक प्रक्रिया भी कई विभिन्न दिशाओं में अग्रसर होतीं रहीं हैं और प्रत्येक क्षेत्र में
    आपको अपार सफलता मिली है इस बात की बहुत खुशी है। मेरी सद्भावनाएँ सदैव आपके उत्कर्ष में आपके साथ रहीं हैं।
    आगे भी सफलता, सुख ~ स्वास्थ्य लाभ व सम्पन्नता बनी रहे ये शुभकामनाएं प्रेषित हैं।

    आप जब जब भी आपके ब्लॉग पर तरही मुशायरे का आयोजन करते हैं, तब तब कुछ पल के लिए,
    व्यस्त जीवन क्रम में एक विशेष अवकाश निकाल कर, अपने मन में बसे इस आत्माराम रूपी दिए को
    प्रज्वलित करने का लाभ एवं अवसर यह सँवेदन भरा मन, रोक नहीं पाता !

    अत: प्रस्तुत हैं , कुछ काव्य ~ पंक्तियाँ, जो स्वांत सुखाय की गयी रचना,
    जो स्वत: उभरी हैं आप तक भेज रही हूँ ।
    मित्र समुदाय स्नेही परिवार की भाँति सब स्वजन हैं उनके
    संग उत्सव ~ त्यौहार मनाना मेरे लिए सुखरूप है।
    मेरी सद्भावना स्वरूप ये काव्य पंक्तियाँ ,
    माँ महालक्ष्मी व हमारे भारतीय परंपरा के प्रतीकों सम देवी देवताओं के श्री चरणों में मेरी अंजुरी भर, फूल ~ पंखुरी भेज रही हूँ।

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  13. ये ब्लॉग एक अंधेरे में एक रोशनी की किरण की तरह है सबके लिए जो सबके ज़हन में उमंग भर देता है और कुछ करने के लिए उत्साहित करता है ।

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  14. वाह, मै भी इस तरही मिसरे पर कोशिश करता हूं

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