शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमेरिका ) के कवि सम्मेलनों की श्रृंखला । कार्यक्रमों के संयोजक हैं--डॉ. सुधा ओम ढींगरा, डॉ. नंदलाल सिंह और अलोक मिश्रा। रचना श्रीवास्तव ( डैलस) की रपट ।

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमेरिका ) के कवि सम्मेलनों की श्रृंखला का आरम्भ ९ अप्रैल २०१० को डैलस से हुआ.. उत्तरी अमेरिका में यह संस्था प्रत्येक वर्ष तक़रीबन पंद्रह से सत्रह कार्यक्रम करवाती है और इन कार्यक्रमों के संयोजक हैं--डॉ. सुधा ओम ढींगरा, डॉ. नंदलाल सिंह और अलोक मिश्रा. इस बार कवि सम्मेलनों के सोलह कार्यक्रम विभिन्न शहरों में संपन्न होंगें. अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के तत्वाधान से प्रस्तुत हास्य कवि सम्मलेन में भारत के बहुचर्चित हास्य कवि श्री महेंद्र अजनबी, श्री आश करण अटल और श्री अरुण जेमिनी जी ने भाग लिया. डैलस संभाग की अध्यक्षा श्रीमती निशि भाटिया ने सभी स्वयं सेवकों के नाम बताते हुए उनको धन्यवाद दिया और कार्यक्रम को विधिवत तरीके से आरम्भ कराया I

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कार्यक्रम का प्रारंभ परम्परागत तरीके से ऐकल विद्यालयों के शुभचिंतक श्रीमती कल्पना फ्रूटवाला और श्री किशोर फ्रूटवाला ने दीप प्रज्वलित कर तथा श्रीमती कुसुम गुप्ता के नेतृत्व में सरस्वती बंदना से हुआ. आगे मंच संचालन के लिए निशि जी ने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के संयोजक डॉ.नन्दलाल सिंह को आमंत्रित किया. नन्दलाल जी की वाक्य पटुता और हास्य मिश्रित कथन ने लोगों का खूब मनोरंजन किया और मन मोह लिया . डैलस में आयोजित ये २५ वां कवि सम्मलेन था. आज के इस फ़िल्मी युग में जब ७०० से भी ज्यादा लोग कवि सम्मलेन का आनंद लेते हैं तो मन असीम आनंद से भर जाता है. आज से २५ साल पहले इसका प्रारंभ हुआ था , तब कुछ लोग ही ऐसे कार्यक्रमों में आते थे, पर धीरे धीरे लोग आते गए और कारवाँ बनता गया और आज ये कारवाँ काव्य प्रेमियों के जत्थे में परिवर्तित हो चुका है. नन्दलाल जी के शब्दों में "आज कवि सम्मलेन का रजत जयंती समारोह है. डैलस में दिसम्बर ८५ में पहले कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया था..स्वयं सेवकों /सेविकाओं की कार्य निष्ठां से ही हम आज यहाँ तक पहुंचे हैं ". नन्दलाल जी ने कवियों को सारगर्भित परिचय के साथ मंच पर आमंत्रित किया. पुष्प गुच्छ भेंट कर महेंद्र अजनबी जी का स्वागत श्रीमती अनीता सिंघल ने , आश किरण अटल जी का श्रीमती नीतू अग्रवाल ने और अरुण जेमिनी जी का श्रीमती परम अग्रवाल ने किया. मंच पर कवियों के आते ही पूरा हॉल करतल ध्वनि से गुंजायेमान हो उठा .

