शनिवार, 25 अगस्त 2007

क्‍या आप भी ग़ज़ल का व्‍याकरण समझना चाहते हैं

ग़ज़ल को लेकर काफी सारी भ्रांतियां हैं लेकिन एक बात जो ग़ज़ल को लेकर कही जा सकती है वो ये कि ग़ज़ल में कहन बहुत ही सीधी सादी होती है । जिस तरह हिंदी में कविता के लिये पिंगल शास्‍त्र है वैसे ही उर्दू में ग़ज़ल को लेकर बेहरें होती हैं । और ये आवश्‍यक होता है कि लिखने वाला उन बेहरों पर ही लिखे उर्दू व्‍याकरण को उर्दू अरूज़ भी कहा जाता है । ग़ज़ल को मेहबूबा से बातें करना कहा जाता है अब ये बात दो तरह की है अगर ये इश्‍क हक़ीक़ी है तो मतलब परमात्‍मा से बातें करना और अगर ये इश्‍क मजाज़ी है तो मतलब प्रेमिका से बातें करना है । वैसे सूफियों में प्रमिका उस ईश्‍वर को भी माना गया है और तदानुसार ही ग़ज़लें कहीं गईं हैं । अब बात करें ग़ज़ल की ग़ज़ल जो बहुत सीधे सादे तरीके से अपनी बात कहती है । ग़ज़ल और गीत में फ़र्क़ ये है कि गीत को जहां पूरा का पूरा एक ही भाव को लेकर चलना होता है वहीं ग़ज़ल में हर शेर स्‍वतंत्र होता है । हर शेर के दो भाग होते हैं पहले भाग को मिसरा उला कहा जाता है तो दूसरे को मिसरा सानी । ग़ज़ल के पहले शेर को मतला कहा जाता है और आखि़र में जो शेर आता है जिसमें शायर का नाम होता है उसे मक्‍ता कहा जाता है । पूरी की पूरी ग़ज़ल एक ही बहर पे चलती है अर्थात लघु और दीर्घ मात्राओं को क्रम एक सा रहता है यहां हिंदी की तरह जोड़ नहीं चलता । और लघु तथा दीर्घ मात्राओं के छोटे छोटे समेह बनाए जाते हैं जिनको रुक्‍न कहा जाता है । इन्‍हीं छोटे छोटे रुक्‍नों से मिलकर मिसरे बनते हैं ओर मिसरों से शेर और शेरों से पूरी ग़ज़ल । ये रुक्‍न वास्‍तव में मात्राओं का एक गुच्‍छा होता है जिसको एक साथ बोल कर फिर ठहर कर आगे बढ़ा जाता है । उर्दू अरूज़ में बेहरों का ज्ञान होता है । ग़ज़लों में एक फायदा ये है कि यहां मात्राएं उच्‍चारण के हिसाब ये तय होतीं हैं कहीं दिवाना लिखा जाता है तो कहीं दीवाना । कहीं पर मैं को दीर्घ में लिया जाएगा तो कहीं लघु में और ये आप अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं । आज केवल इतना ही लेकिन मैं अब अपने ब्‍लाग पर उर्दू पिंगल शास्‍त्र की पूरी माला प्रकाशित करने जा रहा हूं बशर्ते आप सभी का सहयोग तथा उत्‍साह वर्द्धन टिप्‍पणियों के रूप में मिले ।

9 टिप्‍पणियां:

  1. दिनेश शुक्ल25 अगस्त 2007 को 6:36 pm

    हम पिंगल शास्त्र की प्रतीक्षा करेंगे.

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  2. बहुत अच्छी जानकारी दी आपने, धन्यवाद!

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  3. बहुत अच्छे ! जारी रहें

    बहरों के बारे में उदहारण देकर समझाएँगे तो समझने वाले के लिए आसान रहेगा।

    और हां, अपने लेख को अलग अलग पैराग्राफ में बाँटें। पढ़नेवाले को सहूलियत होती है।

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  4. रुक्न का भी उदाहरण दें ।
    कक्षा में हाज़िरी दर्ज़ ।

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  5. गुरु जी,
    आज ही पढना शुरू किया है.
    २००७ अगस्त के पहले पोस्ट से.

    इतनी अच्छी जानकारी के लिए धन्यवाद.

    -राजीव भरोल

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  6. guruji me aap se ghajal vyakaran sikhna chahta hu mujhe ye gum he ki iske baare me jaankari mujhe bahut der se mili...

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  7. Bahut dhanyawad guru ji.kal hi aap se is jagah ke bare me pta Chla. Bahut utsahit hoon

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  8. हम सबको इन्तजार है आपकी इस जानकारी का सुबीर जी

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  9. हम सबको इन्तजार है आपकी इस जानकारी का सुबीर जी

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