सोमवार, 10 मार्च 2008

कल चौदवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा, कुछ ने कहा ये चांद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा

आज हम प्रारंभ करते हैं पहली ही बहर के साथ । ये बहर कहलाती है बहरे रजज और इसका स्थिर रुक्‍न है मुस्‍तफएलुन या 2212 ,  इस पर कई सारी अच्‍छी ग़ज़लें कही गई हैं और एक सुंदर ग़ज़ल तो उपर आपने देखी है । उसको ही फिर से देखें कि क्‍यों ये बहरे रजज है और अगर है तो बहरे रजज की सालिम है या फिर मुजाहिफ बहर है । चलिये तकतीई करते हैं ।

कल चौ द वीं की रा त थी   शब भर र हा चर चा ति रा
कुछ ने क हा ये चां द है कुछ ने क हा चेह रा तिरा
2212 2212 2212 2212
मुस्‍ तफ ए लुन मुस्‍ तफ ए लुन मुस्‍ तफ ए लुन मुस्‍ तफ ए लुन

 

अब यहां पर देखा जाए कि कुल मिलाकर हो क्‍या रहा है । चारो ही रुक्‍न अपने मूल वज्‍न पर ही हैं तो इसका एक अर्थ तो ये हो ही गया हे कि ये एक सालिम बहर की ग़ज़ल है । चारो ही रुकनों का वज्‍न वही है जो कि बहर का स्‍थायी वज्‍न है 2212 । जैसा कि हम पहले देख चुके हैं कि अगर किसी बहर के सभी के सभी रुक्‍न अपने मूल वज्‍न पर ही होते हैं तो फिर वो ऐ सालिम बहर हो जाती है या कि उसे समग्र बहर भी कहा जा सकता हैं अगर आप हिन्‍दी में कहना चाहें तो । अब रुक्‍न कितने भी हो सकते हैं दो भी तीन भी और चार भी  हो  सकते हैं । चलिये एक काम तो हो ही गया कि हमने बहर के प्रकार का पता लगा लिया । वो ये कि चूंकि रुक्‍न मुस्‍तफएलुन  है अत: ये बहरे रजज है क्‍योंकि बहरे रजज का स्‍थायी रुक्‍न ये ही है । और चूंकि चारों ही रुक्‍न समग्र हैं कोई कमी नहीं हो रही है तो ये एक सालिम बहर हो गई है । अब चलिये बात करते हैं कि बहर का पूरा नाम क्‍या होगा । तीन तरीके से बहर का नाम निकाला जाता है पहला तो क्‍या रुक्‍न है दूसरा ये कि कितने रुक्‍न हैं और तीसरा ये कि रुक्‍न में कहीं कोई कमी या बढ़ी तो नहीं हो रही हैं ।

पहले तो ये कि क्‍या रुक्‍न है तो वो तो हो गया कि ये मुस्‍तफएलुन  है अत: बहर का नाम हो गया रजज  अब दूसरी बात ये कि कितने रुक्‍न हें तो वो भी  तय हो गया कि चार रुक्‍न हैं तो ये हुई मुसमन  अब चलिये तीसरी चीज की तलाश क जाए कि कहीं कोई रुक्‍न मुजाहिफ तो नहीं हो गया हे । तो ऐसा नहीं हो रहा है अत: बहर सालिम है । तो हमने बहर का नाम निकाल लिया कि ये बहरे रजज मुसमन सालिम है ।

अब ये देखें कि अगर बहरे रजज को कोई रुक्‍न मुजाहिफ हो जाए तो क्‍या क्‍या हो सकता है । मुजाहिफ हो जाने को हम ये कह सकते हैं कि अधूरा रह जाना । मतलब कि पूरा तो वही है 2212  मगर हो ये भी सकता है कि कहीं पर कोई रुक्‍न अधूरा रह जाए और उसे हम मुजाहिफ कहें । वो रजज वाले प्रकरण में क्‍या क्‍या हो सकता है ये देखें ।

1 मुस्‍तफएलुन 2212 - मुफतएलुन 222 मतलब एक पूरी की पूरी लघु समाप्‍त हो गई है । मगर ये मुफतएलुन  भी वास्‍तव में रजज का ही एक मुजाहिफ रुक्‍न है ।

1 मुस्‍तफएलुन 2212 - मुफाएलुन 1212  हुआ क्‍या प्रारंभ के दीर्घ में एक की कमी हुई और वो दीर्घ से लघु रहा मगर रहा फिर भी  इसे रजज के मुजाहिफ रुक्‍न में ही गिना जाएगा ।

1 मुस्‍तफएलुन 2212- मुफतएलातुन 2222  अब यहां पर क्‍या हो रहा है यहां पर हो रहा है इजाफा या वृद्धि और वो रही है बीच की एकमात्र लघु में जो कि अब हो रही है दीर्घ । मगर इसे भी कहा तो रजज की बहर जाएगा क्‍योंकि इसकी उत्‍पत्ति भी मूल से ही हो रही है ।

ये कुछ उदाहरण हैं कि मूल रुक्‍न में कमी या वृद्धि होने से क्‍या होता है और उसका बहर पर क्‍या प्रभाव पड़ता है । अब हमने बहरें प्ररंभ कर दी हैं तो अच्‍छा होगा कि बहरों के ऊपर काम भी हो सो आप सब अगली कक्ष के पहले  बहरे रजज मुसमन सालिम  पर कुछ शेर या गजल कहने की कोशिश करें । बहरे रजज की मुजाहिफ बहरों की बात करेंगें हम अगली कक्षा में । प्रयास होगा कि कक्षाओं के बीच में जो दूरी हो रही हे वो न हो पाए और नियमित रूप से कक्षाएं लग सकें ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. गुरू जी होम वर्क कर लाए हैं..कुछ संशय था लेकिन फिर भी कर दे रहे हैं क्यों कि..अगर गलत हुआ तो लगे हाथ पता भी चल जाएगा..

    फिर आज हम गम से भरे, फिर आज है तुम से गिला,
    तुम गैर को मिल क्यों गए, हम क्यों अके ले हैं भला।
    (क्यो के प्रयोग पर थोड़ा संशय है)

    तुम जानते हो जिंदगी, तुम से शुरू, तुम से खतम,
    तुम से सहर, तुम से सबा, तुम जो मिले तो सब मिला।

    अब की ज़रा खुद आइये, कासिद कहाँ तक आँएगे,
    नज़रों से नज़रें भी मिलें, दिल अब बहुत दिल से मिला।

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  2. यस सर. जहाँ तक बहर पर शेर कहने की बात है तो थोड़ा समय दीजिये दो चार दिन में पूरा होमवर्क आपके मेल बॉक्स में उपस्थित कर दूँगा.

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