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कवि सम्मलेन का संचालन श्री अरुण जेमिनी जी ने किया. इन पंक्तियों के साथ किया उन्होंने महेन्द्र अजनबी जी को मंच पर आमंत्रित किया.....
मुस्कुराती जिंदगानी चाहिए
काव्य में ऐसी रवानी चाहिए
सारी दुनिया अपनी हो जाती है बस
एक उसकी मेहरबानी चाहिए
महेंद्र अजनबी जी ने बच्चों की बातों को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया I जिनको सुनके हँसते- हँसते पेट में बल पड़ गए एक उदाहण देखिये I
एक बच्ची से पूछा गया कि राम लक्ष्मण तो ठीक पर सीता जी वन क्यों गईं ?
बच्ची ने कहा,
सीता जी के वनवास जाने में बहुत बड़ी सीख है ..
तीन- तीन सास जब घर में हो तो जंगल ही ठीक है ..
ट्रक के पीछे लिखी पंक्तियों और समाचार पत्र के शीर्षकों से हास्य की उत्पति कैसे होती है बताया I जब कवि एक पंक्ति पढ़ता है और श्रोता उस को पूरी कर देता है, उस से किस तरह हास्य उत्पन्न होता है, एक उदाहण देखिये---
जेल में कवि सम्मलेन हो रहा था ...
कवि बोला आदमी यूँ हालातों में जकड़ा नहीं जाता
कैदी बोला कुत्ते की पूंछ पे पैर पड़ा न होता तो मैं पकड़ा नहीं जाता
ट्रेन की भीड़ पर सुनाई गईं उनकी हास्य व्यंग्य की कविता खूब सराही गई...
ट्रेन में इतनी भीड़ थी भाई
के हाथ को मुँह भी नहीं देता था दिखाई
एक आदमी ने बीड़ी सुलगाई
और मेरे मुहँ में लगाई
हास्य रस की डरावनी कविता सुनाने जा रहा हूँ, कह के महेंद्र जी ने भूतों पर लिखी अपनी कविता सुनाई जिस में व्यंग्य के नुकीले बाण थे I
वे एक दुसरे से बतिया रहे थे
आदमियों के एक से बढ़ के एक भयानक किस्से सुना रहे थे
ये कल रात ही शहर हो के आया है
इस पर जरूर किसी आदमी का साया है
किसी झाड़ फूँक वाले को बुलाओ इस पर से आदमी उतरवाओ
-------
पेड़ से उल्टा लटका देगा और वोट माँगेगा
और याद रख अपने इलाके की वोटर लिस्ट में तो
तू वैसे भी अभी तक नहीं मरा होगा
---
एक वरिष्ठ भूत बोला उन इन्सानों की बस्तियों के बारे में सोच
जो साथ- साथ होते हुए भी वीरान है
उनसे ज्यादा आबाद तो कब्रिस्तान और शमशान है....

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इस के बाद अरुण जेमिनी जी ने आश करण अटल जी को मंच पर ये कहते हुए बुलाया कि इनके नाम को लिखने में हमेशा गलती हुई है, इन के नाम में आशा भोंसले वाला आश है, कुभ्करण वाला करण है , और अटल बिहारी बाजपेई वाला अटल है... तीन-तीन नामों का सम्मिश्रण हैं.
मिडिया पर सुनाई उनकी कविता ने सभी का मन मोह लिया....
क्या उनको पता था कि अंतिम साँस लेने के बाद वो मर जायेंगे...
जी पता था...
जब उनको पता था कि अंतिम साँस लेने के बाद वो मर जायेंगे तो उन्होंने अंतिम साँस क्यों ली?
जी राष्ट हित में ..
"हाइवे के हमदम" शीर्षक की कविता ने लोगों को इतना हँसाया की आँखें झलक उठीं ...
ये है दुनिया का सब से बड़ा ओपन एयर शौचालय
आप यहाँ क्या कर रहें है ?
जी में यहाँ क्या कर रहा हूँ ये तो आप देख ही रहे हैं...
पर आप यहाँ क्या कर रहे हैं ?
इसके बाद उन्होंने अपनी कविता "क्या हमारे पूर्वज बंदर थे" सुनाई...ये कविता राजिस्थान में कक्षा ११ की पाठ पुस्तक में पढ़ाई जाती है...

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अरुण जेमिनी जी ने हँसी वर्षा के इस क्रम को जारी रखा. उनके हरयाणवी अन्दाज ने कविता को और भी मनोरंजक बना दिया
एक आदमी कुत्ते को घुमा रहा था दुसरे ने पूछा----
ताऊ कुत्ते को घुमरिया है के
नहीं ये तो ऊंट है कद छोटा रह गया है
अरुण जेमिनी जी की कविता "२१वी में सदी में ढूंढते रह जाओगे " ने हास्य के साथ लोगों को सोचने पर भी विवश कर दिया.
चीजों में कुछ चीजें बातों में कुछ बातें वो होंगी
जिन्हें कभी देख नहीं पाओगे
२१वी में सदी में ढूंढते रह जाओगे
अध्यापक जी सचमुच पढ़ाये
अफसर जो रिश्वत न खाये
बुद्धिजीवी जो राह दिखाये
कानून जो न्याय दिलाये
बाप जो समझाए
और ऐसा बेटा जो समझ जाये
ढूँढते रह जाओगे
नेहरु जैसी इज़्ज़त
सुभाष जैसी हिम्मत
पटेल के इरादे
शास्त्री सीधे- साधे
पन्ना धाय का त्याग
राणा प्रताप की आग
अशोक का बैराग
तानसेन का राग
चाणक्य का नीति ज्ञान
इन्दिरा गाँधी जैसी बोल्ड
और महात्मा गाँधी जैसा गोल्ड
ढूंढते रह जाओगे
कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री अखिल कुमार जी ने पिछले कवि सम्मेलनों का स्लाइड शो दिखाया ,जिस को दर्शकों ने खूब सराहा...

