मित्रो बहुत व्यस्तता चल रही है नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले की। इस कारण इस बार तरही मुशायरे का मिसरा भी नहीं दिया गया। चूँकि पुस्तक मेला भी 5 मार्च तक रहना है, इसलिए इस बार हो सकता है कि तरही मुशायरा होली के बाद ही आयोजित हो पाए क्योंकि छह तारीख़ को दिल्ली से वापसी हो पाएगी उसके बाद एक ही दिन का समय ही बीच में। ख़ैर उससे कुछ नहीं होता हम लोग तो शीतला सप्तमी तक होली मनाते हैं इसलिए इस बार भी हम होली के बाद ही आयोजन करेंगे। तरही का मिसरा दिया जा रहा है इस पर अपनी ग़ज़लें प्रेषित करें।
“रंग, अबीर, गुलाल, फाग, रसिया, टेसू ख़तरे में है”
क़ाफ़िया है “टेसू” शब्द में आ रही “ऊ” की ध्वनि, जैसे जादू, तू, बाबू और रदीफ़ है “ख़तरे में है”
होली की धीरे-धीरे समाप्त हो रही परंपराओं और प्रथाओं को देख कर इस बार यह मिसरा दिया है। बहर पकड़िए और लिख डालिए ग़ज़ल। कोशिश रहेगी कि होली के साथ ही तरही का आयोजन हो पाए। देखते हैं क्या संभव हो पाता है।