सोमवार, 13 दिसंबर 2010

श्री राकेश खंडेलवाल जी को वर्ष 2010 का शिवना सारस्‍वता सम्‍मान प्रदान किया, अर्श, गौतम, अंकित, वीनस और रवि भी उपस्थित थे ।

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आज जब अपने देश में ही लोग हिंदी को भूल रहे है ऐसे में विदेश में रहकर हिन्दी की सेवा करना हम सब के लिए गौरव की बात है। यह बात हिन्दी प्राध्यापक डा.श्रीमती पुष्पा दुबे ने शिवना प्रकाशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में व्यक्त की। शवना प्रकाशन द्वारा इस वर्ष का सारस्वत सम्मान श्री राकेश खंडेलवाल जी को साहित्य सेवा के लिए यहां शनिवार की रात का आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रदान किया गया।

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हिन्दी प्राध्यापक साहित्यकार पुष्पा दुबे के मुख्यआतिथ्य एवं वरिष्ठ साहित्यकार नारायण कासट की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में श्री खंडेलवाल को इस वर्ष का शिवना सारवस्त सम्मान प्रदान किया गया। विशेष अतिथि के रुप में परिवार परामर्श केन्द्र के राजकुमार गुप्ता उपस्थित थे।

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पूर्ण विधि विधान के साथ कुणाल, राहुल, हिमांशु, अक्षत ने श्री खंडेलवाल के सबसे प्रथम पाद प्रक्षालन किये ।

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पंडित शैलेश तिवारी द्वारा किये जा रहे मंत्रोच्चार तथा श्रोताओं द्वारा की जा रही पुष्‍प वर्षा के बीच श्री खंडेलवाल को वर्ष 2010 का शिवना सारस्‍वत सम्‍मान प्रदान किया गया । जब यह सम्मान प्रदान किया गया तो श्री खंडेलवाल भावुक हो गए। अतिथियों ने उन्हें शाल श्रीफल, सम्‍मान पत्र, स्‍मृति चिन्‍ह भेंटकर किया जाकर सम्मान प्रदान किया गया। सम्‍मान पत्र का वाचन श्री जयंत शाह ने किया ।

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इससे पहले अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलित किया।

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अतिथियों का स्वागत आयोजक पंकज पुरोहित सुबीर, दिनेश द्विवेदी, हरिओम शर्मा दाउ, रियाज मो रियाज, शैलेष तिवारी, जंयत शाह,सोनू ठाकुर, धर्मेंद्र कौशल, सनी गोस्वामी, मेघा सक्‍सेना, गौतम राजरिशी, वीनस केशरी, प्रकाश अर्श, रविकांत पांडे, अंकित सफर  आदि द्वारा किया गया।
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पीसी लैब पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए डा. पुष्पादुबे ने कहा कि आज लोगों को जब विदेश में जाने का अवसर मिलता है तो उनके सामने केवल एक ही मकसद पैसा कमाने का होता है पर श्री खंडेलवाल ने वहां पर साहित्य की सेवा कर हिन्दी भाषी लोगों का मान बढ़ाया है। विदेश में जाकर पैसा कमाना कोई बुरी बात नहीं है पर वहां पर अपने देश और साहित्य की सेवा करना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा दायक है। वरिष्ठ साहित्यकार श्री कासट ने कहा है कि आज हम साकार और निराकार दोनों का ही सम्मान कर रहे है। श्री खंडेलवाल के साथ-साथ उनके काव्य सर्जन का सम्मान कर हम गौरवान्वित हो रहे है। आयोजन के सूत्रधार साहित्यकार पंकज पुरोहित सुबीर ने शिवना सम्मान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शिवना का सफर सीहोर से अमेरिका तक पहुंच गया है जिसके पीछे कहीं न कहीं श्री खंडेलवाल की भी भूमिका है।

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संचालन पत्रकार प्रदीप एस चौहान ने किया अंत में आभार पत्रकार शैलेष तिवारी ने माना। कार्यक्रम ब्‍लाग जगत से सर्वश्री दिनेश द्विवेदी (कोटा), लेफ्टिनेंट कर्नल गौतम राजरिशी (कश्मीर), वीनस केशरी (इलाहाबाद), रविकांत पांडेय (कानपुर ), प्रकाश अर्श (नई दिल्ली), अंकित सफर (मुम्बई) आदि भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के बाद आयोजित द्वितीय चरण काव्‍य गोष्‍ठी की विस्‍तृत रपट कल तथा वीडियो भी कल ।

15 टिप्‍पणियां:

  1. भावविभोर कर देने वाला स्वागत समारोह. जानकारी के लिए आभार.

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  2. भाई राकेश जी को सम्मान प्राप्ति पर ढेरों बधाइयाँ...शिवना के इस प्रयास की जितनी प्रशंशा की जाए कम है. शिवना की पूरी टीम को इस समारोह की सफलता के लिए भी बधाई.