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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समीति ने हिंदी का नन्हा सा जो दिया जलाया था, वो आज सूरज बन चमक रहा था. इस का भान इसी बात से हो रहा था कि आज ७०० से भी अधिक लोग इस हास्य कविसम्मेलन का आन्नद लेने के लिए यहाँ एकत्रित थे लगातार तीन घंटा तीस मिनट चले इस कवि सम्मलेन में हँसते- हँसते लोगों के पेट में बल पड़ गए. जीवन की आपाधापी में हम हँसना लगभग भूल ही गए हैं, इस तरह के आयोजन हमें जीने की नई उर्जा देते हैं. कुछ लोगों के अनुसार तो वो आज जितना हँसें हैं, उतना जीवन में शायद ही कभी हँसे हों. उनका ये भी कहना था कि बड़े- बड़े कॉन्सर्ट में जाने से अच्छा है कि कवि सम्मेलनों में जाया जाए. मिडलैंड और ह्यूस्टन के कार्यक्रम भी बहुत सराहनीय रहे.. ९ मई तक इनके कार्यक्रम चलेंगें ..इन कवि सम्मेलनों में हिन्दी भाषी जब एक छत तले इकट्टे होते हैं तो अमेरिका में भी भारत बसा महसूस होता है....चारों तरफ देश की महक फैली महसूस होती है.....

8 टिप्‍पणियां:

  1. अपनी चीजें हर जगह ढूँढ़ ली जाती हैं। देकिये ना हिंदी प्रेमियों ने किस तरह २५ वर्षों से जला रखी है ये लौ।

    पढ़ना अच्छा लगा इस आयोजन के सार दर साल शुभ आयोजन हेतु शुभकामनाएं।

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  2. हिन्दी और हिन्दी से सजी रचनाओं का जलवा विदेशों में भी बहुत ज़्यादा है...इसका एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत की आपने..बढ़िया वर्णन...सुंदर प्रस्तुतिकरण के लिए धन्यवाद

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  3. रीपोर्ट पढ़ कर ही जब पेट में बल पड़ गए तो सोचा जा सकता है वहाँ बैठे श्रोताओं का क्या हाल हुआ होगा...नन्द लाल जी की इस काव्य तपस्या को नमन...
    नीरज

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  4. एक अच्छा प्रयास हमेशा सफल होता है, जिसका जीवंत उदाहरण आपने इस रिपोर्ट में बहुत अच्छे से पिरोया है.
    इस वर्ष तो इसकी शुरुआत हुई है, आगे इसके बारे में अभी और भी रिपोर्ट मिलेंगी इसी आस में इस साहित्य की इस तपस्या को ढेरों शुभकामनयें

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  5. बढ़िया रिपोर्ट !! और हिन्दी कवियों का अमरीकी धरती पर स्वागत है
    - लावण्या

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  6. हिंदी वो गुल है जो हर गुलिस्तान महकाए रखती है और यही बात अमरीका में भी हुई ..
    मगर सबसे सच्ची बात तो ये है के जो इसका माली है वहाँ पर उको ज्यादा बढ़ाई इस बात के लिए के ये शम्मा जलाए हुआ हैं वहाँ भी ... इस खुबसूरत पोस्ट के लिए अब क्या कहूँ...
    जेमिनी जी की कविताओं ने शमा बांध रखा है ...


    आपका
    अर्श

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  7. अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति को कवी सम्मलेन रजत जयंती की हार्दिक बधाई

    ट्रेन में इतनी भीड़ थी भाई
    की हाँथ को मुह भी नहीं देता था दिखाई ... हा हा हा

    क्या उनको पता था की वो अंतिम सांस लेने के बाद मर जायेंगे ... उफ्फ्फ

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  8. अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति को इस आयोजन के लिये बधाई। सुबीर क्या मुझे किसी सदस्य का फोन या ई मेल बता सकते है? मै आज कल अमेरिका मे हूँ अगर कहीँ कैलिफोर्निया के पास आयोजन हुया तो कम से कम इसका आनन्द ले सकती हूँ। मुझे मेल से पता दें तो कृपा होगी। आशीर्वाद। आज क्जल व्यस्त हूँ इस लिये ब्लाग जगत से कुछ दूर रहती हूँ।

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