    एक ही अफ़सोस मन में है के मैं चाह कर भी इस विशेष अवसर का हिस्सा न बन पाया, थोड़ी बहुत कसर आपकी इस रिपोर्ट और फोटो ने दूर करने की कोशिश की है पर सच तो ये है के गाज़र के हलवे के विवरण को पढ़ कर और उसके चित्र को देख कर उसके स्वाद का अंदाज़ा भले ही हो जाए लेकिन परम-आनंद तो उसे चखने से ही आता है ..:-)

    वीडियो का इन्तेज़ार है...


    नीरज

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  3. राकेश जी को ये सम्मान मिलना बहुत गर्व की बात है प्रवासी भारतीयों के लिए .... शिवना प्रकाशन और उसके साथ जुड़े लोगों की मेहनत का फल है ये सफल आयोजन .... खूबसूरत चित्रों से सज़ा ब्लॉग इस बात की गवाही दे रहा है की आनंद भरपूर रहा होगा ... सबको बहुत बहुत बधाई ....

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  4. राकेश जी को हार्दिक बधाई…………जानकारी के लिये आभार्।

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  5. विस्त् रित रिपोर्ट के लिये आभार. इस कार्यक्रम मे शामिल न हो पाने का अफसोस है.

    शिवना टीम को शानदार आयोजन के लिये बधाई!!

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  6. vविस्तरित रिपोर्ट के लिये धन्यवाद। राकेश जी को सरस्वती सम्मन के लिये बधाई। आयोजकों और प्रतिभागियों को भी बहुत बहुत बधाई। शिवना प्रकाशन का ऐसे आयोजन करना निश्चित ही साहितकारों और शिवना प्रकाशन के लिये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जिसेअके लिये पंकज सुबीर जी और बाकी स्टाफ को बहुत बहुत बधाई शुभकामनाये। विशेश्त: सुबीर जी को आशीर्वाद। शिवना पेअकाशन नित नई उँचाईयों को छूये।

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  7. आदरणीय श्री रखेश खंडेलवाल जी को इस सम्मान के लिए बहुत बहुत बधाईयाँ ! और सीहोर पहुँच कर एक बार फिर से मैं धन्य हुआ , दो दिन में जैसे दोनों जहान देख आया! कभी कभी खुद के खुशकिस्मती पर रश्क करने लगता हूँ ! गुरु जी के पास रहना , सम्मान समाहोर के बाद रात भर जागना, बातें करना , खुद की खिचाई पर खुद खुश होना , बाटी चूरमे का स्वाद , उफ्फफ्फ्फ़ !
    सोचता हूँ दिन ख़त्म ही ना होते ..... काश की ऐसा हो पाता !

    अर्श

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  8. राकेश खंडेलवाल जी को सलाम और उन्हें सम्मानित करने वाली सिहोर की संस्था और उस संस्था से जुड़े सभी लोगों का तहे दिल नमन।

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  9. खन्डेलवाल जी की कवितायें प्रेरित करती हैं सुन्दर लिखने के लिये।

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  10. राकेश जी को एक बार फ़िर से बधाई

    दो यादगार दिन -

    यादगार सम्मान समारोह

    यादगार काव्य पाठ

    घर पर रात १२ बजे से सुबह ६ बजे तक की यादगार बैठक

    और वापसी में रवि भाई से ट्रेन में रात २ बजे तक दिल खोल के बातचीत

    सब कुछ सपने के पूरा होने जैसा

    और राकेश जी का सरल व्यव्हार, उफ़...
    राकेश जी आप दिल दिमाग पर छाये हुये हैं

    @ नीरज जी
    गाज़र के हलवे के विवरण को पढ़ कर और उसके चित्र को देख कर उसके स्वाद का अंदाज़ा भले ही हो जाए लेकिन परम-आनंद तो उसे चखने से ही आता है ..:-)



    गाजर का हलवा इतना लाजवाब बना था कि मैने २ प्लेट खाया और अगले दिन सुबह भी टोह मे था कि शायद मिल जाये मगर अगले दिन तो गजब हो गया चूरमे के इतने लड्डू खाये कि पेट भी पनाह मांग गया :) :)

    (नोट - टिप्पणी सीमित शब्दों मे की गई, अन्य्था पोस्ट से बडी होने की आशंका थी )

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  11. आदरणीय राकेश जी के सम्मान की खबर पढ़ कर मेरा भी मन भाव विभोर हो गया. बहुत सुन्दर.

    जहाँ कविता के फूलों से गुंथी हैं वीथियाँ सारी,
    जहाँ ग़ज़लों की सरगम में घुली हर एक डाली है,
    जहाँ साहित्य के वृक्षों पे चिड़िया चहचहाती है,
    उसी बगिया के मौसम का कवि राकेश माली है.

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  12. ... maan ... sammaan ... aayojan ... svaagat ... bemisaal parilakshit ho rahaa hai ... sabhee ko haardik badhaai !!!

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  13. राकेश जी को हार्दिक बधाई ...और शिवना प्रकाशन को शुभकामनायें

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  14. तस्वीरें देख कर पता चल रहा है कि समारोह भव्य रहा होगा. राकेश जी को बहुत बहुत बधाई. शिवना प्रकाशन को भी इतने अच्छे आयोजन के लिए बहुत बहुत बधाई.

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